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राज्य के प्रमुख महोत्सव/मेले

राज्य के प्रमुख महोत्सव

रक्षाबंधन पर सलोणी महोत्सव का आयोजन – झज्जर

कार्तिक महोत्सव का आयोजन – नाहरगढ़ पैलेस, बल्लभगढ़

शिव चौदस महोत्सव का आयोजन – अम्बाला

महावीर जयंती महोत्सव का आयोजन – लाडवा, कुरुक्षेत्र

होला/डोला महोत्सव का आयोजन – गुरु तेग बहादुर की स्मृति में, लाखनमाजरा, रोहतक

बाग-बगीचों का विरासत महोत्सव का आयोजन – पिंजौर, पंचकुला (2006 से आयोजित)

मार्शल आर्ट व लोककला महोत्सव का आयोजन – गुरुग्राम

जटायु यात्रा महोत्सव का आयोजन – मनसा देवी मंदिर, पंचकुला

विंटेज कार महोत्सव का आयोजन – सोहना, गुरुग्राम (स्टेट्स ग्रुप द्वारा आयोजित)

सरस्वती महोत्सव 2024

अन्तर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव 2024 का आयोजन – 11 से 14 फरवरी, 2024; आदिबद्री, यमुनानगर

समापन – पेहोवा, कुरुक्षेत्र

मुख्य कार्यक्रमों का आयोजन – यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, रोहतक

अन्तर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव 2023 का आयोजन – 25–

अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024

26 जनवरी, 2023; आदिबद्री, यमुनानगर

अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024 – आयोजन – 18 नवम्बर से 15 दिसम्बर, 2024 (ब्रह्म सरोवर, कुरुक्षेत्र)

राज्य पार्टनर – ओडिशा, देश पार्टनर – तंजानिया

2024 में देश से बाहर आयोजन – श्रीलंका (28 फरवरी से 6 मार्च 2024)

2023 में देश से बाहर आयोजन – ऑस्ट्रेलिया

प्रथम गीता पार्क की स्थापना – ब्रैम्पटन, कनाडा

राष्ट्रीय पर्व/महोत्सव का दर्जा दिया – 2002

विश्व स्तर पर प्रारम्भ – 2017

गीता जयंती आयोजन समिति का अध्यक्ष – श्री ज्ञानानन्द महाराज

दुनिया की सबसे बड़ी भगवत गीता कहाँ रखी गई है – इस्कॉन श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर (कुरुक्षेत्र)

निर्माण – मिलान (इटली)

वजन – 800 किलो

37वाँ सूरजकुंड क्राफ्ट मेला 2024

आयोजन – 02 से 18 फरवरी, 2024

कंट्री पार्टनर – संयुक्त

36वाँ सूरजकुंड क्राफ्ट मेला 2023 – 03 से 19 फरवरी, कंट्री पार्टनर– सिंगापुर, थीम– आजादी का अमृत महोत्सव, राज्य – पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्य

भारत का सबसे बड़ा हस्त शिल्प मेला आयोजित किया जाता है – सूरजकुंड (फरीदाबाद)

आयोजन – 1 फरवरी से 15 फरवरी

प्रथम बार आयोजन – 1987

प्रथम फोकस राज्य – 2009 मिश्र

प्रथम साथी राष्ट्र – 2012 थाईलैंड

प्रथम थीम राज्य – 1989 राजस्थान

सूरजकुंड मेले के ब्रांड एम्बेसडर – अभिनेता धर्मेन्द्र व अभिनेत्री हेमा मालिनी

सूरजकुंड क्राफ्ट मेले का निकटतम मेट्रो-स्टेशन – बदरपुर मेट्रो स्टेशन

राज्य का प्रथम क्राफ्ट मेला – सूरजकुंड क्राफ्ट मेला (फरीदाबाद)

राज्य का सबसे बड़ा मेला – सूरजकुंड क्राफ्ट मेला (फरीदाबाद)

