हरियाणा का प्राचीन नाम – ब्रह्मवर्त (वर्णन वैदिक साहित्य में – 1500–500 ईसा पूर्व)
प्राचीन हरियाणा
उत्तर वैदिक काल – 1000–600 ईसा पूर्व
राज्य की सबसे प्राचीन सभ्यता – सीसवाल सभ्यता (1500–500 ई. पूर्व)
यह सभ्यता वैदिक सभ्यता के समकालीन मानी जाती है।
इसे उत्तर पाषाणकालीन सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है।
इस सभ्यता के लोग नीग्रो-ऑस्ट्रेलियन जाति के थे।
इस सभ्यता से नवपाषाण कालीन कृषक बस्तियों के प्रमाण मिले हैं।
इस सभ्यता में अल्प मात्रा में तांबे के प्रमाण मिले हैं।
यह सभ्यता चैतांग नदी के किनारे स्थित थी।
इस सभ्यता से तांबे के हथ्थे वाला गंडासा मिला है।
सीसवाल सभ्यता के लोग खाल, ऊन व रूई से वस्त्र बनाने की कला से परिचित थे।
इस सभ्यता की खुदाई का कार्य 1968 में डॉ. सूरजभान द्वारा किया गया था जो पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे।
इस सभ्यता के कुल – 29 स्थलों का राज्य में पता चला है।
काले रंग पर सफेद चित्र सीसवाल संस्कृति की विशेषता है।
किस काल में राज्य की भू-गर्भिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं – मेसोजोइक काल
किस भू-गर्भिक काल में राज्य में नदी, नालों, पहाड़ों इत्यादि का सुव्यवस्थित रूप से विकास हुआ है – केनोजोइक काल
सिन्धु घाटी सभ्यता का विकास – 2500–1700 ई. पूर्व
महाभारत के युद्ध की अधिक मान्य तिथि – 900 ई. पूर्व (नकुल दिग्विजय शीर्षक के अनुसार)
वैदिक संस्कृति – 1500–500 ई. पूर्व वर्णन
महाभारत के समय – राजा कुरु (कुरुक्षेत्र)
वीरसंवरण का पुत्र – राजा कुरु
कौरव वंश का संस्थापक – राजा कुरु
हरियाणा मौर्यों के अधीन – 324–232 ई. पूर्व
मौर्य वंश के प्रमुख शासक – चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार व सम्राट अशोक
मौर्य गणराज्य का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य
प्रमुख शहर – सुध (जगाधरी)
बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र – सुध जगाधरी
भगवान बुद्ध के बाल व नाखून रखे गये हैं – सुध, जगाधरी
प्राचीन समय में 100 ब्राह्मणों के विशालकाय मंदिर थे – सुध
बारहखड़ी लिखाई का सबसे प्राचीन अभिलेख मिला है – सुध जगाधरी
कई संगीतकारों के बैलगाड़ी में बैठे हुए की मूर्ति मिली है – सुध (जगाधरी)
हरियाणा के इतिहास की जानकारी देने वाला प्रसिद्ध अभिलेख है – टोप्रा का अभिलेख (यमुनानगर)
सम्बन्धित – 273 ई.पू. से 232 ई.पू. सम्राट अशोक व राजा बीसलदेव विग्रहराज चतुर्थ
कुल अभिलेखों की संख्या – 7
अशोक चिन्ह स्थित था।
संस्कृत व ब्राह्मी लिपि पर आधारित
आधारित – नैतिक शिक्षा पर
नोट: राज्य से मिले अशोक के कुल अभिलेखों/शिलालेखों की संख्या 33 है।
हरियाणा आने वाला सबसे पहला विदेशी यात्री – मैगस्थनीज (यूनानी यात्री – 302 से 298 ई.पू.)
चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था।
बौद्ध साहित्य – दिव्यावदान व मज्झिमनिकाय में राज्य के कौन से शहरों का वर्णन है – अग्रोधा व रोहतक
फाह्यान चीनी यात्री – 399 से 414 ई. तक
राजा हर्षवर्धन का कार्यकाल –
जन्म – 590 ई., मृत्यु – 647 ई.
राज्याभिषेक – 606 ई.
