हरियाणा की बोली/भाषा, साहित्य एवं संस्कृति
Language, Literature & Culture of Haryanaहरियाणा की भाषा, बोलियों, साहित्य और संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
Notes पढ़ें →Traditional Ornaments in Haryana
महिलाओं द्वारा पारंपरिक रूप से पहने जाने वाले प्रमुख आभूषण
पुरुषों द्वारा पारंपरिक रूप से धारण किए जाने वाले प्रमुख आभूषण
Traditional Ornaments Worn by Women in Haryana
यह सिर पर पहने जाने वाला आभूषण है जो गोलाकार टिकड़ों से बना होता है। इसे सिर के पीछे बालों में दोनों ओर सोने के बारीक सांकल बाँधकर ललाट पर लटकाई जाती है।
यह चाँदी या सोने का बना आभूषण है जो सिर पर बाँधा जाता है।
यह मस्तक (माथे) का आभूषण है। यह पूरे माथे को ढकता है। इसे जूड़ा, बन्दनी, कोड़ी और विरलता भी कहते हैं। यह चाँदी की बनी होती है।
यह सोने या चाँदी से बना पतले धागे जैसा आभूषण है, जिसे माथे पर बाँधा जाता है।
यह मोटे बेर के आकार का सोने या चाँदी का आभूषण है, जो नगीने जड़कर बनाया जाता है। इसे माथे के बीच में लटकता हुआ पहना जाता है। इसके आगे के भाग में छोटे-छोटे दाने उभरे हुए होते हैं तथा पीछे वाले भाग में हुक बना होता है, जिसमें धागा बाँधकर महिलाएँ बालों के मध्य में ललाट पर लटकाते हुए बाँधती हैं।
यह सोने से बना होता है जिसे माँग के बीच में मस्तक पर लटका के पहना जाता है। यह सुहागिन स्त्रियों के माँग के स्थान पर तिल्ली के आकार का चेन से जुड़ा पहना जाने वाला गहना है। इसलिए इसे सिरमांग भी कहते हैं।
यह सोने या चाँदी से निर्मित होती है। यह केश (बालों) में लगाई जाती है। इसे अंग्रेजी के क्लिप शब्द को विकृत कर कलफ़ भी कहा जाता है।
यह सोने या चाँदी का बना होता है। इसे पूरे माथे पर लटकाया जाता है।
यह बोर के समान गोलाकार आकृति में होती है, परन्तु रखड़ी पर कीमती पत्थर के नगों की जड़ाई की जाती है। यह सिर पर माँग के ऊपर बाँधा जाता है। रखड़ी के पीछे लगाई जाने वाली सोने के छोटे हुक को सरी या बगडी कहते हैं। रखड़ी को सुहाग का प्रतीक माना जाता है।
विवाह के अवसर पर दूल्हे व दुल्हन के कान व सिर पर बाँधने का मुकुट मौड़ कहलाता है।
दो इंच परिधि का सोने की परत का बना हुआ फूल जिसमें नगीनों की जड़ाई की जाती है, टीका/तिलक कहलाता है। इसे महिलाएँ सोने की सांकली से माँग भरने की जगह पर लटकाती हैं।
यह स्त्रियों के बालों की वेणी (यानी छोटी-छोटी लटें) में गुंथा जाने वाला आभूषण है।
स्त्रियों के माथे पर पहने जाने वाला आभूषण। इस पर कई लोकगीत भी गाये जाते हैं।
शीशफूल • फूल • सिंगार-पट्टी • ताग्गा • बोरला • सिरमांग • केश-पिन • छाज • रखड़ी • मौड़ • टीका-तिलक • गोफण • मैमद
यह नाक के मध्य में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे आमतौर पर छोटी नथ भी कहते हैं।
यह सोने से निर्मित होती है। इसे पहनने के लिए नाक के बाईं ओर छेद करवाया जाता है। यह आकार में बड़ी होती है। इसे विवाहित स्त्रियों द्वारा पहना जाता है।
यह सोने, चाँदी या जड़ाऊ हीरे से बना दाने के आकार का एक आभूषण है, जिसे महिलाओं द्वारा नाक के बाईं ओर पहना जाता है।