राज्य के किस मेले को देखने सर्वाधिक विदेशी पर्यटक आते हैं – सूरजकुंड क्राफ्ट मेला (फरीदाबाद)

राज्य सरकार को किस मेले से सर्वाधिक आमदनी होती है – सूरजकुंड क्राफ्ट मेला (फरीदाबाद)

राज्य में पशुओं का सबसे बड़ा मेला भरता है – जहाजगढ़ (झज्जर)

राज्य में ऊँटों का सबसे बड़ा मेला भरता है – बरालू, गाँव लोहारू तहसील, भिवानी

राज्य के किस गाँव को मेलों का गाँव कहते हैं – सालवन, करनाल

राज्य में हनुमान जी/बालाजी भगवान का सबसे बड़ा मेला भरता है – इमलोटा, च. दादरी

होली का मेला (24) गाँवों से सम्बन्धित राज्य के किस गाँव में भरता है – बनवारी गाँव, होडल, पलवल

छड़ी की पूजा के लिए राज्य का प्रसिद्ध मेला भरता है – अमरपुर, करनाल

आठ गाँवों से सम्बन्धित दादा भौमिया का मेला लगता है – पातवान गाँव, तहसील लोहारू (भिवानी)

राज्य के किस स्थान पर कार्तिक सांस्कृतिक मेले का आयोजन किया जाता है – नाहरगढ़ पैलेस, बल्लभगढ़ (फरीदाबाद)

गुरु तेगबहादुर की याद में होला मोहल्ला महोत्सव मेले का आयोजन किया जाता है – लाखनमाजरा, रोहतक

राज्य में मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा मेला बूढ़ी तीज का मेला कहाँ भरता है – अल्दुका स्थान, नूँह

राज्य में अमरावली बानियों का सबसे बड़ा मेला अग्रसेन भगवान का मेला भरता है – अग्रोहा, हिसार

राज्य में प्रसिद्ध संतकृपा का मेला भरता है – खेड़ी गुजर, सोनीपत

राज्य में सोमवती अमावस्या को पिंडदान के लिए प्रसिद्ध मेले का आयोजन कहाँ किया जाता है – फरल गाँव, फाल्गु तट तीर्थ स्थल, कैथल

राज्य में रावण का मेला कहाँ भरता है – नूँह, मेवात

पुरानी कारों का सबसे बड़ा मेला/रैली – सोहना, स्टेट्स ग्रुप द्वारा 1964 से आयोजित (गुरुग्राम)

राज्य में रक्षाबंधन पर सलोणी महोत्सव/त्यौहार/मेले का आयोजन किया जाता है – झज्जर

रक्षाबंधन पर बाबा खेड़ावाले का मेला कहाँ भरता है – भिवानी (नौरंगाबाद)

इसके अलावा रक्षाबंधन पर मेले का आयोजन पलवल, च.

मेलों से सम्बन्धित जिले

राज्य में भार्गव समुदाय का सबसे बड़ा मेला भरता है – डोसी की पहाड़ियों, च्यवन ऋषि का आश्रम, महेन्द्रगढ़

नोट: भार्गव समुदाय के संस्थापक च्यवन ऋषि थे

राज्य में प्रसिद्ध गणगौर मेला भरता है – हिसार

गोगाजी भगवान का सबसे बड़ा मेला राज्य में कहाँ भरता है – हिसार (क्योंकि यहाँ सर्वाधिक श्रद्धालु आते हैं)

नोट: राज्य में और भी अनेक स्थानों पर गोगाजी भगवान के मेले का आयोजन किया जाता है पर सबसे बड़ा गोगाजी का मेला हिसार में ही भरता है।

राज्य में मार्च व सितम्बर महीनों में किसान मेले का आयोजन कहाँ किया जाता है – हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

