अंबाला
Ambala Districtइतिहास, भूगोल, संस्कृति, प्रशासन और महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य।
Notes पढ़ें →District wise Description of Haryana State – District Charkhi Dadri
आज की हमारी यह पोस्ट हरियाणा जी.के से सम्बन्धित है। इस पोस्ट में हम आपको हरियाणा के चरखी दादरी जिले से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएंगे। यह सामग्री ग्राम सचिव, पटवारी, कैनाल पटवारी, हरियाणा पुलिस, क्लर्क, हरियाणा ग्रुप D, CET, HSSC, HPSC तथा अन्य हरियाणा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार चरखी दादरी नगर की स्थापना राजा बिलहान सिंह द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है।
एक मत के अनुसार नगर के नाम की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द “दादुर” से मानी जाती है, जिसका अर्थ मेंढक है। स्थानीय परंपरा के अनुसार यहाँ पहले एक झील थी, जिसमें बड़ी संख्या में मेंढक पाए जाते थे। कालांतर में दादुर से दादरी नाम विकसित हुआ।
उपलब्ध स्थानीय विवरणों में सेठ रामकृष्ण डालमिया तथा दादरी के नाम परिवर्तन से संबंधित कथाएँ मिलती हैं। इन विवरणों को परीक्षा में लिखते समय आधिकारिक/प्रमाणित स्रोत से सत्यापित करना उचित है।
स्थानीय इतिहास में सांसद रामकृष्ण गुप्ता द्वारा दादरी के नाम को लेकर संसद में मुद्दा उठाने का उल्लेख मिलता है।
चरखी दादरी के निकट स्थित प्रसिद्ध स्थल। यहाँ शिव मंदिर एवं आश्रम का उल्लेख मिलता है।
क्षेत्र में उल्लेखित एक आधुनिक पर्यटक स्थल।
इमलोटा में हनुमान मंदिर स्थित है। फाल्गुन मास की दशमी के अवसर पर यहाँ मेले के आयोजन का उल्लेख मिलता है।
दादरी शहर के आसपास अनेक साधु-संतों से जुड़े धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल पाए जाते हैं।
दादरी से लगभग 3 किलोमीटर दूर कपूर पहाड़ी पर बाबा मुखराम नाथ एवं अन्य संतों की समाधियों का उल्लेख मिलता है।
कलियाणा गाँव में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के रूप में इसका उल्लेख मिलता है।
चरखी दादरी क्षेत्र में स्थित प्रमुख स्थानीय धार्मिक स्थल।
दादरी क्षेत्र का उल्लेखनीय धार्मिक स्थल।
2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता एवं फोगाट परिवार की प्रमुख महिला पहलवान।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की भारतीय महिला पहलवान एवं फोगाट परिवार की प्रमुख खिलाड़ी।
फोगाट परिवार से संबंधित महिला पहलवान।
भारतीय पहलवान एवं मिश्रित मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी।
भारतीय कुश्ती की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल।
फोगाट परिवार से संबंधित भारतीय महिला पहलवान।
फोगाट परिवार के प्रमुख कुश्ती प्रशिक्षक। गीता, बबीता, रितु एवं संगीता के प्रशिक्षण से जुड़े रहे।
हरियाणा की प्रमुख महिला राजनीतिक हस्तियों में से एक।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्व।
प्रसिद्ध पर्वतारोही के रूप में स्थानीय स्रोतों में उल्लेखित।
प्रसिद्ध व्यक्तित्वों की जन्म-भूमि, निवास, कर्मभूमि तथा वर्तमान पद जैसी जानकारी को परीक्षा में उपयोग करने से पहले आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करना उचित है।
1857 के विद्रोह के दौरान दादरी क्षेत्र का संबंध जींद के राजा से जुड़ा रहा।
चरखी दादरी को भिवानी से अलग करके हरियाणा का 22वाँ जिला बनाया गया।
