हरियाणा की बोली/भाषा, साहित्य एवं संस्कृति
Language, Literature & Culture of Haryanaहरियाणा की भाषा, बोलियों, साहित्य और संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
Notes पढ़ें →Haryana GK topic – “हरियाणा के प्रमुख त्यौहार (Festivals in Haryana)”, is important section for HSSC and HPSC Exams. Many Questions were asked in pervious year’s Haryana state competitive exams from this haryana gk topic. Let’s start haryana gk topic – हरियाणा के प्रमुख त्यौहार (Festivals in Haryana).
भारत का उत्तरी राज्य हरियाणा अपने मस्तमौला अंदाज के साथ ही त्यौहार मनाता है। अनादि काल से यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उद्गम स्थल रहा है। यहां के त्यौहार उत्साह, उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हरियाणा राज्य भारत की समृद्ध, शानदार संस्कृति को विभिन्न प्रकार के मेलों और त्यौहारों में मनाता है जो पूरे देश में यहाँ एक ही धूमधाम और खुशी के साथ मनाए जाते हैं।
श्रावण मास के शुक्लपक्ष की तृतीया (तीज) को हरियाणा में झूळों (पींघ) का त्यौहार मनाया जाता है जिसे ‘तीज’ के नाम से जाना जाता है। वैसे ‘तीज’ एक लाल रंग का प्यारा सा कीट होता है जो मिट्टी में रहता है और बरसात के दिनों में तीज त्यौहार के समय ही दिखाई पड़ता है। इस दिन सभी लड़कियां वे अपने हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलती हैं।पींघ-पाटड़ी, बहन की कोथली के लिए बनाये जाने वाले पकवान जैसे कि – गुलगुले, सुह्वाली, नमकीन, भुजिया, बतासे-मखाणे, शक्कर-पारे इत्यादि और कुछ लोकगीत जैसे कि – पींघ ऊँची चढ़ा के सासू का नाक तोड़ना, बागों में झूले-झूलना इत्यादि तथा नीम पे निम्बोली लगना, वातावरण में सावन के लोकगीतों की स्वर-लहरियां इस त्यौहार की पहचान और इस उत्सव को मनाने के भिन्न-भिन्न रस्म और रिवाज हैं।
इस त्यौहार से बहुत से त्यौहारों की शुरुआत होती है जो कि देवोत्थान एकादशी (“देवठणी ग्यास) तक चलते हैं। इसीलिए कहावत बनी है –
📜 तीज से जुड़ी प्रमुख हरियाणवी कहावतें
यह त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो पूरे भारतवर्ष में भाई-बहन के अटूट प्यार का प्रतीक है, जब बहनें भाइयों की कलाइयों पर राखी (पोह्ची) बांधती हैं और भाई बहन की हर संकट में मदद करने का प्रण लेते हैं।इसमें भाई को टीका लगाना, फिर राखी बांधना और मिठाई खिलाना और फिर भाई का बहन को शगुन देना जिसके साथ उसके दुःख-सुख में हर पल उसके साथ खड़े रहने का वचन दोहराया जाता है।इस त्यौहार की महता इस बात से और भी बढ़ जाती है कि इस दिन सार्वजनिक वाहनों खासकर हरियाणा सरकार की बसों में बहनों के लिए यात्रा नि:शुल्क होती है।
यह त्यौहार रक्षा-बंधन के ठीक नौ दिन बाद बध्विन माह की कृष्ण पक्ष की नवमी को आता है। इस दिन बहनों के द्वारा भाइयों के हाथों पे रक्षा-बंधन के दिन बाँधी गई राखियों को उतार के गूगा जी को सौंपने का दिन होता है।गाँव की गली-गली में गूगा जी के प्रवर्तक डेरू और मोर-पंख वाली नीली पताका ले, गीत गाते हुए आपकी राखी पताका पे बंधवाने आते हैं।गूगा नवमी एक आध्यात्मिक त्योहार है, जिसमें सांप-पूजा होती है। लोग गूग्गा-पीर या ज़हीर-पीर की पूजा करते हैं जो खतरनाक सांप के द्वारा काटे हुए लोगों को ठीक करने की शक्ति के लिए प्रतिष्ठित किया गया था।
यह त्यौहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं को आता है। दशहरा भगवान राम जी की रावण पर विजय की याद में मनाया जाता है। इस त्यौहार के स्थानीय आकर्षण होते हैं:
