हरियाणा में राष्ट्रीय आंदोलनों का प्रभाव-National Movements in Haryana
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हरियाणा में ऐतिहासिक राष्ट्रीय आंदोलनों का प्रभाव
समाज सुधारक आन्दोलनों का हरियाणा में प्रभाव
- 1880 में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हरियाणा की सबसे पहली “गौशाला”- रेवाड़ी में खोली।
- आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 को स्वामी दयानन्द जी ने मुंबई में की थी, जिसकी एक शाखा (हरियाणा में पहली) रेवाड़ी में 1880 में खुली लेकिन कट्टर हिन्दुओ ने इसका विरोध किया।
- आर्य समाज के विरोध-स्वरूप सन् 1886 में हरियाणा के झज्जर जिले में सनातन धर्म की शाखा खोली गयी। इस दौर में सनातन धर्म के प्रचारकके रूप में- दीन दयाल शर्मा (झज्जर जिले से) कार्यरत थे।
- आर्य समाज की प्रगति अधिक हुई और 1886 में हरियाणा के हिसार में लाला लाजपतराय जी की अध्यक्षता में आर्य समाज की एक और शाखा खोली गयी।
- स्वामी श्रद्धानन्द ने फरमाणा आर्यसमाज की स्थापना 1905 में तथाखटकड़ आर्यसमाज की स्थापना 1907 में की थी।
- सन् 1883 में, लाला लाजपतराय के पिता “लाला लालकृष्ण” का रोहतक तबादला हुआ इसी दौरान इन्होने रोहतक में आर्यसमाज की स्थापना की।
मुस्लिम संगठन सुधारक आन्दोलन
- हरियाणा में प्रथम मुस्लिम संगठन “अंजुमन-ए–अशहर” था।
- NMA (National Mohmdan Association) की स्थापना कलकत्ता में ‘अमीर अली’ ने की थी, जिसकी शाखाऍ 1886 में अंबाला में और 1888 में हिसार में खोली गई।
‘मार्ले-मिन्टो सुधार-1909’ का हरियाणा में प्रभाव
- केन्द्रीय विधानसभा के सदस्यों के रूप में, इस सुधार-कमेटी में हिसार के “जवाहर लाल भार्गव” और करनाल के “मौलवी अब्दुल धत्री” को सदस्यता मिली।
- इस सुधार के एक प्रावधान- मुस्लिम समुदाय को पृथक निर्वाचन अधिकार के विरोध में रेवाड़ी से बाल मुकुंद गुप्त ने “शिव-शम्भू का चिटठा” नामक लेख लिखा।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हरियाणा
कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष ‘ऐनी बेसेंट’ और ‘बाल गंगाधर तिलक’ द्वारा बनाई गयी होमरूल लीग (1916) की हरियाणा-शाखा के अध्यक्ष “प० नेकीराम शर्मा” थे।
‘रौलेट एक्ट व जलियावाला बाग हत्याकांड-1919’ का प्रभाव
- आर्य समाज के लोकप्रिय नेता स्वामी श्रद्धानन्द ने रौलेट एक्ट (कानून बिना दलील-बिना अपील) की घोर निंदा की और गाँधी जी को पंजाब आने का निमंत्रण दिया परन्तु 10 अप्रैल 1919 को वे पलवल से गिरफ्तार हो गये, जो उनकी पुरे भारत में पहली गिरफ्तारी थी। इनकी गिरफ्तारी के 3 दिन बाद ही 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला-बाग हत्याकांड हुआ।
- जलियांवाला-बाग हत्याकांड के विरोध में हरियाणा के लाला मुरलीधर ने “सर” व “राय बहादुर” की उपाधियां त्याग दी।
असहयोग आंदोलन’ का हरियाणा में प्रभाव
- इस आंदोलन के दौरान रोहतक-सभा के अध्य्क्ष “लाला श्याम लाल” थे।
- वर्ष 1920 में महात्मा गांधी पहली बार भिवानी आए थे। उस समय उनको 31 तोपों से सलामी दी गई। वर्ष 1921 में वे दूसरी बार भिवानी आए थे।
- ‘पं०मदन मोहन मालवीय’ और ‘मोहम्मद अली’ अक्टूबर-1921 में हरियाणा आए।
- 15-16 फरवरी को गाँधी जी ने भिवानी में कांग्रेस की सभा- ‘हरियाणा रूरल कान्फ्रेंस’ को संबोधित किया और रोहतक में आकर “वैश्य उच्च विधालय” की नीव रखी।
- इस दौरान (1923 -24 में) छोटूराम ने ‘जमींदारी लीग’ बनाई।
नोट: असहयोग आंदोलन में चौ० छोटूराम ने भाग नहीं लिया क्योंकि वे इसके विरोध में थे।
साइमन कमीशन के दौरान हरियाणा