कलियाणा गाँव से संबंधित स्थानीय भौगोलिक/भूवैज्ञानिक तथ्य परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।
चरखी दादरी का क्षेत्र कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
चरखी दादरी विमान दुर्घटना 12 नवंबर 1996 को हुई थी।
1996 की विमान दुर्घटना में सऊदी अरब एवं कजाखिस्तान से संबंधित विमानों की टक्कर हुई थी।
स्थानीय स्रोतों में हरियाणा पर्यावरण समिति के गठन का उल्लेख मिलता है।
चरखी दादरी क्षेत्र स्थानीय व्यापार एवं ग्रामीण बाजारों के लिए जाना जाता है।
राम किशन गुप्ता द्वारा एजुकेशनल सोसाइटी स्थापित किए जाने का उल्लेख स्थानीय सामग्री में मिलता है।
फोगाट परिवार की कुश्ती उपलब्धियों ने चरखी दादरी क्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल पहचान दिलाई।
चरखी दादरी जिले का बलाली गाँव भारतीय महिला कुश्ती के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। फोगाट परिवार की कई महिला पहलवानों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
फोगाट परिवार की कहानी पर आधारित प्रसिद्ध हिंदी फिल्म “दंगल” ने इस क्षेत्र की कुश्ती परंपरा को व्यापक राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
12 नवंबर 1996 को चरखी दादरी के निकट सऊदी अरब और कजाखिस्तान से संबंधित दो विमानों की हवा में टक्कर हुई थी।
22वाँ जिला → भिवानी से अलग → चरखी दादरी → बलाली → फोगाट परिवार → 1857 → 12 नवंबर 1996 विमान दुर्घटना
आपके दिए गए स्रोत में कुछ तिथियाँ एवं प्रशासनिक आँकड़े वर्तमान आधिकारिक अभिलेखों से अलग हो सकते हैं। विशेष रूप से जिला गठन की तिथि, तहसील/गाँवों की संख्या, लोकसभा-विधानसभा क्षेत्र तथा जनसंख्या संबंधी आँकड़ों को नवीनतम आधिकारिक जिला प्रशासन एवं निर्वाचन/जनगणना स्रोतों से मिलान करके ही अंतिम परीक्षा सामग्री में शामिल करें।
इसे एक श्रृंखला के रूप में याद करें:
जिंद रियासत → महेंद्रगढ़ → पंजाब → हरियाणा → भिवानी → चरखी दादरी
चरखी दादरी नाम दो ऐतिहासिक स्थान-नामों से बना है:
चरखी + दादरी = चरखी दादरी
दादरी नाम की व्युत्पत्ति के बारे में विभिन्न स्रोतों में स्थानीय एवं परंपरागत व्याख्याएँ मिलती हैं। “दादुर” अर्थात मेंढक से जोड़ने वाली व्युत्पत्ति भी प्रचलित है, लेकिन इसे प्रमाणित प्रशासनिक तथ्य की बजाय नामकरण-परंपरा के रूप में रखना अधिक सुरक्षित है।
इसी प्रकार चरखी के नामकरण से संबंधित स्थानीय कथाएँ उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें निश्चित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
नाम की लोककथा ≠ प्रमाणित इतिहास
इसलिए MCQ में यदि “दादरी नाम निश्चित रूप से अमुक घटना से पड़ा” जैसा दावा हो तो स्रोत देखे बिना स्वीकार न करें।
चरखी दादरी का वर्तमान जिला नया है, लेकिन इसका भौगोलिक क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से बहुत पुराना है।
पुराने भिवानी क्षेत्र के पुरातात्त्विक अध्ययनों में दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा में प्राचीन मानव बस्तियों के प्रमाण मिलते हैं। इसलिए चरखी दादरी को केवल “2016 में बना नया जिला” समझना गलत होगा।
चरखी दादरी क्षेत्र को व्यापक हरियाणा के प्राचीन कुरु क्षेत्र के संदर्भ में पढ़ा जाता है, लेकिन जिले के किसी विशेष गाँव या स्थल को महाभारत का निश्चित स्थल घोषित करने के लिए मजबूत पुरातात्त्विक प्रमाण आवश्यक है।
चरखी दादरी के लिए महाभारत से जुड़े दावों को प्रमाणित इतिहास के रूप में नहीं लिखना चाहिए, जब तक विशिष्ट पुरातात्त्विक/ऐतिहासिक स्रोत उपलब्ध न हो।