यह सोने या चाँदी से निर्मित लौंग के आकार का लंबाई में बना गहना है, जिसे नाक और कान में पहना जाता है। इसमें ऊपर घुंडीदार नगीना लगा होता है जो आमूमन लाल या सफेद रंग का होता है।
यह लौंग से बड़ा, गोलाकार और छिद्रदार आभूषण है, जिसे नाक के बाईं ओर पहना जाता है।
नथ का छोटा रूप नथली कहलाता है।
यह सोने की तार का बना होता है जिसमें नाचता हुआ मोर बना होता है। ग्रामीण महिलाएँ इसके एक डोरा बाँधकर सिर के बालों में फँसाकर नाक में पहनती हैं।
लौंग के बड़े आकार को भँवरा कहते हैं। इसे ज्यादातर बिश्नोई महिलाएँ नाक में पहनना पसंद करती हैं।
नाथ की तरह छोटी बाली नक्सेर कहलाती है, जिसमें मोती पिरोया जाता है। कुँवारी लड़कियों में इसका ज्यादा प्रचलन है। इसे ‘नाक की बाली’ भी कहते हैं।
बेस्सर → छोटी नथ | नथ → बड़ी नाक की नथ | कोका → दाने जैसा | लौंग → लौंग के आकार का | पुरली → लौंग से बड़ी | नथली → नथ का छोटा रूप | बेसरि → मोर वाला | भँवरा → बड़ी लौंग | नक्सेर → नाक की बाली
कान एवं गले के प्रमुख आभूषण • Haryana Traditional Ornaments
यह चाँदी या सोने से निर्मित होती है। यह गोलाकार आकृति की होती है, जो किसी सिक्के के आकार की होती है। इसे आमतौर पर बुजुर्ग महिलाओं द्वारा कान में पहना जाता है।
यह चाँदी के बने होते हैं, जिसे कानों में पहना जाता है।
यह सोने या चाँदी द्वारा निर्मित आभूषण है, जो स्त्रियों द्वारा कान के निचले हिस्से में पहना जाता है। यह पुष्पकार आभूषण है, जिसके बीच में नगीने जड़े होते हैं।
यह गोल वलयकार आकार का चाँदी या सोने का आभूषण है, जिसे कान के निचले हिस्से में पहना जाता है।
यह चाँदी के होते हैं, जिसे कानों के पास लटकते हुए पहना जाता है।
यह सोने से निर्मित है जो महिलाओं के कान का एक आभूषण है, जिसे कान में लटका कर पहना जाता है। यह कर्णफूल की तरह होता है, लेकिन बीच में सोने के गोल बुँदे होते हैं और इनके चैन भी लगाई जाती हैं।
सोने या चाँदी का कर्णफूल या झुमके के आकार का बिना चैन का बना आभूषण है, जिसके नीचे छोटी-छोटी घुंघुरियाँ बनी होती हैं।
कान के ऊपरी हिस्से पर पान के पत्ते के समान सोने या चाँदी का आभूषण ‘ओगन्या’ कहलाता है।
सोने के तार के आगे मुद्रा के आकार का मोती पिरोकर कान में पहना जाने वाला आभूषण है।
यह सोने या चाँदी की तार से बना आभूषण है, जिसके ऊपर सोने या चाँदी की छोटी घुंडी लगी होती है।
कान के ऊपरी हिस्से में सोने या चाँदी का गोलाकार (अँगूठी के आकार का) छेद करके पहना जाने वाला आभूषण पीपल पत्र कहलाता है।
कान का आभूषण है जो झुमके के साथ लटका रहता है।
छोटे बच्चों को सर्वप्रथम कान छेद कर सोने या चाँदी के पतले तार पहनाये जाते हैं, उन्हें कुड़क कहते हैं। बाद में इन्हें लूँग, गड़वा या मुरकी पहनाई जाती है।
महिलाओं द्वारा कान में पहना जाने वाला मोर रूपी आभूषण ‘मोरुवर’ होता है। इसे कान से लटकाकर पहना जाता है।
बूजली • ढेडे • कर्णफूल • बाली • ड़ाडे • झुमका • झुमकी • ओगन्या • गुड़दा • काँटा • पीपलपत्र • बाजपट्टी • कुड़क • मोरुवर
यह गले के नीचे स्थित हंसुली नामक हड्डी को सुरक्षा प्रदान करता है। छोटे बच्चों को उनकी हँसुली खिसकाने से बचाने के लिए धातु के मोटे तार को जोड़कर गोलाकार आभूषण हँसली पहनाया जाता है।
