हरियाणा के प्रमुख त्यौहार (Festivals in Haryana) - GK247

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हरियाणा के प्रमुख त्यौहार – Festivals in Haryana

भारत का उत्तरी राज्य हरियाणा अपने मस्तमौला अंदाज के साथ ही त्यौहार मनाता है। अनादि काल से यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उद्गम स्थल रहा है। यहां के त्यौहार उत्साह, उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हरियाणा राज्य भारत की समृद्ध, शानदार संस्कृति को विभिन्न प्रकार के मेलों और त्यौहारों में मनाता है जो पूरे देश में यहाँ एक ही धूमधाम और खुशी के साथ मनाए जाते हैं।

हरियाणा के विभिन्न त्यौहार निम्नलिखित हैं

तीज का त्यौहार

श्रावण मास के शुक्लपक्ष की तृतीया (तीज) को हरियाणा में झूळों (पींघ) का त्यौहार मनाया जाता है जिसे ‘तीज’ के नाम से जाना जाता है। वैसे ‘तीज’ एक लाल रंग का प्यारा सा कीट होता है जो मिट्टी में रहता है और बरसात के दिनों में तीज त्यौहार के समय ही दिखाई पड़ता है। इस दिन सभी लड़कियां वे अपने हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलती हैं। पींघ-पाटड़ी, बहन की कोथली के लिए बनाये जाने वाले पकवान जैसे कि – गुलगुले, सुह्वाली, नमकीन, भुजिया, बतासे-मखाणे, शक्कर-पारे इत्यादि  और कुछ लोकगीत जैसे कि – पींघ ऊँची चढ़ा के सासू का नाक तोड़ना, बागों में झूले-झूलना इत्यादि तथा  नीम पे निम्बोली लगना, वातावरण में सावन के लोकगीतों की स्वर-लहरियां  इस त्यौहार की पहचान और इस उत्सव को मनाने के भिन्न-भिन्न रस्म और रिवाज हैं।

इस त्यौहार से बहुत से त्यौहारों की शुरुआत होती है जो कि देवोत्थान एकादशी (“देवठणी ग्यास) तक चलते हैं। इसीलिए कहावत बनी है –

  • आई तीज बिखेर-गी बीज: तीज को गाँव में एक साल में आने वाले सब त्योहारों की शुरुवात माना जाता है, इसी के सन्दर्भ में “आई तीज बिखेर-गी  बीज” की कहावत कही जाती है, जिसका मतलब है कि तीज आ गई है, अब इसके साथ ही साल के त्योहारों की शुरुवात हो गई है, अब एक के बाद एक त्यौहार लगातार आयेंगे और मनाये जायेंगे।
  • आई होऴी भर ले-गी झोऴी:  होली के त्यौहार के बाद तीज तक कोई भी देशी और बड़ा त्यौहार नहीं आता इसलिए ऐसा कहा जाता है कि जो बीज त्योहारों के “तीज” बिखेर के गयी थी, “होली” उनकी झोली भर के ले गयी है।

रक्षा-बंधन

यह त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो पूरे भारतवर्ष में भाई-बहन के अटूट प्यार का प्रतीक है, जब बहनें भाइयों की कलाइयों पर राखी (पोह्ची) बांधती हैं और भाई बहन की हर संकट में मदद करने का प्रण लेते हैं। इसमें भाई को टीका लगाना, फिर राखी बांधना और मिठाई खिलाना और फिर भाई का बहन को शगुन देना जिसके साथ उसके दुःख-सुख में हर पल उसके साथ खड़े रहने का वचन दोहराया जाता है। इस त्यौहार की महता इस बात से और भी बढ़ जाती है कि इस दिन सार्वजनिक वाहनों खासकर हरियाणा सरकार की बसों में बहनों के लिए यात्रा नि:शुल्क होती है।

गूगा नवमी

यह त्यौहार रक्षा-बंधन के ठीक नौ दिन बाद बध्विन माह की कृष्ण पक्ष की नवमी को आता है| इस दिन बहनों के द्वारा भाइयों के हाथों पे रक्षा-बंधन के दिन बाँधी गई राखियों को उतार के गूगा जी को सौंपने का दिन होता है। गाँव की गली-गली में गूगा जी के प्रवर्तक डेरू और मोर-पंख वाली नीली पताका ले, गीत गाते हुए आपकी राखी पताका पे बंधवाने आते हैं। गूगा नवमी एक आध्यात्मिक त्योहार है, जिसमें सांप-पूजा होती है। लोग गूग्गा-पीर या ज़हीर-पीर की पूजा करते हैं जो खतरनाक सांप के द्वारा काटे हुए लोगों को ठीक करने की शक्ति के लिए प्रतिष्ठित किया गया था।