राज्य में आमों का मेला कहाँ भरता है – पिंजौर पंचकुला

राज्य में दशहरा मेले का आयोजन कहाँ पर किया जाता है – फतेहाबाद

नोट: राज्य/देश का सबसे ऊँचा रावण का पुतला पंचकुला में स्थापित किया जाता है।

कम्बोज समाज का सबसे बड़ा मेला/धार्मिक आयोजन राज्य में कहाँ किया जाता है – डेरा बाबा भूमणशाह, सिरसा

चौटस उत्सव मेले का आयोजन किया जाता है – अम्बाला

राज्य में हिन्दू, मुस्लिम व सिख तीनों समुदाय का सबसे बड़ा मेला भरता है – कपालमोचन, यमुनानगर

राज्य में सबसे बड़ा सूर्यग्रहण पर मेला कहाँ भरता है – ब्रह्म सरोवर, कुरुक्षेत्र

राज्य में नाथ सम्प्रदाय/दर्शनी/कनफटे साधुओं का सबसे बड़े मेले का आयोजन किया जाता है – अस्थल बोहर मठ, रोहतक

मेलों से सम्बन्धित जिले

करनाल जिले के प्रसिद्ध मेले:-

1) पांडु का मेला – पपाहाना, असंध, करनाल (प्रतिमाह)

2) छड़ीओं का मेला – अमरपुर, करनाल (सितम्बर माह)

3) बाबा सिमरनदास का मेला – इन्द्री, करनाल (अक्टूबर माह)

4) गोगापीर का मेला – खेड़ा नानक स्थान, करनाल (भादो नवमी)

5) परासर का मेला – तरावड़ी, करनाल (फरवरी माह)

गुरुग्राम के प्रमुख मेले:-

1) भक्त पूर्णमल का मेला – कांसन गाँव, गुरुग्राम (भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी)

नोट: बाबा चौरीनाथ को ही भक्त पूर्णमल कहा जाता है जिसकी स्मृति में यह मेला आयोजित होता है।

2) शीतला माता का मेला – गुरुग्राम

गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी शीतला देवी की स्मृति में आयोजित होता है।

3) बुढ़ों का मेला – मुबारकपुर गाँव, गुरुग्राम

4) शाहखोखा खोरी का मेला – खोरी नामक स्थान पर मुस्लिम समुदाय द्वारा आयोजित मेला है।

कैथल जिले के प्रसिद्ध मेले:-

1) फाल्गु मेला – फरल गाँव (कैथल), सोमवती अमावस्या

2) पुण्डरक का मेला – पुण्डरी, कैथल (अप्रैल माह)

3) देहाती का मेला – लुदाना, कैथल (अक्टूबर महीने)

पानीपत जिले के प्रसिद्ध मेले:-

1) पाथरी माता का मेला – पाथरी गाँव, पानीपत (चैत्र व आषाढ़ महीने)

यह मेला (पाथरी माता) का मेला छोटे बच्चों को खसरा व चेचक से ठीक होने से सम्बन्धित है।

2) कनल्दर की मजार का मेला – पानीपत (यहाँ श्रद्धालु मन्नत मांगने के लिए दरगाह के बाल में ताला लगाते हैं।)

फरीदाबाद जिले के प्रमुख मेले:-

1) सूरजकुण्ड क्राफ्ट मेला – फरीदाबाद (1 से 15 फरवरी प्रतिवर्ष)

2) फूलडोर का मेला – स्थान अतरचट्ट, फरीदाबाद (चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया को)

यह मेला बाबा बक्शीनाथ की याद में आयोजित किया जाता है।

3) कार्तिक सांस्कृतिक मेला – नाहरगढ़ पैलेस, फरीदाबाद

नोट: पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने 1997 में कार्तिक उत्सव की यहीं शुरुआत की थी।

4) बाबा उदासीनाथ का मेला – अलावलपुर, फरीदाबाद (फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को)

5) दादा कान्हा रावत का मेला – बहोत, फरीदाबाद (फाल्गुन पंचमी दादा रावत की याद में)

6) कनुवा का मेला – गढ़ोता, फरीदाबाद (भादो माह कृष्ण पक्ष एकादशी)

