हरियाणा के भूगोल को मुख्यतया कितने भागों में बांटा गया है – 3 (1. कुरुक्षेत्र, 2. हरियाणा, 3. भटियाना)
भौगोलिक संरचना/मृदा व पर्वत
हरियाणा राज्य को भौगोलिक रूप से कितने उपक्षेत्रों में बांटा गया है – 8 (1. शिवालिक, 2. गिरिपाद मैदान, 3. अरावली क्षेत्र, 4. बाढ़ का मैदान, 5. रेगिस्तान भाग (बालू के टिब्बे), 6. जलोढ़ मैदान, 7. तरंगित बालू, 8. दलदली भूमि।)
हरियाणा के सर्वाधिक भाग पर किस प्रकार की मृदा पाई जाती है – बलुई दोमट मृदा (कछारी मृदा)
लाल मृदा राज्य में सर्वाधिक पाई जाती है – सिरसा व महेंद्रगढ़
बलुई दोमट मृदा को राज्य में और किस नाम से जाना जाता है – रोसली
राज्य के किस जिले में लाल चेस्टनट मिट्टी पाई जाती है – यमुनानगर
राज्य में किस मृदा को उदासीन-प्रतिक्रियाओं वाली मृदा के नाम से जाना जाता है – लाल चेस्टनट मृदा
राज्य की कितने % मृदा लवणता व क्षारीयता से ग्रस्त है – 32%
राज्य में लवणता तथा क्षारीयता से ग्रस्त मृदा को किन-किन स्थानीय नामों से जाना जाता है – रेह व कल्लर
राज्य में ‘रेती हुई मृत्यु व निर्दयी शत्रु’ कहा जाता है – मृदा अपरदन
राकड़ बरा, बरी, लोनी व सेम कहलाती हैं – लवणीय मृदा को
राज्य में तरंगित बालू मैदान पाये जाते हैं – महेंद्रगढ़-रेवाड़ी-गुरुग्राम
राज्य में बाढ़ से बनने वाली नवीन मिट्टी कहलाती है – खादर
राज्य के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली मृदा कहलाती है – बांगर सिल्ट युक्त मृदा
राज्य में बाढ़ के मैदान कहलाते हैं – नैली व बेट
राज्य का सर्वाधिक उपजाऊ मृदा है – गिरिपादीय मृदा
राज्य में गिरिपादीय मृदा का स्थानीय नाम है – घर व कच्ची
राज्य में गिरिपादीय मृदा का विस्तार है – 25 किमी चौड़ी पट्टी
राज्य के किन-किन जिलों में गिरिपादीय मृदा की 25 कि.मी. चौड़ी पट्टी पाई जाती है – यमुनानगर, अम्बाला, पंचकुला
डॉ. जसबीर सिंह ने राज्य की मृदा को कितने वर्गों में वर्गीकृत किया है – छः (6)
राज्य में लाल चेस्टनट (मिट्टी) उदासीन प्रतिक्रियाओं वाली मिट्टी में किन-किन तत्वों की कमी होती है – नाइट्रोजन व फास्फोरस
गिरिपादीय मृदा को कालका व नारायणगढ़ में किस नाम से जाना जाता है – घर
राज्य में गिरिपादीय मृदा को जगाधरी तहसील में किस नाम से जाना जाता है – कच्ची
राज्य के थानेसर तथा फतेहाबाद के घग्घर क्षेत्र में किस प्रकार की मृदा पाई जाती है – सोलर कठोर चीका मृदा
राज्य में मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए किस खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है – ढैंचा मूंग
राज्य का कितना हेक्टेयर क्षेत्र जल अपरदन से प्रभावित है – 2.76 लाख हेक्टेयर
राज्य का कितना हेक्टेयर क्षेत्र वायु अपरदन से प्रभावित है – 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र
राज्य में कौन-सी मृदा को ‘डाकर’ भी कहते हैं – भारी मृदा
किस काल में राज्य की भू-गर्भित संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए – मेसोजोइक काल
किस भू-गर्भित काल में हरियाणा राज्य में नदी, नाले, पहाड़ आदि का सुचारू रूप से निर्माण हुआ – केनोजोइक काल
हरियाणा में बालू के टीलों की सामान्य ऊँचाई है – 3 से 6 मीटर