दादरी क्षेत्र विभिन्न उत्तर भारतीय राजनीतिक शक्तियों के प्रभाव क्षेत्र में रहा। बाद में इसका महत्वपूर्ण राजनीतिक संबंध जिंद रियासत से बना।
19वीं शताब्दी तक आते-आते दादरी एक महत्वपूर्ण रियासती क्षेत्र था।
ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र विशेष रूप से 1857 के विद्रोह तथा उसके बाद जिंद शासकों को दिए गए क्षेत्रीय पुरस्कारों के कारण ऐतिहासिक महत्व प्राप्त करता है।
यह चरखी दादरी GK का अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्याय है। ब्रिटिश शासनकाल में दादरी एक महत्वपूर्ण रियासती क्षेत्र था।
1857 के विद्रोह के दौरान दादरी के नवाब बहादुर जंग खान ने बहादुर शाह ज़फर के प्रति नाममात्र की निष्ठा स्वीकार की थी।
बाद में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
बहादुर जंग खान → दादरी → 1857 → Court Martial → 27 नवंबर 1857 → लाहौर
1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों की सहायता करने के कारण जिंद के राजा सरूप सिंह को दादरी क्षेत्र पुरस्कार के रूप में प्रदान किया गया।
जिंद राज्य के इतिहास के अनुसार 1857 में जिंद की सेनाओं ने ब्रिटिशों की सहायता की थी और इसके परिणामस्वरूप दादरी आदि क्षेत्र राजा सरूप सिंह को प्राप्त हुए।
1857 → जिंद की सहायता → राजा सरूप सिंह → दादरी क्षेत्र
राजा सरूप सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र राजा रघबीर सिंह जिंद की गद्दी पर बैठे। इसके बाद दादरी क्षेत्र में किसानों में असंतोष बढ़ा।
विद्रोह के प्रमुख कारणों में प्रशासनिक दबाव, कर/राजस्व संबंधी असंतोष तथा स्थानीय शोषण शामिल थे।
स्थानीय चौधरियों के साथ हकीम कासिम अली का नाम विशेष रूप से मिलता है।
पुराने आधिकारिक/गजेटियर स्रोतों में विद्रोह के दौरान चरखी, मंकावास और झोझू पर कार्रवाई का वर्णन मिलता है।
“14–16 मई 1864 = चरखी–झोझू किसान विद्रोह”
चरखी → 14 मई → झोझू → 16 मई → किसान विद्रोह
वर्ष: 1864
क्षेत्र: दादरी
प्रमुख गाँव: चरखी, मंकावास, झोझू
प्रमुख नाम: हकीम कासिम अली
महत्वपूर्ण तिथि: 14–16 मई 1864
जिंद रियासत के समाप्त होने तथा PEPSU के गठन के बाद दादरी क्षेत्र को महेंद्रगढ़ जिले में शामिल किया गया।
PEPSU का पंजाब में विलय हुआ। इसी पुनर्गठन के दौरान चरखी दादरी क्षेत्र महेंद्रगढ़ से अलग होकर भिवानी जिले में शामिल हुआ।
हरियाणा राज्य का गठन हुआ और भिवानी जिला हरियाणा राज्य का हिस्सा बना।
भिवानी जिला अस्तित्व में आया और चरखी दादरी तहसील इसका हिस्सा रही।
चरखी दादरी भिवानी से अलग होकर हरियाणा का 22वाँ जिला बना।
“जिंद → महेंद्रगढ़ → भिवानी → हरियाणा → भिवानी जिला → चरखी दादरी”
12 नवंबर 1996 को चरखी दादरी क्षेत्र के ऊपर एक भीषण मध्य-वायु विमान टक्कर हुई।
इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार सभी लोगों की मृत्यु हो गई। कुल 349 लोगों की जान गई।
12 नवंबर 1996 → चरखी दादरी → मध्य-वायु टक्कर → 349 मौतें
घटना: चरखी दादरी विमान दुर्घटना
तारीख: 12 नवंबर 1996
स्थान: चरखी दादरी क्षेत्र
मृतक: 349
मुख्य तथ्य: दो विमानों की मध्य-वायु टक्कर
चरखी दादरी हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है।
चरखी दादरी → दक्षिण-पश्चिम हरियाणा → 28.5921° N → 76.2653° E
चरखी दादरी का संपर्क मुख्यतः हरियाणा के निम्नलिखित जिलों से है:
भि–रो–झ–रे–म → भिवानी, रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़