वंश – पुष्य भूतिवर्धन
माता – यशोमती देवी
पिता – प्रभाकरवर्धन
बहन – राजश्री
राजधानी – थानेश्वर व कन्नौज
प्रमुख नाटक – नागानंद, रत्नावली, प्रियदर्शिका
प्रमुख दरबारी कवि – बाणभट्ट
अन्य – भर्तृहरि, जयसेन, दिवाकर व मयूर
राजा हर्षवर्धन पहले बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा में विश्वास रखता था। हेनसांग के प्रभाव में आकर महायान शाखा को मानने लगा।
बाणभट्ट द्वारा राजा हर्षवर्धन पर लिखी गई पुस्तकें – हर्षचरित्र व कादम्बरी
चीनी यात्री हेनसांग भारत आया था – 629 ई.
चीनी यात्री हेनसांग द्वारा थानेश्वर की यात्रा – 635–644 ई.
राजा हर्षवर्धन के समय राज्य के प्रांतों को कहा जाता था – भुक्ति, जिलों को – विषय, तहसील को – पेठ
हर्षवर्धन के समय प्रशासन की सबसे छोटी इकाई थी – गाँव
भुक्ति का प्रमुख – उपरिक
शैक्षिक संस्थाओं की कुल संख्या – 5000
विषय (जिला) का प्रमुख – विषयपति
तहसील (पेठ) का प्रमुख – पाठकपति
प्रधानमंत्री – मौसेर भाई भण्डी
सेनापति – सिंहनाद
युद्ध व विदेशी कार्यों का मंत्री – अवन्ति
राजा हर्षवर्धन के समय कुल उपज का कितना भाग कर के रूप में लिया जाता था – छठा भाग
राजा हर्षवर्धन के समय कर भुगतान की कितनी विधियाँ राज्य में प्रचलित थी – तीन
भागविधि – अन्न के रूप में कर
हिरण्यविधि – मुद्रा के रूप में कर
बलिविधि – उपहार के रूप में कर
राज्य जनपदों व गणराज्य के रूप में विभक्त – छठी शताब्दी तक
यौधेयगण जनपद – राज्य में मौर्य काल के बाद यौधेयगण की शक्ति का विकास हुआ है।
कार्तिकेय के सिक्के यौधेयगण से सम्बन्धित हैं।
चतुर्थ शताब्दी में यौधेयगण जनपद था।
राजधानी – प्रकृतानक (वर्तमान नौरंगाबाद, भिवानी)
जुनागढ़ अभिलेख से जानकारी मिलती है।
यौधेयगण सिक्कों की खोज 1834 कैप्टन कोटले ने की थी।
प्रमुख राजा – कार्तिकेय (भिवानी व रोहतक)
यौधेय गणराज्य में हरियाणा का नाम – बहुधान्य
महाभारत के द्रोण पर्व में वर्णन मिलता है – यौधेयगणराज्य
यौधेय गणराज्य में प्रशासन को चलाने के लिए दो खण्ड बनाये गये हैं – (1) रोहतक, (2) सिरसा
अग्र गणराज्य – अग्रोहा
प्रमुख राजा – अग्रसेन
यह अग्रवाल वैश्यो का उद्भव स्थल है।
संगीत के सात सूरों (सा रे गा मा) की ईंट मिली है।
इस गणराज्य का वर्णन अष्टाध्यायी, महाभारत व बौद्धायन सूत्र इत्यादि ग्रंथों में मिलता है।
अग्रेय सिक्कों पर वृक्ष, बैल, सिंह व देवी चित्र मिले हैं।
राज्य में सूर्य देव की मूर्ति अग्रोहा से मिली है।
पंचमाक सिक्के भी मिले हैं।
कुणिंद गणराज्य – अम्बाला
प्रमुख राजा – नांग वंश से सम्बन्धित था
अर्जुनायन गणराज्य – महेन्द्रगढ़
प्रमुख राजा – अर्जुन (पाणिनी के अष्टाध्यायी ग्रंथ में वर्णन मिलता है।)
श्रीकण्ठ जनपद – कुरुक्षेत्र
नोट: यह नाम किसी नागवंशीय राजा द्वारा दिया गया था।
छठी शताब्दी में हरियाणा का नाम था – श्रीकण्ठ जनपद
805 ई. में हरियाणा पर नागभट्ट (प्रतिहार) का शासन काल।
हरियाणा में गुर्जर प्रतिहार काल की मूर्तियाँ समस्त हरियाणा से प्राप्त हुई हैं।
8वीं शताब्दी का प्रसिद्ध संत चौरंगीनाथ द्वारा अस्थल बोहर मठ की स्थापना।
