01. बावल | Bawal
यहाँ अनेक अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थित हैं, जिनमें मारुति, कपारो, व्हील्स इंडिया, एक्साइड, एस.आई. इंडिया, वाईकेके मूसासी, नेरोलेक, मिंडा आदि प्रमुख हैं।
आज की हमारी यह पोस्ट हरियाणा जी.के. से सम्बन्धित है।
इस पोस्ट में हम आपको हरियाणा के रेवाड़ी जिले से संबंधित महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएँगे।
यह सामग्री ग्राम सचिव, पटवारी, कैनाल पटवारी, हरियाणा पुलिस, क्लर्क, हरियाणा ग्रुप-D, हरियाणा पात्रता परीक्षा तथा अन्य हरियाणा की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
1 नवंबर, 1989
पीतल नगरी, वीर सिटी, रेवतवाड़ी
मान्यता के अनुसार बलराम के ससुर रेवत नामक राजा ने अपनी पुत्री रेवती के नाम पर इस नगर का नाम रेवतवाड़ी रखा, जो बाद में बिगड़कर रेवाड़ी हो गया।
रेवाड़ी
रेवाड़ी, कोसली, बावल
रेवाड़ी, कोसली, बावल
धारूहेड़ा, डहीना, बनेठी, नाहड़
रेवाड़ी, खोल, जाटूसाना, बावल, नाहड़
1,594 वर्ग किलोमीटर
919 / 1000 (2019 के अनुसार)
80.99%
565 व्यक्ति / वर्ग किमी
रोहतक, गुरुग्राम
रेवाड़ी, कोसली, बावल
राव तुलाराम — 1857 की क्रांति के प्रमुख नेता
NH-48, NH-352
महेन्द्रगढ़
यहाँ अनेक अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थित हैं, जिनमें मारुति, कपारो, व्हील्स इंडिया, एक्साइड, एस.आई. इंडिया, वाईकेके मूसासी, नेरोलेक, मिंडा आदि प्रमुख हैं।
रेवाड़ी जिले के कुंडा क्षेत्र के स्लेट पत्थर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है।
इब्राहिम 12 हजारी को मोहम्मद गौरी का जनरल बताया जाता है। उसने रेवाड़ी के चौहान सरदार को हराकर यहाँ मुस्लिम धर्म का आधिपत्य कायम किया था।
रेवाड़ी की पुरानी कचहरी के समीप स्थित इस ऐतिहासिक मस्जिद का निर्माण अकबर के शासनकाल में लगभग 1570 के आसपास हुआ था।
इसका निर्माण 1675 में राव नंदराम सिंह ने करवाया था।
इस भव्य महल का निर्माण राव तेज सिंह ने 1801 में करवाया था।
इसका निर्माण राव नंदराम ने करवाया था।
यहाँ सनातन धर्म के सभी देवी-देवताओं की पूजा होती है।
रेवाड़ी हेरिटेज स्टीम लोकोमोटिव संग्रहालय जिले की प्रमुख ऐतिहासिक एवं रेलवे विरासत है।
इसका निर्माण राव गुर्जर के पुत्र राम अहीर ने करवाया था।
कोसली, रेवाड़ी में स्थित यह अभयारण्य 1987 में बना और काला हिरण के लिए प्रसिद्ध है।
यह पर्यटन स्थल रेवाड़ी में स्थित है। इसकी स्थापना 1982 में हुई।
01. हरियाणा में आर्य समाज की प्रथम शाखा 1880 में रेवाड़ी में स्थापित हुई।
02. निर्यातकों की सहायता के लिए राज्य में रेवाड़ी व पानीपत में स्टेशन बनाए गए हैं।
03. हरियाणा राज्य का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन — रेवाड़ी है।
04. देश की पहली CNG ट्रेन रेवाड़ी से रोहतक तक चलाई गई थी।
05. हरियाणा में मोर-चिंकारा प्रजनन केन्द्र झाबुआ, रेवाड़ी में है।
06. हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस 23 सितंबर को राव तुलाराम के शहीदी दिवस पर मनाया जाता है।
07. हरियाणा का प्रथम कैंसर संस्थान रेवाड़ी के मीरपुर में है।
08. हरियाणा का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन रेवाड़ी है।
09. 2011 के अनुसार हरियाणा में सबसे अधिक पुरुष साक्षरता दर रेवाड़ी में थी — 91%।
4 जिलों की स्थापना 1 नवंबर 1989 को हुई थी — कैथल, यमुनानगर, पानीपत और रेवाड़ी।
Memory Line: “कैथल के लोग यमुना के पानी में रेवड़ी फेंकते हैं।”
स्थान — गोल चक्कर, रेवाड़ी
स्थान — बास दादू, रेवाड़ी
स्थान — गुरावड़ा, रेवाड़ी