चरखी दादरी का क्षेत्रफल → 1,370.11 वर्ग किमी
वर्तमान जिला प्रशासन वर्तमान जिला सीमा के आधार पर 2011 के पुनर्गठित (restructured) आँकड़े उपलब्ध कराता है।
| जनसांख्यिकीय तथ्य | आँकड़ा |
|---|---|
| कुल जनसंख्या | 5,02,276 |
| पुरुष | 2,65,949 |
| महिला | 2,36,327 |
| ग्रामीण जनसंख्या | 4,45,939 |
| शहरी जनसंख्या | 56,337 |
| साक्षरता | 67.04% |
2011 → स्वतंत्र चरखी दादरी जिला नहीं
2016 → चरखी दादरी नया जिला
2011 आँकड़े → वर्तमान सीमा के अनुसार पुनर्गठित
जिला गठन: 1 दिसंबर 2016
2011 स्वतंत्र जिला? नहीं
पुनर्गठित जनसंख्या: 5,02,276
साक्षरता: 67.04%
क्षेत्रफल: 1,370.11 वर्ग किमी
चरखी दादरी में कोई बड़ी बारहमासी नदी नहीं है। जिले की कृषि एवं जल व्यवस्था मुख्यतः नहरों, वितरिकाओं, तालाबों तथा भूजल पर निर्भर करती है।
रानीला गाँव स्थित जैन मंदिर चरखी दादरी जिले का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पुरातात्त्विक पर्यटन स्थल है।
मंदिर में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा प्रमुख है। जिला प्रशासन के विवरण के अनुसार यहाँ की प्रतिमाओं को लगभग 1,400–1,500 वर्ष पुराना माना जाता है।
जैन छतरी चरखी दादरी का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्मारक है। हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा इसे Archaeological Monument के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
पुरातत्व विभाग के विवरण के अनुसार इसका निर्माण चंदर सेन से संबंधित है, जो झज्जर रियासत में दीवान नियुक्त थे।
श्यामसर तालाब चरखी दादरी का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थल है।
हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की महत्वपूर्ण/संरक्षित स्थलों की सूची में Shyamsar Talab, Charkhi Dadri का उल्लेख मिलता है।
चरखी दादरी की अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन, खनन एवं पत्थर आधारित गतिविधियाँ तथा औद्योगिक गतिविधियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि है। प्रमुख फसलों में निम्न शामिल हैं:
हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तरह चरखी दादरी में भी पशुपालन, दुग्ध उत्पादन एवं डेयरी ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण घटक हैं।
जिले के कुछ क्षेत्रों में Building Stone, Stone Crushing तथा खनिज आधारित गतिविधियाँ महत्वपूर्ण हैं।
पत्थर-क्रशिंग गतिविधियों से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दे भी समय-समय पर सामने आए हैं।
चरखी दादरी का औद्योगिक इतिहास सीमेंट उद्योग से भी जुड़ा रहा है। जिले में सीमेंट से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों का ऐतिहासिक एवं आधुनिक दोनों संदर्भ मिलता है।
चिरिया क्षेत्र में Cement Grinding Unit से संबंधित परियोजना सरकारी पर्यावरणीय दस्तावेजों में दर्ज की गई है।
| सत्ता/राजवंश | अनुमानित/ऐतिहासिक अवधि | प्रमुख शासक/संबंध | चरखी दादरी के संदर्भ में स्थिति |
|---|---|---|---|
| प्राचीन क्षेत्रीय शक्तियाँ | निश्चित अवधि उपलब्ध नहीं | — | वर्तमान जिले की सीमा प्राचीन काल में अस्तित्व में नहीं थी। जिला-विशिष्ट प्रत्यक्ष शासन प्रमाण उपलब्ध नहीं। |
| गुप्त सत्ता | लगभग 4वीं–6वीं शताब्दी | समुद्रगुप्त आदि | उत्तर भारत में व्यापक गुप्त प्रभाव का ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है, लेकिन वर्तमान चरखी दादरी के लिए प्रत्यक्ष स्थानीय प्रशासनिक प्रमाण प्रमाणित नहीं। |