7) कलका का मेला – मोहना, फरीदाबाद (चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी को)

पलवल जिले के प्रमुख मेले:-

1) श्री बलदेव छठ मेला/होली का मेला – पलवासुर गढ़ पर भगवान श्रीकृष्ण व बलदेव (दाऊ जी) की विजय का प्रतीक यह मेला श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ यानी बलदेव/बलराम भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में बनाया जाता है।

बलदाऊ/बलदेव/बलराम को हलधर व कृषक देव भी कहा जाते हैं।

यह मेला लगभग 21 दिनों तक चलता है तथा पलवल के (24) गाँवों से सम्बन्धित हैं।

2) रक्षाबंधन का मेला – पलवल

3) प्रह्लाद भगत का मेला – अलिका गाँव, पलवल (फाल्गुन महीने में)

नूंह/मेवात के प्रमुख मेले:-

1) रावण का मेला – फिरोजपुर झिरका, नूंह/मेवात

2) शिव का मेला – फिरोजपुर झिरका, नूंह/मेवात

3) रामनवमी का मेला – नूंह/मेवात

4) बूढ़ी तीज का मेला – अल्दूका गाँव, नूंह

रेवाड़ी के प्रसिद्ध मेले:-

1) पीर बाबा का मेला – यह मेला रेवाड़ी के बीकानेर गाँव में (चैत्र महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को) भरता है।

2) बाबा सूरजगिरी का पौराणिक मेला – खोरी नामक स्थान रेवाड़ी (कृष्ण पक्ष की प्रथम को)

3) बसन्त पंचमी का मेला – काठवास गाँव, रेवाड़ी

4) गोगानमी का मेला – धारहेड़ा, रेवाड़ी

5) शिवरात्रि का मेला – रेवाड़ी

महेन्द्रगढ़ जिले के प्रमुख मेले:-

1) देवी का मेला – नारनौल के निकट डोसी की पहाड़ियों पर। यह स्थल महर्षि च्यवन ऋषि की तपोभूमि है।

2) बाबा भिलाई नाथ का मेला – नांगलगढ़ गाँव (भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में)

3) बाबा केसरा स्मृति मेला – ग्राम कुशाहरा, महेन्द्रगढ़ (भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष)

4) शिवजी का मेला – बगौते, महेन्द्रगढ़

5) भूता भवानी मेला – महेन्द्रगढ़

हिसार जिले के प्रमुख मेले:-

1) किसान मेला – मार्च-सितम्बर (हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय)

2) अग्रसेन जयंती का मेला – अग्रोहा (मार्च-अप्रैल महीने)

3) शिवजी का मेला – सीसमवाल व कुमारा क्षेत्र (फाल्गुन के महीने में)

4) गोगा नवमी का मेला – शुक्ल पक्ष नवमी, गोगापीर की स्मृति में

5) काली देवी का मेला – हांसी शहर, हिसार में

6) नवरात्रि का मेला – बास व बनभौरी क्षेत्र, हिसार

7) जन्माष्टमी का मेला – इस मेले में भगवान श्रीकृष्ण को गुरु जन्मेश्वर के अवतार में दिखाया जाता है। अधिकांश क्षेत्रों में हिसार में आयोजित

फतेहाबाद के प्रसिद्ध मेले:-

1) दशहरा मेला – फतेहाबाद (विजयदशमी पर)

सिरसा जिले के मेले:-

1) रामदेवजी का मेला – सिरसा जिले के गिरीसानी व कागदाना नामक स्थानों पर माघ महीने में शुक्ल पक्ष दशमी को भरता है।

2) बाबा भूमणशाह का मेला – मल्लेवाला, मंगाला, मौजादीन, गीदड़ावली गाँव में संक्रांति के दिन।

3) बाबा सरसाई नाथ का मेला – चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की एकम को

4) तीजों का मेला – श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की तीज को

5) गणगौर का मेला – चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीय से पंचमी तक

