हरियाणा में यौधेय (Youdheya)- Haryana History - GK247

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हरियाणा में यौधेय (Youdheyas in Haryana.)

गणतंत्र शासन प्रणाली की स्थापना

  • मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद हरियाणा प्रदेश में गणतंत्र शासन प्रणाली की स्थापना हुई। गणतंत्रात्मक शासन स्थापित करने वाली शक्तियों में यौधेयों का प्रमुख स्थान है।
  • महाभारत अष्टाध्यायी तथा अर्थशास्त्र से ज्ञात होता है कि यौधेयों की शासन प्रणाली गणतंत्रात्मक थी। यौधेयो के भरतपुर अभिलेख से भी ज्ञात होता है कि ये लोग अपने शासक का चुनाव करते थे।इसमें महाराजा, महा-सेनापति आदि उपाधियों का भी उल्लेख है।
  • अग्रोहा से प्राप्त लेख के अनुसार यौघेयों की शासन प्रणाली गणतंत्रात्मक थी जिसका कार्य विभिन्‍न प्रशासनिक अधिकारी चलाते थे। यौधेयों के सिक्कों पर गण शब्द का पाया जाना भी इस बात का प्रमाण है।

यौधेय कौन थे?

  • इस संबंध में विद्वानों में मतभेद है। अधिकतर विद्वान मानते हैं कि यौधेय शब्द की उत्पति योद्धा से हुई है। जिसका अर्थ वीर अथवा लड़ाकू जाति से है।
  • महाभारत में यौधेयों का संबंध युधिष्ठर से बताया गया है।
  • पाणिनी ने अपनी पुस्तक अष्टाध्यायी में इस गण के लिए ‘आयुधजीवी’ शब्द का प्रयोग किया है। जिसका अर्थ है शस्त्रों पर निर्वाह करने वाले लोग।
  • शक शाशक ‘रुद्रदमन’ के जुनागढ़ अभिलेख 1505 ई० से पता चलता है कि उस समय में यौधेय गण की गणना प्रमुख वीर क्षेत्रियों में की जाती थी।

इन साहित्यिक व अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि यौधेय लोग मूल रूप से लड़ाकू थे इसलिए इन्हें यौधेय कहा गया।

यौधेय गणराज्य विस्तार

यौधेय इस क्षेत्र (हरियाणा-पंजाब) में काफी लंबे समय तक राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। इस बात का प्रमाण हमें यौधेयों के सिक्कों से मिलता है।

  • यौधेयों के प्रारंभिक सिक्के तीसरी व दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं जबकि अंतिम काल के सिक्के तीसरी व चौथी शताब्दी के हैं। ये सिक्के काफी विस्तृत क्षेत्र में मिलते है। इसलिए हम कह सकते हैं कि यौधेय गण का राज्य काफी विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ था। यद्यपि इनके राज्य की सीमाएं समय-समय पर घटती बढ़ती रही हैं परंतु मुख्य रूप से इनका राज्य उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित था।
  • डी० सी० सरकार के मतानुसार यौघेय राज्य सतलुज नदी के किनारे स्थित बहावलपुर और भरतपुर के बयाना प्रदेश सम्मलित थे। डी० सी० सरकार के अनुसार ये लोग महाभारत में उल्लिखित रोहतक क्षेत्र में भी रहे।
  • ए० एस० अल्तेकर के अनुसार रोहतक यौधेयों की राजधानी थी।
  • अल्तेकर महोदय का मानना है कि यौधेयों का क्षेत्र दो भागों में विभकत था- मत्स्य क्षेत्र यानी ऊपरी राजपूताना तथा पांचाल क्षेत्र अर्थात बहुधान्य क्षेत्र। इनके सिक्कों पर भी यौघेनाम्‌ बहुधान्यक लिखा हुआ है।
  • कुछ विद्वानों ने इनका साम्राज्य विस्तार सतलुज व यमुना नदियों के बीच में बताया है।
  • यौधेय गण के सिक्के मुख्यतः कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, सुनेत (पंजाब), रोहतक, सोनीपत, नौरंगाबाद, भिवानी, सिरसा, हासी, हिसार असन्ध जयजयवन्ती, रिवाड़ी (हरियाणा), देहरादून, चक्रोता, सहारनपुर, गढ़वाल क्षेत्र और अजमेर, राजस्थान से मिले हैं।

इस प्रकार साहित्यिक प्रमाणों और सिक्कों की प्राप्ति के आधार पर हम कह सकते हैं कि यौधेयों का राज्य सतलुज एवं यमुना नदी के दोनों किनारों पश्चिमी पाकिस्तान, लाहौर तथा बहावलपुर के आसपास पंजाब, दक्षिणी हिमाचल प्रदेश, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा तथा उत्तर-दक्षिणी राजस्थान के क्षेत्र में फैला हुआ था।

यौधेय-साम्राज्य के साक्ष्य

  • यौधेयों का जिक्र महाभारत, पाणिनी के अष्टाध्यायी, रुद्रदामन के शिलालेख, समुद्रगुप्त के इलाहाबाद स्तंभलेख तथा बौद्ध ग्रंथों सभी में मिलता है।
  • मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात उत्तर-पश्चिम से जो आक्रमणकारी आए उनमें कुषाण प्रमुख थे। यौघेयों ने कुषाणों का मुकाबला किया लेकिन वे पराजित हुए। इस बात की पुष्टि कुषाणों के सिक्कों की इस क्षेत्र में पाए जाने से हुई है।
  • यौधेयों के कुछ सिक्कों पर “यौधेय गणस्य जय“ लेख के साथ ‘द्विवार्ग’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इनसे ए० एस० अल्तेकर ने यह अनुमान लगाया है कि यौधेयों ने कुषाणों के विरुद्ध एक संघ बनाया। जिसमें कुणीन्द व अर्जुनायन नामक पड़ोसी गणों को सम्मलित करके कुषाणों को पराजित किया।
  • यौधेयों द्वारा कुषाणों की पराजय का प्रमाण उन सिक्कों की प्राप्ति से होता है जिनको कुषाण शासकों- वासुदेव व हुविष्क ने चलाया लेकिन यौधेयों द्वारा कुषाण शासक को पराजित कर देने के पश्चात यौधेयों ने इन सिक्कों पर अपना ठप्पा लगाकर पुनः प्रसारित कर दिया। इस प्रकार के सिक्के हरियाणा के सोनीपत, आवलीं, लोवा माजरा, खरखोदा बालन्द (जिला- रोहतक), हांसी (जिला- हिसार), सिरसा तथा अन्य स्थानों से मिले हैं। ये सभी इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि यौधेयों ने कुषाणों को इस प्रदेश से खदेड़ कर अपना राज्य पुनः स्थापित किया।

यौधेयों का पतन

  • यौधेयों का पतन कैसे हुआ इस बात के हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। महाक्षत्रय रुद्रदमन प्रथम ने यौधेयों को हराया था इस बात का उल्लेख उसके जूनागढ़ शिलालेख से मिलता है।
  • समुंद्र गुप्त के इलाहाबाद अभिलेख में हमें जानकारी मिलती है कि समुद्रगुप्त ने यौधेयों को पराजित किया। इस प्रकार वे अपना स्वतंत्र अस्तित्व खो बैठे तथा उनके राज्य का गुप्त साम्राज्य में विलय हो गया।

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