दशहरा

यह त्यौहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं को आता है। दशहरा भगवान राम जी की रावण पर विजय की याद में मनाया जाता है। इस त्यौहार के स्थानीय आकर्षण होते हैं:

  • लड़कियों द्वारा सांझी-रंगोली बनाना, सांझी भिन्न प्रकार की होती हैं जैसे: गोबर – गारा – मडकन – कपास की सांझी, मोज़े-सितारे और रंगों की सांझी। सांझी बनाने की तैयारियां दस-दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं।फिर दशहरे वाली रात सांझी को लडकियां इक्कट्ठी हो जोहड़ों में बहाने जाती हैं।
  • लड़के गाँव के जोहड़-कल्लर-गौरों पे खुलिया लाठियों के साथ चाँद की चांदनी रातों में गींड खेलते हैं। हालाँकि आज बदलते परिवेश में ये चीजें कम जरूर हो गई हैं परन्तु आज से पांच-सात साल पहले तक भी इन चीजों को ले के युवक-युवतियों का उत्साह देखते ही बना करता था। पुराने दौर में दशहरे की रात गाँव के घरों में जितने भी पुराने मटके होते थे उनको उठा कर गली में पटका जाता था और फोड़ा जाता था ताकि पीने के पानी के पुराने बर्तनों की जगह नए बर्तन ले सकें  और युवकों में इस बात की होड़ लगती थी कि किसने सबसे ज्यादा मटके फोड़े।

कार्तिक स्नान

कार्तिक माह के प्रथम पक्ष की रातों को गाँव की बहु-बेटियां कुँए-तालाबों पर स्नान टोलियाँ बना कार्तिक स्नान के गीत गाती हुई स्नान करने जाया करती थी। इस स्नान के इतने इंतजाम होते थे कि हर कुँए-जोहड़ पर बुर्जियां ओर बुर्ज बनाए गए थे, जोहड़ों में सीढियां उतारी गई होती थी ताकि हमारी बहु-बेटियों के स्नान को सुविधा हो सके।

इस वक्त की ख़ास बात यह होती थी कि जिस पहर में बहुत-बेटियां स्नान करने जाती थी, गाँव का हर युवक-बुजुर्ग उस पहर के दौरान कुँए-तालाबों के पास से भी नहीं गुजरता था। आज के दिन वैसे तो वो वाले कुँए-तालाब ही नहीं रहे और जहां रहे वहाँ भाईचारा नहीं रहा और बदलते परिवेश ऩे सब-कुछ लील लिया है, वरना आज से दस साल पहले तक कार्तिक की रातों में गाँव के चारों ओर के कुँए-जोहड़ों से लोकगीतों की स्वर-लहियाँ छाल मारा करती थी। इस मधुरिमा भरे वातावरण और सोहार्द का सबसे बड़ा मूल होता था गाँव के “गाम और गोत” का नियम। जैसा कि गाम और गोत के नियम के अनुसार गाँव की छत्तीस बिरादरी की बेटी आपकी बहन बताई गई और मानी गई है, तो कोई चाहकर भी उधर जाना चाहता था तो इस शर्म में अपने-आप कदम रोक लिया करता था कि नहीं उधर तो मेरी बहनें होंगी, मैं उधर कैसे जा सकता हूँ।

दीवाली (दीपावली)

यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। विश्व प्रसिद्ध इस त्यौहार को हरियाणा में पूरे धूम-धाम से मनाया जाता है। “छोटी दिवाली” सबसे पहले आती है और धार्मिक संस्कार और परंपराओं को पूरी ईमानदारी और भक्ति के साथ मनाया जाता है। हरियाणवी दिवाली के ख़ास आकर्षण इस प्रकार हैं:

  • साल भर से खेतों से इक्कट्ठी की हुई गीदड़ की पीढ़ी (कुर्सी) को मिटटी का तेल दाल जलाया जाता है, घर में मिटटी के नए बर्तन खरीदे जाते हैं, जिनमें मटका, काप्पन, दिए, चुग्गे प्रमुख होते हैं। मटका-काप्पन पीने के पानी के लिए होते हैं और दिए-चुग्गे, घी-तेल के दिए जला घर की मुंडेरों पे लगाए जाते हैं।
  • सार्वजनिक जगहों पर दिए जलना: गाँव के हर घर का फर्ज होता है कि वो कम से कम एक दिया गाँव की चौपाल (परस) और चौराहों पे जरूर जला के आता है।
  • घर में दिए जलाने का नियम: घर की पानी निकासी की नाली यानि मोरी के द्वार पर एक दिया और घर की धन की तिजोरी पर एक घी के दिए जोत जरूर जलाई जाती है।
  • पशुओं के लिए ख़ास: दिवाली के दिन से एक दिन पहले यानी आधी-दिवाली जिसको गाँव में गिर्डी कहते हैं को दिन में घर के सारे पशुओं को जोहड़ों में नहला के लाया जाता है। फिर उनके सींगों और खुर्रों पर तेल लगाया जाता है। फिर उनके लिए साल भर से खेतों से इक्कट्ठे किये हुए मोर-पंखों और रस्सी की बनी गांडली पहनाई जाती है| और फिर अगले दिन पूरे गाँव वालों की नजर इस बात पे होती है कि किसके जानवर सबसे ज्यादा सुन्दर लग रहे हैं। हालाँकि कि बदलते परिवेश में इसको ले लोगों में उत्साह भी घटता जा रहा है और लोग मोर-पंख की अपने हाथों से बने हुई गंडलियों की जगह आजकल बाजारू मालाएं ला के पहना देते हैं।
  • पटाखे-चलाना: छोटे बच्चे इस दिन रात को पटाखे चलाते हैं और फुलझड़ी फोड़ते हैं।
  • हीडों हाथों में ले गाँव की फेरी निकालना: एक प्रकार की जड़ जिसमे जिसे “हिड़ो” कहतें हैं। हालांकि पहले इसमें अधिक लोग भाग लेते थे लेकिन आज कल भी मेरे जैसे बचे हैं जिनमें हीड़ो का नाम सुनते की रोम-रोम मचल उठता है और सहसा मुंह से फूट पड़ता है “हीड़ो रै हीड़ो, आज गिर्डी तड़कै दिवाली हीड़ो रै हीड़ो….” यह स्वर-भेरी होती थी जिससे गाँव की गलियाँ गूँज उठती थी। पता नहीं लोग क्यों आज के जमाने को ज्यादा शालीन और सभ्य बताने पे तुले रहते हैं, जहां की तीज-त्योहारों को सामूहिक रूप के मनाने के नाम पर सबकी नानी सी मरी दिखती है।
  • खील-बताशे-हलवा-खीर खाना: अब जब इतनी साड़ी चीजें जिस त्यौहार पे होती हों तो भला फिर खाने-पीने की बात पीछे क्यों रहे| हर तरह के पकवानों की खुसबू हर घर से निकलती है फर्क सिर्फ इतना है की आज के जमाने में हर कोई अपने घर में घुसा खाता है पहले लोग झोली भर के गलियों में निकल मिल कर खाते थे।

ईद

यह गाँव के मुस्लिम समुदाय का सबसे मुख्य त्यौहार है। इस दिन हर भाई एक दूसरे के गले मिलकर अल्लाह की अरदास करता है।

देव-उठनी ग्यास

यह त्यौहार मंगसर (मार्गशीर्ष) माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी  को मनाया जाता है। वो दिन जिस दिन के बाद से ब्याह-शादियों का शीतकालीन स्तर शुरू हो जाता है। इस अवसर के एक मुख्य लोकगीत का मुखड़ा: “ओळएं-कोळएं धरें जंजीर, जियो दुल्हन तेरे बीर बीर”। इस दिन गुड़ या चीनी के मीठे चावल बनाए जाते हैं और शादी वाले घर में शादी के दिन से पहले भी मीठे-चावल बनते हैं, जिनको खुद भी खाया जाता है और बांटा भी जाता है। इन चावलों को बरात के नाम के चावल कहा जाता है।