| पुष्यभूति/वर्धन सत्ता | 6वीं–7वीं शताब्दी | हर्षवर्धन | थानेसर केंद्रित व्यापक हरियाणवी/उत्तर भारतीय सत्ता; वर्तमान चरखी दादरी पर स्वतंत्र स्थानीय शासन का प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं। |
| तोमर/चौहान आदि मध्यकालीन शक्तियाँ | मध्यकाल | अनंगपाल आदि की परंपरा | दक्षिणी हरियाणा/दिल्ली क्षेत्र में व्यापक प्रभाव; वर्तमान जिले के लिए निश्चित शासन-वर्ष एवं स्थानीय शासक प्रमाणित नहीं। |
| दिल्ली सल्तनत | 13वीं–16वीं शताब्दी | विभिन्न सुल्तान | दिल्ली क्षेत्र की व्यापक राजनीतिक-सैन्य सत्ता का प्रभाव; वर्तमान जिले के लिए स्वतंत्र स्थानीय सल्तनती शासन-क्रम प्रमाणित नहीं। |
| मुगल सत्ता | 16वीं–18वीं शताब्दी | अकबर आदि | राजस्व एवं जमींदारी व्यवस्था का व्यापक प्रभाव; वर्तमान जिले के लिए स्वतंत्र स्थानीय मुगल शासक-क्रम प्रमाणित नहीं। |
| मराठा प्रभाव | 18वीं–19वीं शताब्दी का प्रारंभ | सिंधिया शक्ति आदि | दिल्ली क्षेत्र में व्यापक राजनीतिक प्रभाव; वर्तमान चरखी दादरी पर स्वतंत्र मराठा प्रशासन का प्रमाणित स्थानीय विवरण उपलब्ध नहीं। |
| दादरी रियासत/प्रमुखता | ब्रिटिश काल; 1857 तक स्थानीय रियासती संदर्भ | नवाब बहादुर जंग खान | सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणित स्थानीय ऐतिहासिक सत्ता। 1857 के विद्रोह में बहादुर जंग खान की भूमिका दर्ज है। |
| जींद रियासत | 1857–1948 | राजा सरूप सिंह, बाद में राजा रघबीर सिंह | 1857 के बाद दादरी को राजा सरूप सिंह को प्रदान किया गया। मई 1864 में उनके वंशज राजा रघबीर सिंह के विरुद्ध लगभग 50 गाँवों में विद्रोह हुआ। |
| PEPSU | 1948–1956 | — | स्वतंत्रता के बाद का प्रशासनिक पुनर्गठन। यह राजवंश नहीं बल्कि राज्य/राजनीतिक संघ था। |
| पंजाब | 1956–1966 | — | PEPSU के पंजाब में विलय के बाद क्षेत्र पंजाब का हिस्सा रहा। |
| हरियाणा | 01-11-1966–वर्तमान | — | हरियाणा राज्य गठन के बाद क्षेत्र हरियाणा का हिस्सा बना। |
नोट: 1857 और 1864 की स्थानीय घटनाओं के लिए जिला प्रशासन का आधिकारिक इतिहास प्राथमिक संदर्भ है।
प्राचीन काल के लिए वर्तमान चरखी दादरी जिले की आधुनिक सीमा लागू नहीं थी। इसलिए गुप्त, पुष्यभूति, तोमर, चौहान, दिल्ली सल्तनत, मुगल तथा मराठा सत्ताओं को यहाँ केवल तभी निश्चित स्थानीय शासन माना गया है जब जिला-विशिष्ट प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध हो।
1857 और मई 1864 की स्थानीय घटनाएँ चरखी दादरी के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणित अध्यायों में हैं।
सीमा संबंधी प्रश्नों में पुराने जिला सर्वेक्षणों और वर्तमान मानचित्रों के बीच प्रस्तुतीकरण का अंतर मिल सकता है। इसलिए परीक्षा में भिवानी, रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ को पड़ोसी जिलों की सूची के रूप में याद रखना अधिक सुरक्षित है।
वर्तमान चरखी दादरी जिले के प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास को व्यापक हरियाणा–दिल्ली–कुरु क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भ में समझना अधिक उचित है।
काल: लगभग 10,000 ई.पू. – 2000 ई.पू.
वर्तमान चरखी दादरी तथा आसपास के व्यापक क्षेत्र में प्रारम्भिक मानव गतिविधियों के संकेतों को क्षेत्रीय पुरातात्त्विक संदर्भ में देखा जाता है।
काल: लगभग 1500–600 ई.पू.