जींद जिले के प्रसिद्ध मेले:-

1) सच्चा सौदा मेला – सिंहपुरा क्षेत्र, सफीदों, जींद में गुरु तेग बहादुर की स्मृति में आयोजित किया जाता है।

2) बाबा भालू नाथ मेला – जींद के खोरक रामजी नामक स्थान पर होली के दिन भरता है।

3) नागदेव का मेला – भाद्रपद की पंचमी को जींद के घोघड़िया गाँव में

4) हट्टकेश्वर का मेला – जींद के हॉट गाँव में महर्षि दधीचि की स्मृति में।

5) बिलसर का मेला – यह मेला हसैण्डर नामक स्थान पर सोमवती अमावस्या के दिन आयोजित किया जाता है।

6) धमतान साहिब का मेला – यह मेला धमतान साहिब गुरुद्वारे में प्रत्येक महीने की अमावस्या को लगता है। यह मेला हिन्दू-सिख एकता का प्रतीक है।

7) रामरायगढ़ का मेला – जींद जिले के रामरायगढ़ स्थान पर वैशाख व कार्तिक की पूर्णमासी को आयोजित किया जाता है। यह मेला भगवान परशुराम की स्मृति में आयोजित किया जाता है।

अम्बाला जिले के प्रसिद्ध मेले:-

1) तीज का मेला – पांजौखड़ा, अम्बाला (श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया)

नोट: राज्य में तीज त्योहार पर भाइयों द्वारा बहनों को कोथली नामक उपहार दिया जाता है।

2) शारदा देवी का मेला – त्रिलोकपुरी, अम्बाला (चैत्र महीने में आयोजित)

3) वामन द्वादशी का मेला – चैत्र व भाद्रपद महीने की द्वादशी के दिन

4) गोगा (गुग्गा) नवमी का मेला – केसरी नामक स्थान पर (भाद्रपद महीने में)

5) चौदस उत्सव मेला – अम्बाला

पंचकुला जिले के मेले:-

1) काली माई का मेला – पंचकुला जिले के कालका नामक स्थान पर चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को। इसके अलावा चैत्र व आश्विन महीनों के नवरात्रों में यहाँ लाखों की भीड़ होती है।

2) जटायु यात्रा मेला – हरियाणा सरकार द्वारा प्रतिवर्ष मनसा देवी मंदिर में आयोजित करवाया जाता है।

3) बाग-बगीचों का विरासत महोत्सव/मेला – वर्ष 2006 से पिंजौर, पंचकुला में आयोजित

4) हेरिटेज मेला – पंचकुला

5) आम मेला – पिंजौर, पंचकुला (हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा 1992 से आयोजित)

यमुनानगर के प्रसिद्ध मेले:-

1) कपाल मोचन मेला – बिलासपुर, यमुनानगर में कार्तिक पूर्णिमा को। राज्य में साम्प्रदायिक सद्भाव (हिन्दू, मुस्लिम व सिखों का सबसे बड़ा मेला)।

2) पंचमुखी का मेला – छछरौली, यमुनानगर में

कुरुक्षेत्र जिले के प्रमुख मेले:-

1) सूर्यग्रहण मेला – ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र, सूर्यग्रहण पर लगने

सूर्यग्रहण मेला – राज्य का सबसे बड़ा मेला है। जो पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

2) पेहोवा का मेला – सोमवती अमावस्या को पेहोवा, कुरुक्षेत्र में लगता है।

3) महावीर जयंती मेला – लाडवा, कुरुक्षेत्र (मार्च महीने से आयोजित)

4) बैसाखी मेला – 13 अप्रैल, कुरुक्षेत्र

5) सरस मेला – कुरुक्षेत्र, गीता जयंती महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर भरता है।

6) मारकण्डा मेला – शाहाबाद, कुरुक्षेत्र, महर्षि मार्कण्डेश्वर की स्मृति में आयोजित।