ठेठ हरियाणवी का हिन्दी में प्रयोग किया था – संत चौरंगीनाथ
8वीं शताब्दी की विष्णु के वामन अवतार की मूर्ति मिली है – तोशाम की पहाड़ी
नौवीं शताब्दी का प्रसिद्ध शासक राजा मिहिर भोज (पेहोवा) घोड़े के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था – पेहोवा
नौवीं शताब्दी का अभिलेख पेहोवा से मिला है जो राजा भोजराज से सम्बन्धित है।
तोमर वंश का अभ्युदय हुआ है – 910
नौवीं शताब्दी में हरियाणा किस नाम से जाना जाता था – हरियाल
मह्मूद गजनवी ने थानेश्वर पर आक्रमण – 1009 व 1014
नोट: मह्मूद गजनवी के थानेश्वर पर आक्रमण के दौरान उसका दरबारी कवि अलबरूनी उसके साथ था। उस दौरान थानेश्वर का शासक जयपाल था। थानेश्वर में चक्र स्वामी की मूर्ति को मह्मूद गजनवी ने तोड़ दिया था।
अलबरूनी ने अपनी रचना ‘किताब उल-हिन्द’ में थानेश्वर का वर्णन किया है।
11वीं शताब्दी में ईरानी यात्री अलबरूनी ने थानेश्वर की यात्रा की थी।
11वीं शताब्दी का प्रसिद्ध शासक – दीपलहर (सोनीपत का था)
तोमरों को राज्य में सत्ता से हटाने का श्रेय जाता है – चौहान शासकों को
1139 में हरियाणा पर शासन – अर्णोराज चौहान
1151 में हरियाणा पर शासन – विग्रहराज चौहान चतुर्थ
1191 में तराइन का प्रथम युद्ध – पृथ्वीराज चौहान व मोहम्मद गौरी
तराइन का प्रथम युद्ध पृथ्वीराज चौहान व हांसी से गोविन्द राय की संयुक्त सेना ने लड़ा। जिससे पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई।
1192 तराइन का द्वितीय युद्ध – पृथ्वीराज चौहान VS मोहम्मद गौरी
इस काल में पृथ्वीराज चौहान द्वारा गोहाना नामक शहर बसाया गया।
पृथ्वीराज चौहान का दरबारी कवि चन्दबरदाई था जिसने पृथ्वीराज रासो लिखा था।
हांसी के किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था।
हांसी के असिगढ़ किले में तलवार बनाने की फैक्ट्री राजा अनंगपाल के पुत्र दृढ़देव ने लगाई थी।
हांसी में पृथ्वीराज द्वितीय का अभिलेख मिला है।
हांसी का वर्णन पृथ्वीराज रासो ग्रंथ में मिलता है।
तराइन की प्रथम लड़ाई का असली हीरो – गोविन्दराय हांसी
मोहम्मद गौरी की मृत्यु – 1206 ई. (सल्तनत काल प्रारम्भ)
कुतुबुद्दीन ऐबक काल – 1206 ई. से मृत्यु – 1210
इल्तुतमिश का कार्यकाल – 1210 से 1236
रजिया सुल्तान का राज – 1236 से 1240
दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाली पहली महिला शासक थी।
जन्म – कैथल, मृत्यु – 1240 (कैथल)
पति का नाम – अल्तूनिया मलिक, मकबरा – कैथल
सल्तनत काल में हरियाणा का सबसे छोटा इक्ता जिसमें 30–40 गाँव थे – पलवल
सबसे बड़ा इक्ता – दिल्ली का इक्ता
बलवन का शासन काल – (1266–1287)
बलवन द्वारा निर्मित दुर्ग/किले –
1) दोसी का किला – महेन्द्रगढ़
2) कनौड़ का किला – महेन्द्रगढ़
3) गोपाल गिरि का किला – गुरुग्राम व दिल्ली की सीमा पर
1330 में अरबी यात्री इब्नबतूता सिरसा आये।
अलाउद्दीन खिलजी (1290–1316 तक)
अलाउद्दीन खिलजी इतिहास में आर्थिक सुधारों के लिए प्रसिद्ध है।
अलाउद्दीन खिलजी कैथल का मुक्ती इक्तादार था।
दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय 1328 ई. के एक शिलालेख की पंक्तियाँ हरियाणा शब्द की पुष्टि करती हैं तथा यह एक हरियाणा में स्वर्ण की तिथि थी।