हरियाणा में बालू के टीलों की सर्वाधिक ऊँचाई है – 15 मीटर
हरियाणा में बालू के टीलों के मध्य भाग में जल भरने के कारण अस्थायी छिछली झीलें बन जाती हैं जिन्हें आम भाषा में
राज्य का सबसे नीचा कम ऊंचाई वाला भू-भाग है – अनकाई ददलदल (सिरसा), समुद्र तल से मात्र 200 मीटर ऊंचा
राज्य में घग्घर नदी द्वारा निर्मित बाढ़ का मैदान कहलाता है – नैली
राज्य का सबसे ऊंचा स्थान है – करोह (1514 मीटर ऊंचा शिवालिक पर्वतमाला का)
राज्य में अरावली पर्वत माला का सबसे ऊंचा स्थान है – कुलताजपुर 652 मीटर (नारनौल)
राज्य का कितना % भाग समतल व तरंगित मैदान है – 93.76%
राज्य के कितने % भाग पर शिवालिक पर्वतमाला स्थित है – 1.67%
अरावली पर्वत माला का प्रवेश द्वार कहाँ जाता है – गुरुग्राम
अरावली पर्वत माला का सर्वाधिक विस्तार व क्षेत्रफल राज्य के किस जिले में है – गुरुग्राम
राज्य में अरावली की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार पाया जाता है – 3.09%
अरावली पर्वत भाग की समुद्रतल से औसत ऊंचाई – 300 मी.
अरावली पहाड़ियों के दक्षिणी भाग का स्थानीय नाम – मेवात की पहाड़ियां
शिवालिक पर्वत श्रेणियां राज्य के किन-किन जिलों में स्थित हैं – पंचकूला, अम्बाला व यमुनानगर
शिवालिक पर्वत भाग की समुद्रतल से औसत ऊंचाई – 300-400 मी.
शिवालिक की पहाड़ियों से आने वाली नदियां और नालों से मैदान में कहीं-कहीं गहरे गड्ढे बन जाते हैं जिसे पहाड़ी भाषा में कहते हैं – चौ
कौन सी पहाड़ियां हिमालय के मैदान के बीच योजक कड़ी बनाती हैं – मोरनी पहाड़ियां
राज्य के किस भाग को समुद्र स्पर्श करता था – दक्षिणी भाग
घग्घर-यमुना के दोआब मैदान में बहने वाली नदियां – मारकण्डा, सरस्वती, चैतांग
राज्य में भारी मृदा कहलाती है – खादर
राज्य में हल्की मृदा कहलाती है – रोशली
राज्य में डाक मृदा का प्रमुख क्षेत्र – थानेसर, फतेहाबाद व जगाधरी
राज्य के किस जिले में सर्वाधिक कछारी मृदा पाई जाती है – भिवानी
शिवालिक पर्वत माला पर स्थित पर्यटक स्थल – मोरनी हिल्स
अरावली पर्वत माला पर स्थित पर्यटक स्थल – दौसी
राज्य में अरावली पर्वत माला का विस्तार किन-किन जिलों में है – फरीदाबाद, नूंह, गुरुग्राम, रेवाड़ी, भिवानी, च. दादरी व महेंद्रगढ़ (कुल सात जिलों में)
राज्य के किस भाग में जलोढ़ पंख पाये जाते हैं – गिरिपादिय मैदान के 7 जिलों में
राज्य में लवणीय भूमि से ग्रसित क्षेत्र – रोहतक (61.47%), झज्जर (40.77%), सोनीपत (32.95%), भिवानी (13.19%)
राज्य में कपूरी पहाड़ियां स्थित हैं – दादरी
राज्य के किस जिले में (घग्घर+यमुना) से निर्मित एल्यूवियल मिट्टी पाई जाती है – जींद
राज्य में महाभारत की युद्ध भूमि है – 48 कोस
राज्य में बाढ़ के कारण मृदा अपरदन को रोकने के लिए 1947 में किस झील का निर्माण किया गया था – बड़खल झील (फरीदाबाद)
राज्य में किस पर्वतीय क्षेत्र की निगरानी ड्रोन से करवाई जायेगी – अरावली पर्वतीय क्षेत्र
राज्य में सेमग्रस्त व लवणीय भूमि के उपचार के लिए ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट किस वर्ष प्रारम्भ किया गया था – 1994
हरियाणा के मैदानी भाग की समुद्र तल से औसत ऊंचाई है – 700-900 फुट
राज्य के किस जिले में जलोढ़ मैदान नहीं है – पंचकूला