लोहड़ी का त्यौहार

लोहड़ी, मकर संक्रांति से एक दिन  पहले हरियाणा राज्य में मनाई जाती है। पंजाबियों के समुदाय के लिए, लोहड़ी का त्यौहार एक बहुत ही खास त्यौहार है। सभी स्थानीय लोग अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं और मिठाई, फूला हुआ चावल और पॉपकॉर्न को आग की लपटों में फेंक देते हैं। वे गाने गाकर और अभिवादन का आदान-प्रदान करके खुद को महफिल में शामिल करते हैं। नवविवाहित दुल्हन और नवजात बच्चे की पहली लोहड़ी बेहद महत्वपूर्ण है।

मकर- सक्रांति (सकरात)

  • बड़े बुजुर्गों की मान-मनुहार के इस त्यौहार को – पौह महीने (पौष मास) में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है। इस त्यौहार के ख़ास आकर्षण:
  • सुबह उठते ही हर किसी को स्नान करना होता है।
  • घर के आगे आग सुल्गानी होती है जिसपे कि गली में आते-जाते लोग ठंड में कंपकपाते अपने हाथ-पैर शेंक सकें।
  • अपने सामर्थ्य अनुसार दान-पुन करना होता है, जिसमें की गाँव की डूमनी को सूट और शगुन देना प्रमुख होता है।
  • नई-नवेली दुल्हनें घर और आस-पड़ोस के बुजुर्गों (बूढ़े-बूढ़ियाँ दोनों) को शाल-कम्बल-चद्दर भेंट करती हैं और बदले में सीघ्र ही संतानवती होने का वर और शगुन पाती हैं।
  • पुराने जमाने में जब चरखे होते थे तो औरतें इक्कट्ठी हो चरखे काता करती थी और बच्चे आसपास खेला करते थे और सब रेवड़ी-मूंगफली खाया करते थे, पर अब तो वो नज़ारे सिर्फ ख्यालों के हो के रह गए हैं| पता नहीं लोग नए जमाने के नाम पे पुराने जमाने का इतना खुलापन और सोहार्द भी कैसे दांव पे लगाते जा रहे हैं कि किसी के पास अपने गाँव-ननिहाल जा इन खुशियों को मनाने तक की न तो फुर्सत और न ही उत्साह।
  • नई ब्याही लड़कियों की ससुराल भाइयों का सीधा ले के जाना।
  • इस दिन कई जगहों पर बच्चे पतंग उड़ाते हैं और पतंगबाजी की प्रतिस्पर्धा करते हैं।

बैसाखी का त्यौहार

बैसाखी का त्यौहार हरियाणा राज्य में पंजाबियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिसे  बसंत ऋतू के आने, पेड़-पौधों और फसलों में नए अंकुर फूटने की ख़ुशी में हर्षित संगीत और नृत्य के साथ मनाया जाता है। यह हर साल 13 अप्रैल को पड़ता है और 36 साल में एक बार 14 अप्रैल को पड़ता है। इससे जुड़े कुछ बिंदु निम्नलिखित हैं:-

  • इस विशेष दिन को सिखों के दसवें गुरु (गुरु गोबिंद सिंह) ने वर्ष 1699 में खालसा धर्म की स्थापना की थी। इस दिन सिख गुरुद्वारों में जाते हैं और कीर्तन सुनते हैं। धार्मिक संस्कारों और परंपराओं के खत्म हो जाने के बाद, मीठा सूजी आम जनता को परोसा जाता है।
  • इस त्योहार को मकई की कटाई शुरू करने से पहले आराम करने के अंतिम अवसर के रूप में भी चिह्नित किया जाता है।
  • इसी दिन दीन-बंधू सर छोटूराम की जयंती भी मनाई जाती है।

होली और फाग

यह त्यौहार फागुन माह की पूर्णिमा को हरियाणा में सबसे बड़े त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है। लोगों में इस त्यौहार का जोश एक सप्ताह पहले से ही चढ़ना शुरू हो जाता है। रंग, कोरडे और पानी के इस त्यौहार के ख़ास आकर्षण इस प्रकार है:

  • होली वाले दिन, रात में होलिका-दहन का कार्यक्रम होता है, जिसमे स्त्रियाँ होली की आग में से नारियल (गोला) को घूमाकर प्रार्थना करती है और अपनी इच्छानुसार फल-कामना करती है| होलिका दहन के दौरान, प्रहलाद को बचाने का कार्य देखने लायक होता है।
  • रंगों के इस त्यौहार को हरियाणा राज्य में ‘दुल्हंदी- होली’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • फाग वाले दिन गाँव के युवकों का टोली बनाकर , ढोल लेकर पूरे गाँव की फेरी लगा के आना और पूरे गाँव की भाभियों को चुनौती देते चलना और भाभियों की ये जिद्द की मेरे आगे देखूं कौन ठहर सकता है का जोश और उमंग से लबालब वातावरण, ये सब अद्भुत दृश्य होता है हरियाणा में होली का।
  • हरियाणा में इस त्यौहार को एक-दुसरे को रंग लगाकर और पानी डालकर इस त्यौहार को बहुत हंसी खुशी और अहल्डपन के साथ मनाया जाता है।
  • हरियाणा में कई जगहों पर होली के एक सप्ताह पहले से कुश्ती दंगल शुरु हो जाते हैं।