वर्तमान चरखी दादरी क्षेत्र को व्यापक हरियाणा-कुरु क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भ में समझा जाता है। उत्तरवैदिक काल में कुरु राजनीतिक-सांस्कृतिक क्षेत्र का महत्व बढ़ा।
तिथि: विवादित
चरखी दादरी क्षेत्र को व्यापक रूप से प्राचीन कुरु क्षेत्र के संदर्भ में देखा जाता है। महाभारत की परंपरा का प्रमुख केंद्र कुरु राज्य, हस्तिनापुर और उससे जुड़े क्षेत्र थे।
काल: लगभग 322–185 ई.पू.
मौर्य साम्राज्य के विस्तार के साथ उत्तर भारत का बड़ा भाग एक केंद्रीकृत राजनीतिक व्यवस्था में आया। वर्तमान चरखी दादरी क्षेत्र का इतिहास इसी व्यापक उत्तर भारतीय राजनीतिक क्षेत्र के संदर्भ में देखा जाता है।
काल: लगभग 320–550 ई.
गुप्त काल में उत्तर भारत में राजनीतिक स्थिरता के साथ कला, संस्कृति, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के विकास की व्यापक प्रक्रिया दिखाई देती है।
काल: 606–647 ई.
थानेसर से संबंधित हर्षवर्धन ने 7वीं शताब्दी में उत्तर भारत के बड़े भूभाग पर अपना प्रभाव स्थापित किया।
काल: लगभग 8वीं–12वीं शताब्दी
काल: 1206–1526 ई.
12वीं शताब्दी के अंत में चौहान शक्ति के कमजोर होने के बाद दिल्ली-केंद्रित मुस्लिम सत्ता का प्रभाव हरियाणा क्षेत्र में बढ़ा और आगे चलकर दिल्ली सल्तनत स्थापित हुई।
काल: 1526 ई. से
1526 के प्रथम पानीपत युद्ध के बाद उत्तर भारत में मुगल सत्ता स्थापित हुई। वर्तमान चरखी दादरी क्षेत्र का व्यापक क्षेत्र भी मुगल प्रशासनिक प्रभाव के अंतर्गत रहा।
काल: 18वीं शताब्दी
मुगल सत्ता के कमजोर होने के बाद हरियाणा एवं दिल्ली क्षेत्र में विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष हुआ। मराठा शक्ति का प्रभाव भी इस व्यापक क्षेत्र तक पहुँचा।
काल: 1803–1947
1803 के बाद दिल्ली एवं हरियाणा क्षेत्र में ब्रिटिश प्रभाव मजबूत हुआ। आगे चलकर प्रशासनिक, राजस्व एवं परिवहन व्यवस्था में ब्रिटिश संस्थागत परिवर्तन हुए।
नोट: नीचे दिए गए प्राचीन एवं मध्यकालीन राजवंशों को चरखी दादरी पर प्रत्यक्ष स्थानीय शासन के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक हरियाणा–दिल्ली–कुरु क्षेत्र के राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में समझें।
1947 के बाद यह क्षेत्र भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बना और 1966 में हरियाणा राज्य के गठन के बाद भिवानी जिले में शामिल रहा।
प्राचीन राजवंशों की सूची को “चरखी दादरी नगर पर सीधे शासन” के अर्थ में न पढ़ें। अधिकांश प्राचीन एवं मध्यकालीन तथ्य व्यापक हरियाणा, दिल्ली, कुरु अथवा उत्तर भारतीय राजनीतिक क्षेत्र के संदर्भ में हैं।
स्थानीय स्तर के किसी विशिष्ट शासक या राजवंश के लिए अभिलेखीय अथवा पुरातात्त्विक प्रमाण उपलब्ध होने पर ही उसे प्रत्यक्ष स्थानीय शासन के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।
HSSC • HPSC • CET • Haryana Police • Group C/D • Patwari • Gram Sachiv
आधिकारिक जिला प्रोफाइल के अनुसार 2011 Census में चरखी दादरी की जनसंख्या 5,02,276, क्षेत्रफल 1,370.11 वर्ग किमी और साक्षरता 67.04% है।
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