कार्तिक माह के प्रथम पक्ष की रातों को गाँव की बहु-बेटियां कुँए-तालाबों पर स्नान टोलियाँ बना कार्तिक स्नान के गीत गाती हुई स्नान करने जाया करती थी। इस स्नान के इतने इंतजाम होते थे कि हर कुँए-जोहड़ पर बुर्जियां ओर बुर्ज बनाए गए थे, जोहड़ों में सीढियां उतारी गई होती थी ताकि हमारी बहु-बेटियों के स्नान को सुविधा हो सके।
इस वक्त की ख़ास बात यह होती थी कि जिस पहर में बहुत-बेटियां स्नान करने जाती थी, गाँव का हर युवक-बुजुर्ग उस पहर के दौरान कुँए-तालाबों के पास से भी नहीं गुजरता था। आज के दिन वैसे तो वो वाले कुँए-तालाब ही नहीं रहे और जहां रहे वहाँ भाईचारा नहीं रहा और बदलते परिवेश ऩे सब-कुछ लील लिया है, वरना आज से दस साल पहले तक कार्तिक की रातों में गाँव के चारों ओर के कुँए-जोहड़ों से लोकगीतों की स्वर-लहियाँ छाल मारा करती थी।इस मधुरिमा भरे वातावरण और सोहार्द का सबसे बड़ा मूल होता था गाँव के “गाम और गोत” का नियम। जैसा कि गाम और गोत के नियम के अनुसार गाँव की छत्तीस बिरादरी की बेटी आपकी बहन बताई गई और मानी गई है, तो कोई चाहकर भी उधर जाना चाहता था तो इस शर्म में अपने-आप कदम रोक लिया करता था कि नहीं उधर तो मेरी बहनें होंगी, मैं उधर कैसे जा सकता हूँ।
यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। विश्व प्रसिद्ध इस त्यौहार को हरियाणा में पूरे धूम-धाम से मनाया जाता है। “छोटी दिवाली” सबसे पहले आती है और धार्मिक संस्कार और परंपराओं को पूरी ईमानदारी और भक्ति के साथ मनाया जाता है। हरियाणवी दिवाली के ख़ास आकर्षण इस प्रकार हैं:
यह गाँव के मुस्लिम समुदाय का सबसे मुख्य त्यौहार है। इस दिन हर भाई एक दूसरे के गले मिलकर अल्लाह की अरदास करता है।
यह त्यौहार मंगसर (मार्गशीर्ष) माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। वो दिन जिस दिन के बाद से ब्याह-शादियों का शीतकालीन स्तर शुरू हो जाता है। इस अवसर के एक मुख्य लोकगीत का मुखड़ा:
इस दिन गुड़ या चीनी के मीठे चावल बनाए जाते हैं और शादी वाले घर में शादी के दिन से पहले भी मीठे-चावल बनते हैं, जिनको खुद भी खाया जाता है और बांटा भी जाता है। इन चावलों को बरात के नाम के चावल कहा जाता है।
लोहड़ी, मकर संक्रांति से एक दिन पहले हरियाणा राज्य में मनाई जाती है। पंजाबियों के समुदाय के लिए, लोहड़ी का त्यौहार एक बहुत ही खास त्यौहार है। सभी स्थानीय लोग अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं और मिठाई, फूला हुआ चावल और पॉपकॉर्न को आग की लपटों में फेंक देते हैं। वे गाने गाकर और अभिवादन का आदान-प्रदान करके खुद को महफिल में शामिल करते हैं। नवविवाहित दुल्हन और नवजात बच्चे की पहली लोहड़ी बेहद महत्वपूर्ण है।
बड़े बुजुर्गों की मान-मनुहार के इस त्यौहार को – पौह महीने (पौष मास) में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है। इस त्यौहार के ख़ास आकर्षण:
बैसाखी का त्यौहार हरियाणा राज्य में पंजाबियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिसे बसंत ऋतू के आने, पेड़-पौधों और फसलों में नए अंकुर फूटने की ख़ुशी में हर्षित संगीत और नृत्य के साथ मनाया जाता है। यह हर साल 13 अप्रैल को पड़ता है और 36 साल में एक बार 14 अप्रैल को पड़ता है। इससे जुड़े कुछ बिंदु निम्नलिखित हैं:-
यह त्यौहार फागुन माह की पूर्णिमा को हरियाणा में सबसे बड़े त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है। लोगों में इस त्यौहार का जोश एक सप्ताह पहले से ही चढ़ना शुरू हो जाता है। रंग, कोरडे और पानी के इस त्यौहार के ख़ास आकर्षण इस प्रकार है:
मेख का दिन गेहूं की पक चुकी फसल की कटाई करने का सबसे सटीक दिन माना गया है।
यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। सीली-सात्तम को माना जाता है कि होली-फाग से पहले से भी चला देवर-भाभी का कोरडे का खेल इस विराम ले लेता है यानी होली-फाग के भी सात दिन बाद। और इसी के साथ वो कहावत लागू हो जाती है कि
इसके बाद अगला बड़ा त्यौहार आती है – तीज, जो त्योहारों के मौसम का नया बीज बो के जाती है और फिर यह सिलसिला साल-दर-साल यूँ ही चलता जाता है।
गंगोर का त्यौहार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तीज (मार्च/अप्रैल) को आता है। हरियाणा में यह राजस्थान राज्य से लगते कुछ जिलो में मनाया जाता है। गंगोर और ईशर की विशाल मूर्तियों को एक जुलूस में निकाला जाता है और भक्ति की धुनें प्रभु की स्तुति में तब तक गाई जाती हैं, जब तक वे पानी में डूब नहीं जाते।यह मुख्य रूप से एक वसंत त्योहार के रूप में माना जाता है और बहुतायत की देवी गौरी के सम्मान में मनाया जाता है। घर की अविवाहित महिला सदस्य अपनी पसंद के पति या पत्नी के लिए पूजा करती हैं जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। पूर्ववर्ती पखवाड़े में देवी की पूजा की जाती है।
सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेले को रंगों की बौछार के साथ फरीदाबाद के सूरजकुंड में मनाया जाता है। इस मेले में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की अनूठी विविधता शामिल है, जो भारत की ग्रामीण विशेषता को प्रदर्शित करने के लिए बनाई गई है।
कुरुक्षेत्र में उत्सव गीता जयंती के साथ होता है, जो श्रीमद भगवद गीता के जन्म का प्रतिनिधित्व करता है। भागवत गीता में मौलिक सत्य शामिल हैं और जीवन का तरीका घोषित करता है।
पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल हर साल दिसंबर के महीने में ‘पिंजौर गार्डन’ में आयोजित किया जाता है और यह त्योहार अपनी ऐतिहासिक परंपरा के साथ हरियाणा की समृद्ध संस्कृति का समर्थन करने के लिए आयोजित किया जाता है।
हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल जून या जुलाई के महीनों में होता है। ग्रीष्मकाल में स्वादिष्ट आमों पर एक अच्छी दावत, हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल इसका प्रमाण है। यह पिंजौर के यादविंद्रा गार्डन में होता है। यह स्थान चंडीगढ़ से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है।हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल के पीछे मुख्य विचार आम की जबरदस्त लोकप्रियता को बढ़ाना और उजागर करना है। हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल से जुडी कुछ बातें:-
महाभारत महोत्सव प्रत्येक वर्ष हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित किया जाता है। यह कई समारोहों और समारोहों के साथ मनाया जाता है और हरियाणा त्योहारों में से एक है।
यह त्यौहार हरियाणा राज्य में महिलाओं के जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जैश के महीने या मई/जून के महीने में मनाया जाता है। महिला लोग अपने परिवार के कल्याण के लिए कुछ धार्मिक संस्कार और अनुष्ठान करते हैं। वे पूरे व्रत रखते हैं और पानी से भी बचे रहते हैं।
नवरात्रि या नवरात्र एक हिंदू भक्ति और नृत्य का त्योहार है। नवरात्रि शब्द का अर्थ है संस्कृत में नौ रातें। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर, सभी आठ दिनों और नौ रातों में सारद मासी अस्विन की अवधि में मनाया जाता है, इसका महत्व है और उच्चतम देवी या देवी के तीन अलग-अलग पहलुओं की पूजा करने के लिए तीन दिनों के सेट में विभाजित है।