फिरोजशाह तुगलक (1351–1388 तक)
फिरोजशाह तुगलक ने अपने पुत्र फतेहखान के नाम से 1352 में फतेहाबाद बसाया।
1354 में हिसार-ए-फिरोज बसाया।
इसके अलावा फिरोज शाह तुगलक ने सिरसा से 12 मील दूर फिरोजाबाद हरनी खेड़ा बसाया।
राज्य में नहरों का निर्माण सर्वप्रथम फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था।
फिरोजशाह तुगलक की सबसे पुरानी हवेली फतेहाबाद में स्थित है।
फिरोजशाह तुगलक ने हिसार में काले पत्थरों से गुजरी महल का निर्माण करवाया था।
फिरोजशाह तुगलक ने राज्य में गोहाना के हिन्दू मंदिरों को नष्ट करवा दिया था तथा मेवात के हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बना दिया था।
फिरोजशाह तुगलक ने फौलाद आधुनिक जोया (पटियाला) से घग्गर नदी से फतेहाबाद तक नहर का निर्माण करवाया था।
प. यमुना नहर का निर्माण 1355 में फिरोजशाह तुगलक ने शिकार गाह को पानी पहुँचाने के लिए किया था।
सल्तनत काल (1206 से 1526) से सम्बन्धित प्रश्न
सल्तनत काल का सबसे छोटा इक्ता – पलवल (30 से 40 गाँव)
सल्तनत काल का सबसे बड़ा इक्ता – दिल्ली
सल्तनत काल में सरकारी इक्तों का प्रशासनिक कहलाता था – मुक्ति
सल्तनत काल में इक्तों का विभाजन था – शिकों में
शिकों का प्रमुख कहलाता था – शिकदार
सल्तनत काल में शिक किसका प्रकार था – तहसील
सल्तनत काल में गाँव का प्रमुख कहलाता था – मुकद्दम
तैमूर लंग का आक्रमण (1398 में)
राज्य के सिरसा, फतेहाबाद व हिसार पर तैमूर लंग ने 1398 में आक्रमण किया।
तैमूरलंग की आत्मकथा – मलफूजात-ए-तैमूरी व तजुक-ए-तैमूर (तुर्की भाषा में)
तैमूरलंग निवासी था – समरकंद (मध्य एशिया)
14वीं शताब्दी में भिवानी की स्थापना राजपूत शासक नीम ने अपनी पत्नी ध्यानी के नाम से की थी।
सूरदास का जन्म – 1478 सीही (फरीदाबाद)
गुरु – बल्लभाचार्य
पुस्तकें – सूर सागर, साहित्य लहरी, सूर सारावली
बाबर का आक्रमण (1526–1530)
बाबर का हरियाणा में प्रवेश – 1525
पानीपत का प्रथम युद्ध – 20 अप्रैल, 1526
इब्राहिम लोदी VS बाबर
मेवात युद्ध – 17 मार्च, 1527
हसन खाँ मेवाती VS बाबर
महाराणा संग्राम सिंह का अभिन्न मित्र था – हसन खाँ मेवाती
बाबर का हरियाणा में सर्वाधिक विरोध हुआ था – 1530
कैथल (रियासत), मोहन सिंह भंडार राजपूत ने
बाबर ने प्रशासन को/सरकार को कितने भागों में बांटा था – चार; (1) दिल्ली सरकार, (2) मेवात सरकार, (3) हिसार सरकार, (3) सरहिन्द सरकार
काबुली बाग मस्जिद पानीपत का निर्माण करवाया – बाबर ने (पत्नी – मुसम्मत की याद में)
बाबर ने नारनौल का जागीरदार किस व्यक्ति को बनाया था – अहसान तैमूर
शेरशाह सूरी (1540–1545)
शेरशाह सूरी का जन्म – 1486 (नारनौल), जागीरदार हसन के घर
बचपन का नाम – फरीद
कोस मीनारों का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था।
भूमिकर एकत्र करने वाले व्यक्ति को सूरदास ने मुसाहिब कहा।
हरियाणा में कुल कोस मीनारों की संख्या है – 88
राज्य की सबसे प्राचीन कोस मीनार है – कोहंड
कोस मीनारों की कुल दूरी है – 2 मील (लगभग 3 कि.मी.)