इसे चौथे फेरे में ननिहाल पक्ष से दुल्हन को पहनाया जाता है।
वर्तमान में प्रचलित गले के नेकलेस की तरह का, परन्तु उससे भारी व बड़ी आकृति का आभूषण है। इसे ठुसी भी कहते हैं।
यह महिलाओं द्वारा पारिवारिक उत्सवों पर पहनी जाने वाली मटर की आकृति के दानों से जड़ित सोने की माला होती है। यह लंबाई में बड़ी होती है।
सोने के गोल बीजों का बना गले का आभूषण। यह सोने के अतिरिक्त मोतियों से भी निर्मित होती है। यह मटरमाला से लंबाई में छोटी होती है।
यह गले का एक आभूषण है, जिसमें सोने के मोटे मानकों को तीन या पाँच पंक्तियों में सूती कपड़े की आधार-पट्टी पर लगाया जाता है। इसे गले से चिपकाकर पहना जाता है।
यह सोने के मनकों से बनी हुई कण्ठ माला होती है। इसके पेंडेंट में जो लटकन बनी होती है, उसे पीपल के पत्ते की तरह बनाया जाता है और ठप्पा लगाकर उभरी हुई आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
यह सोने या चाँदी की बनी श्रृंखला या माला होती है, जिसे स्त्री या पुरुष दोनों धारण करते हैं।
महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला एक आभूषण, जिसमें पट्टी पर छोटे तथा सुनहरी पुष्प कली वाले दाने जड़े होते हैं।
गले में पहना जाने वाला लम्बा हार, जो अधिकतर चाँदी के सिक्कों की डोर में तीन-चार अंगुल के अंतर पर गूंथने से बनता है, जिसमें घुंघुरियाँ लगी होती हैं।
सोने या चाँदी के तार का बना गोलाकार आभूषण है। यह मध्य में से चौकार (चौड़ा) तथा किनारों पर पतला होता है। इसमें लगे हुक व कुण्डी को आपस में फंसाकर गले में पहना जाता है। यह गले में स्थित हँसुली नामक हड्डी को सुरक्षा प्रदान करता है।
किसी देवी-देवता के नाम पर कलाई या गले में चाँदी का तार या धागा बाँधा जाता है, जिसे तांती कहते हैं।
यह गोलाकार रत्नों से जड़ित सोने का आभूषण है, जिसे महिलाएँ गले में पहनती हैं। तौलखे हारों से लेकर कई तरह के जैसे चंपाकली, चंदनहार, हंसहार व उर्वशी हारों का उल्लेख मिलता है। हार के बीच में कोई ताबीज या डिजाइनदार टिकड़ा होता है।
यह सोने से बना लम्बा आभूषण है, जिसके दोनों ओर माँदलियाँ लगे होते हैं।
यह सोने से निर्मित होता है, जिसमें कई लड़ियाँ और बीच-बीच में कई टीकड़े (आयताकार टुकड़े) होते हैं। यह अभी भी काफी लोकप्रिय हार है।
यह देवताओं की मूर्ति अंकित गले का आभूषण है। इसे चैन में देवताओं की सोने या चाँदी की बनी मूर्ति के साथ पहना जाता है।
छोटे-छोटे मोतियों की माला जिसे तिमणिए व टुस्सी के साथ गले में पहना जाता है, तुलसी कहलाती है।
सोने से बना हारनुमा आभूषण होता है।
यह विवाहित स्त्रियों द्वारा सुहाग के प्रतीक के रूप में पहना जाने वाला आभूषण है। यह काले मोतियों के साथ सोने या चाँदी की धातु से बना हारनुमा आभूषण होता है।
प्राचीन काल में आमीर स्त्रियों में मोतियों की माला का चलन था, जिसे मुक्तमाला या सुमरगी कहते थे। माणिक रत्नों से जड़ी माला ‘माणिक्यमाला’ कहलाती है।
ताबीज की तरह या ढोलक के आकार का बना छोटा आभूषण जिसे काले डोरे में पहना जाता है, माँदिलया कहलाता है।
यह गले का आभूषण है, जिसे आमतौर पर सूती एवं रेशमी धागों को मिलाकर बल देकर बनाई गई डोर में बड़े-बड़े मोती परोकर बनाया जाता है।