इन त्योहारों के अलावा गाँव में सारे राष्ट्रीय सरकारी त्यौहार जैसे की स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, गाँधी और शास्त्री जयंती भी मनाई जाती हैं।
हरियाणा राज्य सरकार के त्यौहार जैसे कि हरियाणा शहीदी दिवस, हरियाणा जयंती भी बड़े चाव से गाँव में मनाये जाते हैं।
आजादी की लड़ाई में शहीद हुए शहीदों की जयन्तियां जिनमें मुख्यत: नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जयंती, शहीद भगत सिंह जयंती, शहीद उधम सिंह जयंती, चौधरी छोटू राम जयंती मनाई जाती हैं।
वैदिक देवी-देवताओं में मुख्यत: हनुमान जयंती, राम-नवमी, जन्माष्टमी (भगवान कृष्ण का जन्मदिन- बध्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी), परशुराम जयंती, रविदास जयंती, कबीरदास जयंती, बाल्मीकि जयंती, शिवरात्रि बड़ी उमंग से मनाई जाती हैं।
गाँव के लोग निम्नलिखित भिन्न-भिन्न मेलों में गाँव के अंदर-बाहर आयोजन पर बड़े उमंग-उत्साह से भाग लेते हैं।
तीज के झूलों में सावन के गीतों के मेले
कार्तिक स्नान के बेलाएं
होली-फाग के दिन होली मेला व पूजन
गूगा नवमी का मेला
दशहरे की रामलीला
चाँद की चांदनी में गींड खेलना
सांझी का जोहड़ में तैरा के आना
भिन्न-भिन्न अखाड़े-दंगलों के आयोजन
गाँव दर गाँव स्थानीय देवी-देवताओं की मान्यताये और उन पर लगने वाले मेले
गाँव की देवी का मेला – सीली सात्तम
सूर्य-ग्रहण मेला
इतियादी प्रमुख आयोजन
⭐ HSSC/HPSC Most Important Topic ⭐⭐⭐⭐⭐ — हरियाणा की संस्कृति, लोकजीवन और धार्मिक परंपराओं से जुड़े त्यौहार HSSC CET, Haryana Police, Group C/D और HPSC परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।
हरियाणा भारत की प्राचीन वैदिक भूमि है। यहाँ के त्यौहार कृषि, ऋतु परिवर्तन, धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़े हैं।
हरियाणा में त्यौहार तीन प्रमुख वर्गों में बाँटे जा सकते हैं:
⭐ HSSC Fact: हरियाणा पर्यटन विभाग पूरे वर्ष कई सांस्कृतिक त्योहार आयोजित करता है जिनमें सूरजकुंड मेला, बैसाखी उत्सव, आम मेला और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव सबसे महत्वपूर्ण हैं।
श्रावण (जुलाई–अगस्त) • महिलाओं का प्रमुख लोक पर्व; झूले, मेहंदी, लोकगीत।
13–14 अप्रैल • रबी फसल कटाई का पर्व; करनाल, पिंजौर।
भाद्रपद • गुग्गा पीर की पूजा; साँपों से रक्षा की लोक मान्यता।
मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) • कुरुक्षेत्र; गीता जयंती पर आयोजित।
फरवरी • फरीदाबाद; विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प मेला।
जुलाई • पिंजौर (यादविंद्र गार्डन)।
होली के बाद • शीतला माता पूजा; बासी भोजन का प्रसाद।
जनवरी–फरवरी • सरस्वती पूजा; पीले वस्त्र।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी • सुहागिन महिलाओं का व्रत।
चैत्र • गौरी पूजा; विशेषकर दक्षिण हरियाणा।
कार्तिक अमावस्या • लक्ष्मी पूजा; राज्यव्यापी।
फाल्गुन • रंगों का त्योहार; ग्रामीण हरियाणा की विशेष परंपराएँ।
भाद्रपद • कुरुक्षेत्र, पेहोवा आदि।
फाल्गुन • कैथल, कुरुक्षेत्र, सोहना, आदि।
इस्लामी कैलेंडर • मेवात (नूंह), पलवल, गुरुग्राम।
हरियाणा के प्रमुख त्योहार — महीनेवार कैलेंडर
HSSC/HPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार।
तीज हरियाणा का सबसे प्रसिद्ध महिला लोक पर्व है। यह श्रावण मास में मनाया जाता है।
| समय | श्रावण मास (जुलाई–अगस्त) |
| समर्पित | माता पार्वती एवं भगवान शिव |
| मुख्य उत्सव | झूले, मेहंदी, लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक वस्त्र |