शेरशाह सूरी की मृत्यु हुई थी – 1545 ई. (कालिंजर में सुरंग फटने से)
पानीपत का द्वितीय युद्ध – 5 नवम्बर, 1556
अकबर के संरक्षक बैरम खान VS हेमचन्द्र विक्रमादित्य
राजा हेमचन्द्र हेम का जन्म – माचेड़ी गाँव (अलवर)
जाति – बनिया ब्राह्मण
व्यवसाय – शोरा व्यापार
दिल्ली का अंतिम हिन्दू सम्राट बना – 7 अक्टूबर, 1556
कुल लड़े गये युद्धों की संख्या – 22
विक्रमादित्य की उपाधि – 14वीं
हेमू की हवेली – कुतुबपुर (रेवाड़ी)
यह हवेली पुर्तगाली शैली में बनी है।
नोट: राजा हेमू की खण्ड पीठ मीरपुर विश्वविद्यालय, रेवाड़ी में स्थापित की गई है।
हेमू पहले आदिल शाह की सेना में सैनिक के रूप में भर्ती हुआ था।
बुढ़िया की नींव (यमुनानगर) हुमायूँ ने रखी थी।
पानीपत के द्वितीय युद्ध के बाद हरियाणा में जाटों का उदय हुआ था।
1591 में शाहकुली खाँ द्वारा नारनौल की स्थापना।
अकबर का कार्यकाल (1556–1605)
अकबर ने हिसार से फिरोजा शब्द हटवाया।
अकबर के दरबारी कवि बीरबल का जन्म नारनौल में हुआ था।
अकबरी दरवाजा हरियाणा में अकबरपुर बरोटा (सोनीपत) में है।
सबसे पुराना अकबर के समय का बादशाही पुल करनाल में स्थित है।
सतनामी पंथ की स्थापना – 1543 संत वीरभान
गुरु का नाम – उदयदास, काव्य ग्रंथ कहलाये – साहिब
किस मुगल शासक ने हरियाणा में सर्वाधिक पेड़-पौधे लगवाये थे – जहाँगीर
1614–15 में हरियाणा में प्लेग फैलने के कारण किस मुगल शासक ने लोगों की सहायता की थी – जहाँगीर
जहाँगीर की मृत्यु – 1627
शाहजहाँ का कार्यकाल – 1627 से 1657 तक
शाहजहाँ का धार्मिक गुरु – शेख चिल्ली
लोहारी के किले का निर्माण 1570, जयपुर के सौमंत अर्जुनदेव ने।
शेख चिल्ली का मकबरा स्थित है – थानेश्वर
निर्माता – शाहजहाँ
हरियाणा का ताजमहल कहलाता है – शेख चिल्ली का मकबरा
नोट: शेख चिल्ली के मकबरे को डेविड रॉस ने ताजमहल के बाद सबसे सुंदर इमारत कहा है।
शाहजहाँ द्वारा बनाई गई प्रशासनिक इकाई थी – चकला
शाहजहाँ के पुत्र दाराशिकोह के पास हरियाणा में किस जगह की फौजदारी थी – हिसार
शाहजहाँ ने हिसार के ‘चकला’ का हाकिम किसे बनाया था – कुपाराम गौड़
औरंगजेब का शासन काल (1658–1708)
गोकुल जाट हरियाणा ने औरंगजेब से 1669 में डटकर मुकाबला किया।
ओला व कान्हदेव के नाम से प्रसिद्ध हुए हैं – गोकुल जाट
नारनौल के सतनामियों ने किस मुगल शासक से युद्ध लड़ा था – औरंगजेब
नोट: राज्य में बनी सर्वश्रेष्ठ मुगलकालीन स्मारक है – रायमुकन्द
बीरबल का छत्ता (निर्माण – शाहजहाँ के समय)
औरंगजेब के समय रेवाड़ी में अहीर शासन की स्थापना किस व्यक्ति ने की थी – नन्दराम अहीर (जन्म – गढ़बोली गांव)
नन्दराम अहीर ने धारूहेड़ा शहर बसाया, इसके अलावा रानी की ड्योढ़ी रेवाड़ी का निर्माण करवाया व कानोट दरवाजा व बागानवाला तालाब रेवाड़ी का निर्माण करवाया।
भागानी युद्ध – 1688