सोने व चाँदी से बना गले का ताबीज, जिसकी आकृति पान अथवा शहतूत के पत्ते जैसी होती है।
सोने या चाँदी का आभूषण है। सामान्य बटनों के स्थान पर जंजीर के साथ बटन लटके होते हैं। इसे कुर्ता-कुर्ती और कमीज के साथ पहना जाता है।
हँसली • आड • टुस्सी/ठुसी • मटरमाला/मोहनमाला • माला • गलश्री/गलसरी • कंठी/कण्डी • जंजीर • गुलबंद • झालरा • खूंगाली/हाँसली • तांती • हार • रामनवमी/नाँवा • चंदनहार/रानीहार • चौकी • तुलसी • हमेल • मंगलसूत्र • मुक्तमाला/सुमरगी • माँदिलया • कठला • पतरी • बटन
👂 कान → बूजली, कर्णफूल, बाली, झुमका, झुमकी, ओगन्या,
पीपलपत्र, मोरुवर आदि
📿 गला → हँसली, टुस्सी, मटरमाला, कंठी, जंजीर, गुलबंद,
झालरा, हार, चंदनहार, मंगलसूत्र आदि
हाथ एवं पाँव के प्रमुख आभूषण • Haryana Traditional Ornaments
आईना जड़ित अंगूठी, जिसे स्त्रियाँ दाहिने हाथ के अंगूठे में पहनती हैं। छोटा सा आईना एक कब्जे के साथ जुड़ा होता है, जिसे ऊपर-नीचे करने से आईना खुलता या बंद होता है।
स्त्री-पुरुषों द्वारा सोने-चाँदी या हीरा जड़ित एक छल्लानुमा आभूषण, जिसे आमतौर पर अनामिका अंगुली में पहना जाता है। इसे बिंठी व मुंदड़ी भी कहते हैं। तीन आँटों वाली मोटी अंगूठी झोटा कहलाती है।
कलाई यानी पुणच पर पहने जाने वाले आभूषण को पौहंचा या पुणच के नाम से जाना जाता है।
हाथ की हथेली के पीछे पहना जाने वाला सोने या चाँदी के घुँघरियों से बना आभूषण हथफूल या सोवनपान कहलाता है। यह लड़ियों के साथ अंगूठियाँ जड़ा एक गहना है जिसे त्योहारों या विवाह आदि पर धारण किया जाता है। यह हाथ की चारों अंगुलियों, अंगूठे से लेकर पूरी बाहरी हथेली को घेरता हुआ हाथ की कलाई तक आता है।
यह कलाई का एक गहना है। यह चूड़ी की तरह ढीला/ढाला न होकर कलाई से चिपका रहता है।
छनकने वाला हाथ का एक आभूषण, जिसे औरतें पहनती हैं।
यह कलाई का आभूषण है, जिसके ऊपर चोंचदार बीज होते हैं।
यह कलाई का आभूषण है। हल्के कंगन को कंगनी कहते हैं।
यह बाजू में पहना जाने वाला आभूषण है। तांबे की छड़ से बना चूड़ें की तरह का आभूषण जिस पर सोने या चाँदी की परत चढ़ी होती है। इसमें चाँदी की बनी एक पट्टी पर घुँघरू लटका दिए जाते हैं।
यह बाजू पर बाँधा जाने वाला सोने की बेल्ट जैसा आभूषण है। सामान्यतः विवाह पर बाजूबंद पहनने का रिवाज है। छोटा व पट्टीनुमा बाजूबंद को भुजबंध कहते हैं। इसे बाजुबंध, उतरणी, बाजूफूल और बाजूबांक भी कहते हैं।
यह बाजू के ऊपरी भाग में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसमें अधिकांशतः सर्पाकृति बनी होती है। इसे पहनते समय सर्पमुख बाजू के बाहरी ओर रखा जाता है।
महिलाओं के लिए कलाई में पहनने का एक आभूषण है, जिसकी मोटाई का घेरा सवा इंच होता है।
सोने-चाँदी या अन्य धातुओं से निर्मित गोलाकार आभूषण कड़ा, हाथ या पाँव में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे चुड़ा भी कहते हैं। इसकी मोटाई कंगन जितनी होती है। इसकी ऊपरी परत पर ठप्पा लगाकर फूल-पत्तियाँ उभारी जाती हैं।
यह हाथ में पहना जाने वाला सोने या चाँदी से निर्मित आभूषण है।
हाथों की उँगलियों में पहने जाने वाली नगीना जड़ी अंगूठी को मुद्रिका कहते हैं।