मेख (बैसाखी का हरियाणवी रूप)

मेख का दिन गेहूं की पक चुकी फसल की कटाई करने का सबसे सटीक दिन माना गया है।

सीली-सात्तम

यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। सीली-सात्तम को माना जाता है कि होली-फाग से पहले से भी चला देवर-भाभी का कोरडे का खेल इस विराम ले लेता है यानी होली-फाग के भी सात दिन बाद। और इसी के साथ वो कहावत लागू हो जाती है कि “आई होली भर ले गई झोली”। इसके बाद अगला बड़ा त्यौहार आती है – तीज, जो त्योहारों के मौसम का नया बीज बो के जाती है और फिर यह सिलसिला साल-दर-साल यूँ ही चलता जाता है।

अन्य कुछ प्रमुख त्यौहार जो हरियाणा में मनाये जाते हैं

गंगोर का त्यौहार

गंगोर का त्यौहार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तीज (मार्च/अप्रैल) को आता है। हरियाणा में यह राजस्थान राज्य से लगते कुछ जिलो में मनाया जाता है| गंगोर और ईशर की विशाल मूर्तियों को एक जुलूस में निकाला जाता है और भक्ति की धुनें प्रभु की स्तुति में तब तक गाई जाती हैं, जब तक वे पानी में डूब नहीं जाते। यह मुख्य रूप से एक वसंत त्योहार के रूप में माना जाता है और बहुतायत की देवी गौरी के सम्मान में मनाया जाता है। घर की अविवाहित महिला सदस्य अपनी पसंद के पति या पत्नी के लिए पूजा करती हैं जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। पूर्ववर्ती पखवाड़े में देवी की पूजा की जाती है।

सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेला

सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेले को रंगों की बौछार के साथ फरीदाबाद के सूरजकुंड में मनाया जाता है। इस मेले में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की अनूठी विविधता शामिल है, जो भारत की ग्रामीण विशेषता को प्रदर्शित करने के लिए बनाई गई है।

  • यह अंतर्राष्ट्रीय मेला शिल्प मेला को प्रदर्शित करता है जो भारत के हस्तशिल्प के साथ-साथ कुछ सबसे अच्छे हथकरघा को दर्शाता करता है। इसके अलावा, एक हस्तनिर्मित कपड़े का निरीक्षण कर सकता है जो भव्य रंगों में डूबा हुआ है; यहां तक ​​कि कुछ प्रकार की दिलचस्प लकड़ी और मिट्टी की गुड़िया भी इस मेले में पाई जाती हैं।
  • यदि आप सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेले में भाग लेते हैं, तो आपको बहु-व्यंजन खाद्य न्यायालय भी मिलेंगे, जहाँ दुनिया भर के लोकप्रिय व्यंजन प्रदर्शित किए जाते हैं। आकर्षक लोक प्रदर्शन भी हैं जो इस मनमोहक बेला की शाम को मंत्रमुग्ध करते हैं। यहाँ तक कि मनोरंजन, एडवेंचर राइड्स इत्यादि के लिए भी प्रतिनिधि स्थान होते हैं।

गीता महोत्सव (कुरुक्षेत्र)

कुरुक्षेत्र में उत्सव गीता जयंती के साथ होता है, जो श्रीमद भगवद गीता के जन्म का प्रतिनिधित्व करता है। भागवत गीता में मौलिक सत्य शामिल हैं और जीवन का तरीका घोषित करता है।

पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल

पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल हर साल दिसंबर के महीने में ‘पिंजौर गार्डन’ में आयोजित किया जाता है और यह त्योहार अपनी ऐतिहासिक परंपरा के साथ हरियाणा की समृद्ध संस्कृति का समर्थन करने के लिए आयोजित किया जाता है।

मैंगो फेस्टिवल (पिंजौर)

हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल जून या जुलाई के महीनों में होता है। ग्रीष्मकाल में स्वादिष्ट आमों पर एक अच्छी दावत, हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल इसका प्रमाण है। यह पिंजौर के यादविंद्रा गार्डन में होता है। यह स्थान चंडीगढ़ से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है। हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल के पीछे मुख्य विचार आम की जबरदस्त लोकप्रियता को बढ़ाना और उजागर करना है।हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल से जुडी कुछ बातें:-

  • हरियाणा में मैंगो फेस्टिवल के दौरान, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों से आम की कई अलग-अलग किस्मों के साथ देश भर के आम उत्पादकों के बीच एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। मैंगो फेस्टिवल में आने वाले पर्यटकों को हरियाणा में इस त्योहार के दौरान इन गर्मियों के फलों की सभी विभिन्न और पारंपरिक किस्मों का स्वाद चखने का मौका मिलता है। आमों के साथ, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के नवीनतम संकर फल भी प्रस्तुत होते हैं|
  • कृषि उद्योग की विभिन्न कंपनियाँ और खाद्य उद्योग की कंपनियाँ जो मैंगो फेस्टिवल में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं। इन उत्पादों में विभिन्न प्रकार के जाम, अचार और डिब्बाबंद फल शामिल हैं। आमों के संरक्षित फल, भोजन और अन्य उत्पादों के बीच भी प्रतियोगिताएं होती हैं। कुल मिलाकर मैंगो फेस्टिवल हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक असाधारणता को भी दर्शाता है।

महाभारत महोत्सव

महाभारत महोत्सव प्रत्येक वर्ष हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित किया जाता है। यह कई समारोहों और समारोहों के साथ मनाया जाता है और हरियाणा त्योहारों में से एक है।

निर्जला एकादशी महोत्सव

यह त्यौहार हरियाणा राज्य में महिलाओं के जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जैश के महीने या मई/जून के महीने में मनाया जाता है। महिला लोग अपने परिवार के कल्याण के लिए कुछ धार्मिक संस्कार और अनुष्ठान करते हैं। वे पूरे व्रत रखते हैं और पानी से भी बचे रहते हैं।

नवरात्र महोत्सव

नवरात्रि या नवरात्र एक हिंदू भक्ति और नृत्य का त्योहार है। नवरात्रि शब्द का अर्थ है संस्कृत में नौ रातें। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर, सभी आठ दिनों और नौ रातों में सारद मासी अस्विन की अवधि में मनाया जाता है, इसका महत्व है और उच्चतम देवी या देवी के तीन अलग-अलग पहलुओं की पूजा करने के लिए तीन दिनों के सेट में विभाजित है।

राष्ट्रीय त्यौहार

इन त्योहारों के अलावा गाँव में सारे राष्ट्रीय सरकारी त्यौहार जैसे की स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, गाँधी और शास्त्री जयंती भी मनाई जाती हैं।

राजकीय त्यौहार

हरियाणा राज्य सरकार के त्यौहार जैसे कि हरियाणा शहीदी दिवस, हरियाणा जयंती भी बड़े चाव से गाँव में मनाये जाते हैं।

शहीदी दिवस

आजादी की लड़ाई में शहीद हुए शहीदों की जयन्तियां जिनमें मुख्यत: नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जयंती, शहीद भगत सिंह जयंती, शहीद उधम सिंह जयंती, चौधरी छोटू राम जयंती मनाई जाती हैं।

पौराणिक व धार्मिक जयंतियां

वैदिक देवी-देवताओं में मुख्यत: हनुमान जयंती, राम-नवमी, जन्माष्टमी (भगवान कृष्ण का जन्मदिन- बध्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी), परशुराम जयंती, रविदास जयंती, कबीरदास जयंती, बाल्मीकि जयंती, शिवरात्रि बड़ी उमंग से मनाई जाती हैं।

गाँव के मेले और धार्मिक आयोजन

गाँव के लोग निम्नलिखित भिन्न-भिन्न मेलों में गाँव के अंदर-बाहर आयोजन पर बड़े उमंग-उत्साह से भाग लेते हैं। तीज के झूलों में सावन के गीतों के मेले, कार्तिक स्नान के बेलाएं, होली-फाग के दिन होली मेला व पूजन, गूगा नवमी का मेला, दशहरे की रामलीला, चाँद की चांदनी में गींड खेलना और सांझी का जोहड़ में तैरा के आना, भिन्न-भिन्न अखाड़े-दंगलों के आयोजन, गाँव दर गाँव स्थानीय देवी-देवताओं की मान्यताये और उन पर लगने वाले मेले, गाँव की देवी का मेला – सीली सात्तम, सूर्य-ग्रहण मेला इतियादी प्रमुख हैं।