गुरु गोविंद सिंह जब युद्ध के लिए जा रहे थे तो रास्ते में गुरुद्वारा नड़दा साहिब, पंचकुला में रुके थे।
राजाराम जाट शासक – 1688
राजाराम जाट ने अकबर के मकबरे को लूटकर उसकी अस्थियाँ निकाल कर जला दी थी। फिर राजाराम का उत्तराधिकारी जाट शासक चूड़ामन बना व चूड़ामन का उत्तराधिकारी बदन सिंह बना।
बन्दा बहादुर बैरागी का जन्म – 1670 (कश्मीर)
बचपन का नाम – लक्ष्मण सिंह
जाति – वैश्य, बैरागी
मुख्यालय – सिहरी खापड़ी (सोनीपत)
बन्दा बहादुर बैरागी का संघर्ष – 1710
गुरु गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद मुगलों से युद्ध किये थे – बन्दा बहादुर बैरागी ने
मृत्यु – 1716 मुगल बादशाह बहादुर शाह के समय
हरियाणा में सांग की शुरुआत – 1730
सांग का स्वर्ण काल – 1730–1739
नोट: राज्य में अंग्रेजों द्वारा किसानों से भू-कर के रूप में 1/6 हिस्सा लिया जाता था।
राज्य में देशी रियासतों द्वारा किसानों से भू-कर के रूप में 1/4 हिस्सा लिया जाता था।
पानीपत का तीसरा युद्ध – 14 जनवरी, 1761
अहमदशाह अब्दाली VS मराठा
विजेता – अहमदशाह अब्दाली (अफगानिस्तान)
अहमदशाह अब्दाली ने अपने जीते हुए प्रदेश जैन खाँ को सौंप दिये थे।
मुगल शासक बहादुरशाह ने किस राजा जाट शासक की राजनैतिक हैसियत को स्वीकार किया था – राजा चूड़ामन
15 अक्टूबर, 1754 को तत्कालीन मुगल सम्राट आलमगीर ने मराठों को कौन सा पवित्र स्थान दिया था – कुरुक्षेत्र
राजा सूरजमल (1755–1764)
राजा सूरजमल को जाटों का प्लेटो व अफलातून भी कहा जाता है। इस जाट शासक में अफगान पठान, रुहले व मराठों के सब गुण विद्यमान थे।
जाट राजा सूरजमल की हत्या – 25 दिसम्बर, 1764 (हिन्दन नदी के किनारे)
नादिर शाह का आक्रमण – नादिरशाह ने 1739 में दिल्ली के सम्राट मोहम्मदशाह से कोहिनूर हीरा छीन लिया व मयूर सिंहासन अपने साथ ले गया। यह युद्ध करनाल युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है।
हरियाणा पर मराठों का अधिकार रहा – 18वीं शताब्दी (1756–1757 पूर्णतया)
हरियाणा में चित्रकला का विकास हुआ है – 18वीं शताब्दी
हरियाणा का भक्ति काल कहा जाता है – 18वीं शताब्दी
जींद रियासत की स्थापना – 1764, राजा गजपत सिंह
अंतिम शासक – रणबीर सिंह 1887 से 1947 तक
जार्ज थॉमस का कार्यकाल – 1799–1802
मृत्यु – 1802 (बह्रामपुर)
देश – आयरलैण्ड
भारत आया – 1782 में
राजधानी – हांसी
किले का निर्माण – झज्जर
नोट: जार्ज थॉमस सबसे पहले 1782 में मद्रास आया था और डाकू बनकर लूटपाट की तथा वह 1787 में समरू बेगम की…
सेना में भर्ती हो गया और 1789 के रेवाड़ी युद्ध में शाहआलम के प्राणों की रक्षा की थी। इससे सम्राट बेगम ने खुश होकर जॉर्ज थॉमस को टप्पल का जागीरदार बना दिया था फिर यह धीरे-धीरे 1799 में शासक बन गया।
जॉर्ज थॉमस द्वारा बसाये गये गांवों की संख्या – 253
प्रथम बेरी युद्ध 1794 जाटों VS जॉर्ज थॉमस।