चाँदी के मोटे तारों से बना कड़ों के नीचे पहना जाने वाला आभूषण लंगर कहलाता है।
चूड़ी या कड़े पर श्रृंगार के लिए फँदेनुमा बाँधे जाने वाला आभूषण फूँदा कहलाता है।
मोतियों की लड़ियों के समूह से बना आभूषण जिसे हाथ में चूड़ियों के बीच में पहना जाता है।
ठोस चाँदी का बना हाथ में कड़े के साथ धारण किया जाने वाला आभूषण है।
यह दो अंगुलियों में एक साथ पहनी जाने वाली अंगूठीनुमा आभूषण होता है।
चार अंगुल चौड़ा चाँदी का आभूषण जो कलाई में पहना जाता है, चूड़ कहलाता है।
सोने व चाँदी से बना छोटे-छोटे नुकीले दानेनुमा गोलाकार आभूषण जो हाथ की कलाई में चूड़ियों के मध्य में पहना जाता है।
आरसी → अंगूठा | अंगूठी/मुद्रिका → उँगली | पौहंचा → कलाई | हथफूल/सोवनपान → हथेली | गजरा/कांगनी/कंगन → कलाई | बाजूबंद/अनंत → बाजू | दस्तबंद → हाथ | गोखरू → चूड़ियों के बीच
चाँदी से निर्मित कड़ी पाँव में टखनों के ऊपर पहना जाने वाला वलयाकार आभूषण है, जो छेलकड़े के नीचे पहना जाता है। यह कड़े से पतली होती है। दो टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया कड़ा जिसे आसानी से खोलकर पहना जा सके खीलीबांसा/खीलीफांसा कहलाता है।
ये पाँव में पहने जाने वाले आभूषण हैं जो चाँदी से बने होते हैं।
सुहागिन स्त्री द्वारा पाँव के अंगूठे के पास वाली अंगुली में पहने जाने वाली चाँदी की छल्ली को चुटकी या बिछुए कहा जाता है।
महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला वलयाकार आभूषण, जिसमें घुँघरुओं की ध्वनि निकलती है। यह पायल की तरह का आभूषण है जिसे आंवला के साथ पहना जाता है।
यह चाँदी से बने होते हैं। यह कड़ी से छोटे व हल्के होते हैं। इसे बुजुर्ग महिलाओं द्वारा कड़ी से ऊपर पैरों में पहना जाता है।
यह पाँव के अंगूठे में पहना जाने वाला, अंगूठी की आकृति का आभूषण है।
यह पायलनुमा आभूषण है जिसमें रूनझून की आवाज आती है। यह पायल से मोटा व भारी होती है तथा इसकी झनझनाहट भी ज्यादा होती है।
यह चाँदी से बना कड़ी जैसा आभूषण है जो पाँव में पहना जाता है। लच्छे, तोड़े व तिनके ठोस चाँदी के आभूषण हैं।
यह कड़ा के नीचे पहने जाने वाला आभूषण है जो चाँदी के मोटे तारों को जोड़कर ऊपर से पतला व नीचे से चौड़ा बनाया जाता है।
यह चाँदी से बना गोलाकार आभूषण है जो पैरों में पहनने पर टणक-टणक की आवाज करता है। यदि ऐसे आभूषण पर मक्के के दानों के आकार बने हों तो वे आभूषण ‘मक्या’ कहलाते हैं।
यह सोने या चाँदी से बना आँवला-नुमा, विशिष्ट लहरों युक्त कड़ा है, जिसे महिलाएँ पाँव में पहनती हैं।
चाँदी की चौड़ी तथा सादी अंगूठियाँ जो पाँव में पहनी जाती हैं, गोलया कहलाती हैं। यदि इन पर फूलों की आकृति बनी होती है तो यह ‘फोलरी’ कहलाती है।
यह हथफूल के समान पैरों का आभूषण है। यह पाँव के अंगूठे व उँगलियों के छल्लों को चैन से जोड़कर पायल की तरफ पैर के ऊपर हुक से जोड़कर पाँव में विवाह के अवसर पर पहना जाता है।
कड़ी → टखने के ऊपर | चुटकी/बिछुए → पैर की उँगली | नेवरी → पायल जैसा | छेलकड़े → कड़ी से छोटे | झांझर/रमझोल → भारी पायलनुमा | टणका → टणक-टणक ध्वनि | गोलया → चौड़ी चाँदी की अंगूठी | पगपान → हथफूल जैसा पैरों का आभूषण
पात्ती • कड़ी • फूल • तात्ती • गिटीयां • गजरियां • झाँझन चूड़ी • कड़े रमझोल • बिछिया आदि