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हरियाणा GK — Topic Wise Notes

हरियाणा सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण विषयों के हिंदी एवं English Notes — Haryana Competitive Exams की तैयारी के लिए।

01

हरियाणा की बोली/भाषा, साहित्य एवं संस्कृति

Language, Literature & Culture of Haryana

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02

हरियाणा लोक वाद्य-यंत्र

Folk Musical Instruments of Haryana

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03

हरियाणा में पहने जाने वाली प्रमुख वेशभूषा

Major Costumes Worn in Haryana

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04

हरियाणा में पहने जाने वाले प्रमुख आभूषण

Major Ornaments Worn in Haryana

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05

हरियाणा के प्रमुख लोक नृत्य

Major Folk Dances of Haryana

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06

हरियाणा के प्रमुख लोकगीत

Major Folk Songs of Haryana

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07

हरियाणा के प्रमुख त्यौहार

Major Festivals of Haryana

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08

हरियाणा का मुख्य खान-पान

Main Food of Haryana

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09

हरियाणा में प्रमुख उपवास / व्रत

Major Fasts & Vratas in Haryana

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10

हरियाणा के प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल

Major Temples & Religious Places of Haryana

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11

हरियाणा के राज्य प्रतीक

State Symbols of Haryana

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12

हरियाणा के पुरस्कार और सम्मान राशियाँ

Awards, Honours & Prize Amounts of Haryana

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13

स्वतंत्र हरियाणा की मांग और हरियाणा उदय

Demand for Independent Haryana & Haryana Uday

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14

हरियाणा का प्रशासनिक ढांचा

Administrative Structure of Haryana

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15

हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यकाल के अनुसार

Chief Ministers of Haryana — Tenure Wise

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16

हरियाणा के प्रमुख आयोग और वैधानिक निकाय

Major Commissions & Statutory Bodies of Haryana

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17

हरियाणा की भौगोलिक एवं प्राकृतिक स्थिति

Geographical & Natural Conditions of Haryana

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18

हरियाणा के सीमावर्ती राज्य और केंद्रशासित प्रदेश

Bordering States & Union Territories of Haryana

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19

हरियाणा में कछार का मैदान

Alluvial Plains of Haryana

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20

हरियाणा की प्रमुख नदियाँ और उनका प्रवाह तंत्र

Major Rivers & Flow System of Haryana

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21

हरियाणा की जलवायु और वर्षा

Climate & Rainfall of Haryana

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22

हरियाणा की मिट्टी और उसके प्रकार

Soil of Haryana & Its Types

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23

हरियाणा राज्य के वन्यजीव क्षेत्र

Wildlife Areas of Haryana

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24

हरियाणा सड़क परिवहन तंत्र

Road Transport System of Haryana

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25

हरियाणा वायु परिवहन तंत्र

Air Transport System of Haryana

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26

हरियाणा रेल परिवहन तंत्र

Rail Transport System of Haryana

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27

हरियाणा बजट 2023-2024

Haryana Budget 2023-2024

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28

हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023

Haryana Economic Survey Report 2023

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29

हरियाणा — एक परिचय

Haryana — An Introduction

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30

हरियाणा का क्षेत्रफल

Area of Haryana

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31

हरियाणा के इतिहास से जुड़ी महत्त्वपूर्ण तिथियाँ

Important Dates Related to Haryana History

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32

पाषाण-काल और हड़प्पा सभ्यता काल में हरियाणा का इतिहास