द्वितीय बेरी युद्ध 1807 सिखों VS मराठों।
जॉर्ज थॉमस के सिक्के – सिक्का-ए-शाही कहलाते हैं।
जॉर्ज थॉमस ने हरियाणा में सिक्के ढालने की टकसाल की स्थापना 1797 हांसी में की थी।
जॉर्ज थॉमस तोपदार व तोपेदार बन्दूकें स्वयं बनाता था।
जॉर्ज थॉमस ने सिखों को सिक्कटूटेसाहिब की संज्ञा दी थी।
जॉर्ज थॉमस का आवास जहाज कोठी हिसार में स्थित है। यह वर्तमान में जहाज कोठी संग्रहालय स्थित है।
जॉर्ज थॉमस की आत्म कथा विलियम फ्रैंकलिन ने लिखी है।
हरियाणा पर अंग्रेजों का अधिकार 1803
हरियाणा पर अंग्रेजों का अधिकार किस मुगल शासक के दौरान हुआ था – शाहआलम
सुर्जीअर्जन ग्राम की संधि 30 दिसम्बर, 1803 को दौलतराम सिंधिया व अंग्रेजों के बीच हुई थी।
अंग्रेजों द्वारा करनाल की स्थापना – 1806
समस्त हरियाणा पर ईस्ट इंडिया कम्पनी का अधिकार – 1809–1810
नोट: ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 87 गांव जागीर के रूप में राव तेज सिंह को प्रदान किये थे।
ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ सबसे पहले हरियाणा में विरोध रोहतक के किसानों ने किया था।
ईस्ट इंडिया कम्पनी ने हरियाणा को तीन डिविजन में बांटा था।
ईस्ट इंडिया कम्पनी के दौरान हरियाणा में 3000 हजार गांव थे।
पटौदी रियासत की स्थापना 1806 फैज तलक खां द्वारा हुई थी।
ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ प्रमुख विद्रोह
1) छछरौली का विद्रोह – 1818 ई.
नेतृत्वकर्ता – जोधासिंह
छछरौली रियासत को कलसिया रियासत के नाम से भी जाना जाता है।
अन्य शासक – बुगेल सिंह, रानी रामकौर
63 वर्ग कि.मी. में फैली थी। वर्तमान में छछरौली यमुनानगर जिले में पड़ता है।
2) रानियों का विद्रोह – 1818 ई.
नेतृत्वकर्ता – जाबित खां
3) जींद का विद्रोह – 1814 ई.
नेतृत्वकर्ता – प्रताप सिंह
अन्य शासक – रानी सौद्राही
4) किसानों का विद्रोह – 1824 ई.
नेतृत्वकर्ता – राजा सूरजमल
नोट: 1824 ई. में बर्मा युद्ध में अंग्रेजों की हार की चर्चा सुनकर रोहतक, हिसार, गुरुग्राम व भिवानी के किसानों ने राजा सूरजमल के नेतृत्व में विरोध किया।
5) बलाबली का विद्रोह – 1835
नेतृत्वकर्ता – गुलाब सिंह
6) कैथल का विद्रोह – 1843
नेतृत्वकर्ता – गुलाब सिंह, साहिब कौर व सूरज कौर
7) लाडवा का विद्रोह – 1845
नेतृत्वकर्ता – अजीत सिंह
8) लुहार का विद्रोह – 1830
नेतृत्वकर्ता – नवाब शम्सुद्दीन
नोट: नवाब शम्सुद्दीन ने विलियम फ्रेजर की हत्या करवाई।
दिल्ली अखबार का प्रकाशन हुआ – 1836
1857 तक हरियाणा उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। 1858 के बाद अंग्रेजों ने हरियाणा को पंजाब में मिला दिया था।
ईस्ट इंडिया कम्पनी के काल में हरियाणा में खेतों की बुआई बुधवार को होती थी।
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