रोहतक के प्रमुख मेले:-

1) बाबा मस्तनाथ का मेला – अस्थल बोहर, रोहतक में फरवरी व मार्च के महीने में आयोजित।

नोट: अस्थल बोहर नाथ सम्प्रदाय (दर्शनी) कनपटी साधुओं का राज्य में सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है।

2) होला/मोहल्ला मेला/महोत्सव – रोहतक के लाखन माजरा में गुरु तेग बहादुर की याद में भरता है।

3) बाबा जम्मनदास का मेला – भालोटे, रोहतक में चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को किया जाता है।

4) शिवरात्रि का मेला – किलोई, रोहतक में फाल्गुन व श्रावण के महीने में आयोजित किया जाता है।

झज्जर जिले के प्रमुख मेले:-

1) भीमेश्वरी देवी का मेला – बेरी, नामक स्थान पर झज्जर में नवरात्रों पर आयोजित किया जाता है। यह मंदिर महाभारत के समय का है।

2) घोड़ों का मेला – बेरी, झज्जर (राज्य के इस मेले में बड़ी संख्या में महंगे घोड़ों की खरीद-फरोख्त की जाती है।)

3) श्यामजी का मेला – दुबलधन माजरा, बेरी, झज्जर में फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी को।

4) होली का मेला – होली दहन के अगले दिन दुल्हेड़ा गाँव, झज्जर में भरता है।

सोनीपत के प्रमुख मेले:-

1) गुरुनानक देव का प्रसिद्ध मेला – अकबरपुर बरोटा, सोनीपत में भरता है।

2) डेरा नानाबलकनाथ का मेला – रभड़ा नामक स्थान, सोनीपत में फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी को लगता है।

3) संतकुंभा का मेला – खेड़ी गुजर, सोनीपत में फाल्गुन पूर्णमासी को आयोजित होता है।

4) बाबा शुमकशाह मेला – खुबड़ नामक स्थान, सोनीपत में फाल्गुन पूर्णमासी को आयोजित होता है।

भिवानी जिले के प्रमुख मेले:-

1) बाबा खेड़े वाले का मेला – रक्षाबंधन पर भिवानी जिले के नौरंगाबाद गाँव में भरता है।

2) नागा बाबा का मेला – यह मेला नवा राजगढ़ गाँव में भरता है, इसमें नागा बाबा की पूजा की जाती है।

3) सती का मेला – खरक कलां गाँव में, दादी जगदे सती की स्मृति में आयोजित किया जाता है।

4) पहाड़ी माता का मेला – पहाड़ी गाँव, भिवानी में

5) दादा भौमिया का मेला – आठ गाँवों से सम्बन्धित पातवान गाँव, भिवानी में आयोजित किया जाता है।

6) देवसर पहाड़ी माता का मेला – देवसर गाँव, भिवानी में।

7) मूंगीपा का मेला – रिवासा में कार्तिक महीने की शुक्ल चतुर्दशी को।

चरखी दादरी जिले के प्रमुख मेले:-

1) इमलोटा का मेला – चरखी दादरी में भगवान हनुमान की स्मृति में लगने वाला राज्य का सबसे बड़ा मेला है।

2) जन्माष्टमी का मेला – चरखी दादरी

3) रक्षाबंधन का मेला – चरखी दादरी

मेले से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

सूर्यग्रहण मेला – राज्य का सबसे बड़ा मेला है, जो पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

पेहोवा का मेला – सोमवती अमावस्या को पेहोवा, कुरुक्षेत्र में लगता है।

महावीर जयंती मेला – लाडवा, कुरुक्षेत्र में मार्च महीने से आयोजित।

बैसाखी मेला – 13 अप्रैल, कुरुक्षेत्र।

सरस मेला – कुरुक्षेत्र, गीता जयंती महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर भरता है।

मारकण्डा मेला – शाहाबाद, कुरुक्षेत्र, महर्षि मार्कण्डेश्वर की स्मृति में आयोजित।

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