| मुख्य क्षेत्र | पूरे हरियाणा में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। |
बैसाखी हरियाणा का प्रमुख कृषि पर्व है।
| तारीख | 13 या 14 अप्रैल |
| मुख्य महत्व | रबी फसल की कटाई |
| मुख्य स्थान | करनाल, पिंजौर, अंबाला, कुरुक्षेत्र |
गुग्गा नवमी हरियाणा का अत्यंत प्रसिद्ध लोक पर्व है।
| समय | भाद्रपद (अगस्त–सितंबर) |
| समर्पित | गुग्गा पीर (गोगाजी) |
| मान्यता | सर्पदंश से रक्षा |
| मुख्य क्षेत्र | पूरे हरियाणा में |
• गुग्गा नवमी पूरे हरियाणा में मनाई जाती है।
• हल्दी से गुग्गा पीर की आकृति बनाई जाती है।
यह हरियाणा का सबसे प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव है।
| स्थान | सूरजकुंड, फरीदाबाद |
| समय | प्रत्येक वर्ष फरवरी |
| प्रारंभ | 1987 |
| आयोजन | सूरजकुंड मेला प्राधिकरण एवं हरियाणा पर्यटन |
| विशेषता | विश्व का सबसे बड़ा हस्तशिल्प मेला। |
⭐ फरवरी में आयोजित।
⭐ फरीदाबाद जिले में।
⭐ हर वर्ष एक Theme State चुना जाता है।
⭐ 2026 में 39वाँ आयोजन हुआ।
हरियाणा का सबसे बड़ा धार्मिक-सांस्कृतिक महोत्सव।
| स्थान | कुरुक्षेत्र |
| समय | मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) |
| समर्पित | भगवद्गीता |
| मुख्य स्थल | ज्योतिसर, ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर |
इसका आयोजन Kurukshetra Development Board, Haryana Tourism एवं जिला प्रशासन मिलकर करते हैं।
⭐ गीता उपदेश का स्थल — ज्योतिसर।
⭐ गीता महोत्सव — कुरुक्षेत्र।
| स्थान | यादविंद्र गार्डन, पिंजौर (पंचकूला) |
| समय | जुलाई |
| आयोजन | हरियाणा पर्यटन विभाग |
⭐ पिंजौर = आम मेला।
| समय | होली के बाद (चैत्र कृष्ण अष्टमी) |
| समर्पित | शीतला माता |
| विशेषता | बासी भोजन (बसोड़ा) का प्रसाद। |
बसोड़ा = शीतला माता पूजा।
| समय | माघ मास |
| समर्पित | माता सरस्वती |
| विशेषता | पीले वस्त्र, सरस्वती पूजा, पतंगबाजी। |
• शिक्षा एवं ज्ञान का पर्व।
• सरसों के पीले खेतों से जुड़ा।
हरियाणा में होली को दुलांडी भी कहा जाता है।
• हरियाणा में होली की स्थानीय शैली — दुलांडी।
• कई क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा पुरुषों पर कपड़े की रस्सी (कोड़ा) से प्रतीकात्मक प्रहार की परंपरा मिलती है।
| समय | चैत्र |
| समर्पित | माता गौरी |
| मुख्य क्षेत्र | दक्षिण हरियाणा (महेंद्रगढ़, रेवाड़ी आदि) |
• महिलाओं का सौभाग्य पर्व।
• लोकगीत एवं शोभायात्राएँ।
| समय | कार्तिक कृष्ण चतुर्थी |
| समर्पित | पति की दीर्घायु |
| मुख्य परंपरा | निर्जला व्रत, चाँद देखकर पूजा। |
| समय | भाद्रपद |
| मुख्य क्षेत्र | कुरुक्षेत्र, पेहोवा, ज्योतिसर |
| विशेषता | कृष्ण जन्मोत्सव, झाँकियाँ। |
| लोहड़ी | अलाव, तिल, गुड़, मूंगफली। |
| मकर संक्रांति | दान-पुण्य, स्नान, तिल-गुड़। |
लोहड़ी विशेषकर उत्तर हरियाणा एवं पंजाब सीमा क्षेत्रों में अधिक लोकप्रिय है।
दीपावली राज्यव्यापी प्रमुख पर्व है।
| उत्सव | स्थान | समय |
|---|---|---|
| ⭐ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला | फरीदाबाद | फरवरी |
| ⭐ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव | कुरुक्षेत्र | नवंबर–दिसंबर |
| बैसाखी उत्सव | पिंजौर, करनाल | अप्रैल |
| आम मेला | पिंजौर | जुलाई |
| तीज उत्सव | राज्यभर | सावन |
| पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल | पंचकूला | दिसंबर |
| हरियाणवी संस्कृति उत्सव | करनाल | दिसंबर |
| दीपावली उत्सव | सूरजकुंड | अक्टूबर |
| जिला | प्रमुख त्योहार / उत्सव |
|---|---|