Haryana History — Stone Age & Harappan Civilization

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33

वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य

Religious Scenario of Haryana in the Vedic Period

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34

महाजनपद काल में हरियाणा और बौद्ध-जैन साहित्य

Haryana & Buddhist-Jain Literature — Mahajanapada Period

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35

मौर्योत्तरकालीन और गुप्तकालीन हरियाणा

Haryana During the Post-Mauryan & Gupta Periods

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36

हरियाणा में गाँधी जी का प्रभाव और कार्य

Gandhi Ji's Influence & Work in Haryana

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37

हरियाणा में राष्ट्रीय आंदोलनों का प्रभाव

Impact of National Movements in Haryana

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38

हरियाणा में कुणिन्द गणराज्य

Kuninda Republic in Haryana

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39

हरियाणा में यौधेय साम्राज्य

Yaudheya Kingdom in Haryana

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40

अग्र गणराज्य और हरियाणा में अग्रों के साक्ष्य

Agra Republic & Evidence of Agra in Haryana

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41

पुष्यभूतियों (वर्धन वंश) का उदय और राज्य विस्तार

Rise of Pushyabhutis (Vardhana Dynasty) & Kingdom Expansion

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42

हरियाणा के इतिहास के प्रमुख अभिलेख

Important Records & Inscriptions of Haryana History

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43

हरियाणा के इतिहास से संबंधित प्रमुख धर्म-ग्रन्थ और साहित्य स्रोत

Major Religious Texts & Literary Sources of Haryana History

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44

हरियाणा के इतिहास से जुड़े सिक्के, मोहरें और अन्य स्रोत

Coins, Seals & Other Historical Sources of Haryana

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45

हरियाणा के ऐतिहासिक भवन, स्मारक और कला स्थापत्य

Historical Buildings, Monuments & Art Architecture of Haryana

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46

हरियाणा के इतिहास से जुड़ी प्रमुख पुस्तकें, समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ

Important Books, Newspapers & Magazines Related to Haryana History

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हरियाणा की बोली/भाषा, साहित्य एवं संस्कृति

हरियाणा लोक वाघ-यंत्र

हरियाणा में पहने जाने वाली प्रमुख वेशभूषा

हरियाणा में पहने जाने वाले प्रमुख आभूषण

हरियाणा के प्रमुख – लोक नृत्य

हरियाणा के प्रमुख – लोकगीत

हरियाणा के प्रमुख त्यौहार

हरियाणा का मुख्य – खान-पान

हरियाणा में – प्रमुख उपवास/ व्रत

हरियाणा के प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल

हरियाणा के राज्य प्रतीक

हरियाणा के पुरस्कार और सम्मान राशियाँ

स्वतंत्र हरियाणा की मांग और हरियाणा उदय

हरियाणा का प्रशासनिक ढांचा

हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यकाल के अनुसार

हरियाणा के प्रमुख आयोग और वैधानिक निकाय

हरियाणा की भौगोलिक एवं प्राकृतिक स्थिति

हरियाणा के सीमावर्ती राज्य और केंद्रशासित प्रदेश

हरियाणा में कछार का मैदान

हरियाणा की प्रमुख नदियां और उनका प्रवाह तन्त्र

हरियाणा की जलवायु और वर्षा

हरियाणा की मिट्टी और उसके प्रकार

हरियाणा राज्य के वन्यजीव क्षेत्र

हरियाणा सडक परिवहन तंत्र

हरियाणा वायु परिवहन तंत्र

हरियाणा रेल परिवहन तंत्र

हरियाणा बजट 2023-2024

हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023

हरियाणा – एक परिचय

हरियाणा का क्षेत्रफल

हरियाणा के इतिहास से जुडी महत्त्वपूर्ण तिथियाँ

पाषाण-काल और हड़प्पा सभ्यता काल में हरियाणा का इतिहास

वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य

महाजनपद काल में हरियाणा और बौद्ध-जैन साहित्य

मौर्यत्तरकालीन और गुप्तकालीन हरियाणा

हरियाणा में गाँधी जी का प्रभाव और कार्य

हरियाणा में राष्ट्रीय आंदोलनों का प्रभाव

हरियाणा में कुणिन्द गणराज्य

हरियाणा में यौधेय साम्राज्य

अग्र गणराज्य और हरियाणा में अग्रों के साक्ष्य

पुष्यभूतियों (वर्धन वंश) का उदय और राज्य विस्तार

हरियाणा के इतिहास के प्रमुख अभिलेख

हरियाणा के इतिहास से संबधित प्रमुख धर्म-ग्रन्थ और साहित्य स्त्रोत

हरियाणा के इतिहास से जुड़े – सिक्के, मोहरें और अन्य स्त्रोत

हरियाणा के ऐतिसाहिक भवन, स्मारक और कला स्थापत्य

हरियाणा के इतिहास से जुड़ी प्रमुख – पुस्तकें और प्रकाशित समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं

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