- झज्जर की नगरपालिका ने साइमन को वापस जाने के लिए प्रस्ताव पारित किये।
- 30 जनवरी 1928 को साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपतराय जी लाठियाँ लगने के कारण घायल हो गये थे और कुछ दिनों बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके विरोध में वैध लेखराम शर्मा ने क्रन्तिकारी यशपाल के साथ मिलकर रोहतक में बम्ब बनाकर लार्ड इरविन की गाड़ी पर फेंका परन्तु वे बच गए।
- इसी दौरान “अर्जुन लाल सेट्ठी” ने रोहतक में ‘मजदूर सम्मेलन’ रखा जिसमे पं० जवाहर लाल नेहरू भी शामिल हुए।
दाड़ी यात्रा व सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हरियाणा
- 12 मार्च 1930 को गाँधी जी द्वारा दांडी-यात्रा की गई। इस यात्रा के 78 प्रतिभागियों में से एक अंबाला के लाला सूरजभान भी थे।
- 1930 में हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन में लाला दुलीचंद की बेटियाँ- यशोदा, विद्यावती और जमुना ने भाग लिया।
- इसी दौरान हरियाणा के लोगो ने “कर मत दो” अभियान चलाया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रांतीय सरकारें
- 1935 के Govt. of India act के तहत 1937 में चुनाव हुए परन्तु 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन प्रांतीय सरकारों ने इस्तीफा दिया।
- पंजाब में Unionist पार्टी की सरकार बनी जिसकी स्थापना फजली अली, सर छोटूराम और सिकंदर ह्यात खानिन द्वारा 1923 में की गई थी।
- द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारत की मुख्तः सभी पार्टियों ने इस्तीफा दे दिया था परन्तु मुस्लिम लीग, युनिनिस्ट पार्टी और मद्रास जस्टिस पार्टी ने इस्तीफा नहीं दिया।
देशी रियासतों के आंदोलनों का हरियाणा पर प्रभाव
- पंजाब (हरियाणा) की तरफ से चौ० टीकाराम संसदीय सचिव बने।
- रियासत आंदोलन के दौरान लोहारू रियासत के “अमीनूद्दीन अहमद” ने सिहाणी गाँव में भीड़ पर अँधाधुंध गोलियां चलवा दी थी, जिसे “सियासी हत्याकांड” भी कहते है
- पटौदी रियासत में आंदोलनकारियों के नेता- ‘गौरी शंकर वैध’ थे जबकि जींद रियासत का नेतृत्व- ‘हीरा सिंह चिमरिया’ ने किया।
आजाद हिन्द फौज में हरियाणा
- आजाद हिन्द फौज के 60,000 सैनिकों में से 2715 सैनिक हरियाणा से थे जिनमें से 34 सैनिक शहीद हो गये थे।
1946 का चुनाव के दौरान हरियाणा
- 1946 के चुनाव के दौरान पंजाब (हरियाणा) में Unionist पार्टी कमजोर हो गई थी जिसके कारण इसे कुल 20 सीटें मिली।
- कांग्रेस ने अकाली दल से मिलकर सरकार बनाई। कांग्रेस के नेता “लहरी सिंह” और मुस्लिम लीग के नेता “लियाकत अली खां” थे।
अन्य धार्मिक सभाएँ और उनका प्रभाव
- सन् 1880 में, सिक्खों द्वारा ‘सिक्ख सभा’ की स्थापना की गयी। उस समय हरियाणा-पंजाब एक ही राज्य था।
- कांग्रेस का पहला सम्मेलन 1885 में बॉम्बे (मुंबई) में हुआ, जिसमें पंजाब (हरियाणा) प्रान्त के 72 अनुयायियों में से एकमात्र “लाला मुरलीधर” सम्मलित होने गए।
- लाला मुरलीधर को “Great Old Man of Punjab” के नाम से भी जाना जाता है।
कुछ अन्य प्रमुख आंदोलनों के दौरान हरियाणा
- मोठ आंदोलन: 1940 में यह आंदोलन ‘भक्त फूल सिंह’ ने शुरू किया। ये अकेले ही सारा आंदोलन करते रहे जिसके कारण इन्हे “एक बाटु रेजीमेण्ट” भी कहा गया।
- समालखा आंदोलन: पहले विश्व युद्ध के दौरान फौजियों को मांस प्रदान के विरोध में समालखा (पानीपत) में विद्रोह हुआ जिसका नेतृत्व “फूलसिंह” ने किया।
- दीनदयाल शर्मा ने उर्दू में “मधुरा” अख़बार निकाला।
- विसंभर दयाल शर्मा ने झज्जर से “भारत प्रताप” नामक उर्दू समाचार पत्र निकाला।
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