| कुरुक्षेत्र | अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, जन्माष्टमी, कार्तिक स्नान |
| फरीदाबाद | सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, दीपावली उत्सव |
| पंचकूला | आम मेला, पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल, बैसाखी उत्सव |
| करनाल | बैसाखी उत्सव, हरियाणवी संस्कृति उत्सव |
| नूंह (मेवात) | ईद, मुहर्रम |
| रेवाड़ी / महेंद्रगढ़ | गंगौर, तीज |
| हिसार | गुग्गा नवमी, तीज |
| कैथल | महाशिवरात्रि |
| यमुनानगर | बसंत पंचमी, शिवरात्रि |
| ❌ भ्रम | ✅ सही तथ्य | 🧠 Trick |
|---|---|---|
| सूरजकुंड मेला कुरुक्षेत्र में होता है। | फरीदाबाद में होता है। | SUN = Surajkund = Faridabad |
| गीता महोत्सव फरीदाबाद में होता है। | कुरुक्षेत्र में होता है। | GITA = Kurukshetra |
| आम मेला करनाल में होता है। | पिंजौर (पंचकूला) में। | Mango = Pinjore Garden |
| तीज पुरुषों का पर्व है। | महिलाओं का प्रमुख लोक पर्व। | Teej = Swing + Women |
| बसोड़ा दीपावली के बाद होता है। | होली के बाद। | Holi → Basoda |
| गुग्गा नवमी कृष्ण जन्म से जुड़ी है। | गुग्गा पीर से जुड़ी है। | Gugga = Snake Folk Festival |
| बैसाखी खरीफ फसल का पर्व है। | रबी फसल का पर्व। | Baisakhi = Wheat Harvest |
Q1. सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला कहाँ आयोजित होता है?
Q2. अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव किस जिले में आयोजित होता है?
Q3. तीज किस महीने का प्रमुख लोक पर्व है?
Q4. आम मेला कहाँ आयोजित होता है?
Q5. गुग्गा नवमी किससे संबंधित है?
Q6. बसोड़ा किस देवी से संबंधित है?
Q7. बैसाखी किस प्रकार का पर्व है?
Q8. हरियाणा पर्यटन दिवस कब मनाया जाता है?
Q9. होली को हरियाणा में किस नाम से भी जाना जाता है?
Q10. बसंत पंचमी किस देवी का पर्व है?
Q11. निम्न कथनों पर विचार करें:
1. सूरजकुंड मेला फरवरी में होता है।
2. इसका आयोजन फरीदाबाद में होता है।
3. यह हस्तशिल्प मेला है।
Q12. गीता महोत्सव में निम्न में से कौन-सा स्थल प्रमुख है?
Q13. बसोड़ा पर कौन-सी परंपरा है?
Q14. गंगौर किस देवी से संबंधित है?
Q15. गुग्गा नवमी किस महीने में आती है?
Q16. तीज पर कौन-सी गतिविधि प्रमुख नहीं है?
Q17. बैसाखी का संबंध किस फसल से है?
Q18. आम मेला किस पर्यटन स्थल पर लगता है?
Q19. हरियाणवी संस्कृति उत्सव कहाँ आयोजित होता है?
Q20. हरियाणा का सबसे बड़ा धार्मिक महोत्सव कौन-सा है?
| त्योहार | स्थान |
|---|---|
| सूरजकुंड मेला | फरीदाबाद |
| गीता महोत्सव | कुरुक्षेत्र |
| आम मेला | पिंजौर |
| हरियाणवी संस्कृति उत्सव | करनाल |
| गुग्गा नवमी | राज्यव्यापी लोक पर्व |
HSSC / HPSC Last Minute — 10 सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
🎯 यह सूची HSSC CET, Haryana Police, Group C/D और HPSC परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले त्योहार-आधारित तथ्यों पर केंद्रित है।
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Notes पढ़ें →पुष्यभूति एवं वर्धन वंश के उदय और राज्य विस्तार से जुड़े तथ्य।
Notes पढ़ें →हरियाणा के इतिहास से जुड़े प्रमुख अभिलेख एवं शिलालेख।
Notes पढ़ें →हरियाणा के इतिहास के प्रमुख धार्मिक एवं साहित्यिक स्रोत।
Notes पढ़ें →सिक्कों, मोहरों एवं अन्य पुरातात्विक स्रोतों से जुड़े तथ्य।
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वैदिक काल की धार्मिक परंपराएँ एवं संबंधित तथ्य।
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