🤲 हाथ → आरसी, अंगूठी, पौहंचा, हथफूल, गजरा, कंगन,
बाजूबंद, कड़ा, दस्तबंद, मुद्रिका, गोखरू आदि
🦶 पाँव → कड़ी, गजरियाँ, चुटकी/बिछुए, नेवरी, छेलकड़े,
झांझर, हीरनामी, तोड़ा, टणका, आंवला, गोलया, पगपान आदि
कमर के आभूषण एवं पुरुषों के पारंपरिक आभूषण
यह सोने-चाँदी से बना कमर में पहने जाने वाला आभूषण है। इसे आमतौर पर घाघरा, दामण व साड़ी पर पहना जाता है।
यह चाँदी का झब्बेदार जेवर है, जो घाघरे के नाडे के साथ बाँधा जाता है।
यह चाँदी का जेवर है जो स्त्रियों के ओढ़ने के पल्ले में बाँधा जाता है।
कमर में पहना जाने वाला सोने या चाँदी की झूलती लड़ियों की पट्टीकायुक्त आभूषण कणकती/कंदोरा कहलाता है।
सोने-चाँदी से बनी चौकोर जालियों की जंजीर जिसमें सोने-चाँदी की चाबियाँ लटकी रहती हैं। यह आभूषण पेटीकोट के ‘नेफे’ में अटकाकर लटकाया जाता है।
कमर → तागड़ी/तकड़ी • नाडा • पल्लू • कणकती/कंदोरा • सटका
पुरुषों द्वारा गले में पहने जाने वाला सोने का हार।
पुरुषों द्वारा गले में पहना जाने वाला सोने का आभूषण है। इसमें आमतौर पर सूती व रेशमी धागों को मिलाकर बल देकर बनाई गई डोर में बड़े-बड़े मोती पिरोए जाते हैं।
सोने या चाँदी का ठोस कड़क बाली-नुमा आभूषण मुरकी कहलाता है। इसे पुरुष अपने कानों में पहनते हैं।
यह पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला कान का जेवर है।
यह सोने या चाँदी से निर्मित श्रृंखला या माला होती है, जिसे गले में पहना जाता है।
यह गले का ताबीज होता है, जिसकी आकृति पान अथवा शहतूत के पत्ते जैसी होती है।
चाँदी से बनी चौकोर जालियों की जंजीर जिसे पुरुष अपनी कमर या पेट पर लपेटकर पहनता है।
गला → गोफ/गोफिया • कठला • जंजीर | कान → मुरकी • जंजीरा | गला/ताबीज → पत्तरी | कमर → चौथ
इसके अलावा अँगूठी, मौड़, कड़ा आदि भी पुरुषों के आभूषण होते हैं।
🪢 कमर → तागड़ी • नाडा • पल्लू • कणकती/कंदोरा • सटका
👨 पुरुष → गोफ/गोफिया • कठला • मुरकी • जंजीरा •
जंजीर • पत्तरी • चौथ • अँगूठी • मौड़ • कड़ा
सिर/माथे पर पहना जाने वाला प्रमुख आभूषण। विशेष रूप से माथे के बीच लटकने वाला गोलाकार आभूषण। हरियाणवी एवं उत्तर-पश्चिम भारतीय पारंपरिक आभूषणों में इसकी पहचान महत्वपूर्ण है।
गले में पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण। सामान्यतः अर्धचंद्राकार/कठोर गले के आभूषण के रूप में जाना जाता है।
गले में पहना जाने वाला आभूषण। पारंपरिक ग्रामीण वेशभूषा के साथ इसका उल्लेख मिलता है।
गले में पहना जाने वाला आभूषण। विभिन्न प्रकार एवं डिजाइनों में प्रचलित।
कानों में पहना जाने वाला प्रसिद्ध आभूषण। सामान्यतः लटकने वाले स्वरूप का।
कानों में पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण।
कान के आभूषणों का पारंपरिक रूप।
नाक में पहना जाने वाला प्रमुख पारंपरिक आभूषण। विवाह एवं विशेष अवसरों पर इसका विशेष महत्व रहा है।
नाक से संबंधित पारंपरिक आभूषण। कुछ क्षेत्रों में इसके विभिन्न स्थानीय रूप मिलते हैं।
महिलाओं द्वारा हाथों में पहना जाने वाला सामान्य एवं पारंपरिक आभूषण। काँच, लाख, धातु आदि की चूड़ियाँ प्रचलित रही हैं।
हाथ/कलाई में पहना जाने वाला आभूषण। धातु के कंगन पारंपरिक आभूषणों में महत्वपूर्ण हैं।
हाथ की हथेली और उँगलियों को जोड़ने वाला आभूषण। विशेष अवसरों पर पहना जाता है।
उँगली में पहना जाने वाला आभूषण।
कमर में पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण। हरियाणा की महिला वेशभूषा से जुड़े प्रमुख आभूषणों में इसका उल्लेख किया जाता है।
कमर में पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण। तागड़ी के समान कमर से संबंधित आभूषण के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में नाम/रूप अलग हो सकते हैं।
पैरों/टखनों में पहना जाने वाला प्रमुख आभूषण। पारंपरिक ग्रामीण महिला वेशभूषा का महत्वपूर्ण हिस्सा।
पैरों की उँगलियों में पहने जाते हैं। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक प्रथा।
पैरों में पहने जाने वाले भारी पारंपरिक आभूषणों के स्थानीय रूप।
| शरीर का अंग | प्रमुख आभूषण |
|---|---|
| सिर/माथा | बोरला |
| कान | झुमकी, बाली, कर्णफूल |
| नाक | नथ, बुलाक |
| गला | हँसली, कंठी, हार |
| हाथ/कलाई | चूड़ी, कंगन |
| हथेली/उँगलियाँ | हाथफूल, अंगूठी |
| कमर | तागड़ी, करधनी |
| पैर/टखना | पायल, कड़ी |
| पैर की उँगली | बिछुआ |
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Notes पढ़ें →वैदिक काल की धार्मिक परंपराएँ एवं हरियाणा से संबंधित तथ्य।
Notes पढ़ें →महाजनपद काल एवं बौद्ध-जैन साहित्य में हरियाणा से जुड़े तथ्य।
Notes पढ़ें →मौर्योत्तर एवं गुप्तकाल में हरियाणा का ऐतिहासिक विकास।
Notes पढ़ें →हरियाणा में गांधी जी के प्रभाव एवं कार्यों का अध्ययन।
Notes पढ़ें →राष्ट्रीय आंदोलनों में हरियाणा की भूमिका एवं प्रमुख घटनाएँ।
Notes पढ़ें →कुणिन्द गणराज्य एवं हरियाणा से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य।
Notes पढ़ें →यौधेय गणराज्य एवं हरियाणा के इतिहास से जुड़े प्रमुख तथ्य।
Notes पढ़ें →अग्र गणराज्य एवं हरियाणा में मिले ऐतिहासिक साक्ष्यों का अध्ययन।
Notes पढ़ें →पुष्यभूति एवं वर्धन वंश के उदय और राज्य विस्तार से जुड़े तथ्य।
Notes पढ़ें →हरियाणा के इतिहास से जुड़े प्रमुख अभिलेख एवं शिलालेख।
Notes पढ़ें →हरियाणा के इतिहास के प्रमुख धार्मिक एवं साहित्यिक स्रोत।
Notes पढ़ें →सिक्कों, मोहरों एवं अन्य पुरातात्विक स्रोतों से जुड़े तथ्य।
Notes पढ़ें →हरियाणा के ऐतिहासिक भवन, स्मारक एवं कला स्थापत्य।
Notes पढ़ें →हरियाणा के इतिहास से जुड़ी प्रमुख पुस्तकें, समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ।
Notes पढ़ें →पहले Topic-Wise Notes को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
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वैदिक काल की धार्मिक परंपराएँ एवं संबंधित तथ्य।
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Notes पढ़ें →मौर्योत्तर एवं गुप्तकाल में हरियाणा का विकास।
Notes पढ़ें →हरियाणा में गांधी जी के प्रभाव एवं कार्यों का अध्ययन।
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Notes पढ़ें →कुणिन्द गणराज्य एवं ऐतिहासिक तथ्य।
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