स्थान — 12 हजारी वाली, रेवाड़ी
रेवाड़ी में हीरो होंडा मोटरसाइकिल बनाने की फैक्ट्री है।
रेवाड़ी जिला तांबा और पीतल के बर्तनों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
मीरपुर, रेवाड़ी में स्थित है।
चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, बावल में स्थित है।
साबी नदी रेवाड़ी जिले में बहती है और इसे प्रमुख सिंचाई स्रोत के रूप में बताया गया है।
कुतुबपुर के रहने वाले मुफ्रती निजामुद्दीन अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह मार्च से नवंबर 1967 तक मुख्यमंत्री रहे तथा विशाल हरियाणा पार्टी के संस्थापक थे।
1857 के स्वतंत्रता सेनानी और रेवाड़ी के प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्व।
मोनिका सोनी को “रेवाड़ी की लता मंगेशकर” के रूप में जाना जाता है।
जिला: रेवाड़ी
जिला गठन: 1 नवंबर 1989
पूर्व प्रशासनिक जिला: महेंद्रगढ़
मुख्यालय: रेवाड़ी
मंडल: गुरुग्राम मंडल
वर्तमान उपमंडल: 3 — रेवाड़ी, कोसली, बावल
वर्तमान तहसील: 3 — रेवाड़ी, कोसली, बावल
वर्तमान उप-तहसील: 5 — धारूहेड़ा, दहिना, नाहर, मनेठी, पाल्हावास
वर्तमान ब्लॉक: 7 — रेवाड़ी, बावल, नाहर, दहिना, धारूहेड़ा, जाटूसाना, खोल
क्षेत्रफल: 1,594 km² — 2011 Census
2011 जनसंख्या: 9,00,332
पुरुष: 4,74,335
महिला: 4,25,997
साक्षरता: 80.99%
लिंगानुपात: 898
प्रमुख भौगोलिक पहचान: अरावली + मैदानी/रेतीला क्षेत्र
प्रमुख नदी: साहिबी नदी तंत्र/मौसमी जलधाराएँ
प्रमुख ऐतिहासिक पहचान: 1857 में राव तुलाराम
प्रसिद्ध क्षेत्रीय पहचान: अहीरवाल
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र: धारूहेड़ा और बावल
पारंपरिक उद्योग: पीतल का काम, तिल्लेदार जूती
आधुनिक उद्योग: ऑटोमोबाइल एवं ऑटो-अनुषंगी उद्योग
प्रमुख रेलवे विरासत: रेवाड़ी स्टीम लोको शेड
प्रसिद्ध लोकोमोटिव: Fairy Queen — 1855
प्रमुख ऐतिहासिक स्थल: लाल मस्जिद, बड़ा तालाब, रानी की देओढ़ी, छतरियाँ
2011 Census के अनुसार रेवाड़ी की जनसंख्या 9,00,332, क्षेत्रफल 1,594 km², घनत्व 565/km² और साक्षरता 80.99% थी।
वर्तमान जिला वेबसाइट 2026 में रेवाड़ी, कोसली और बावल तीन उपमंडल तथा पाँच उप-तहसीलों—धारूहेड़ा, दहिना, नाहर, मनेठी और पाल्हावास— से संबंधित प्रशासनिक दस्तावेज दिखाती है।
रेवाड़ी के नाम की सबसे प्रसिद्ध कथा राजा रेवट और उनकी पुत्री रेवती से संबंधित है।
जिला प्रशासन के इतिहास पृष्ठ के अनुसार महाभारतकालीन परंपरा में राजा रेवट की पुत्री रेवती थीं। राजा उन्हें प्रेम से रीवा कहते थे और उनके नाम पर “रीवा वाड़ी” नामक नगर बसाया गया, जो आगे चलकर रेवाड़ी कहलाया। कथा में रेवती का विवाह बलराम से बताया गया है।
राजा रेवट + रेवती + रीवा वाड़ी = पौराणिक/परंपरागत नामकरण कथा
इसे पुरातात्त्विक रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य की तरह नहीं लिखना चाहिए।
रेवाड़ी को दक्षिणी हरियाणा के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक क्षेत्र अहीरवाल का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
यह एक बहुत महत्वपूर्ण HSSC memory chain है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के Digital District Repository के अनुसार रेवाड़ी क्षेत्र के अहीरों ने 1857 के विद्रोह में राव तुलाराम के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेवाड़ी का इतिहास दिल्ली के इतिहास से समकालीन बताया जाता है। जिला प्रशासन की आधिकारिक इतिहास सामग्री इसकी प्राचीन पृष्ठभूमि को महाभारतकालीन परंपरा से जोड़ती है।
लेकिन HSSC के लिए यहाँ एक महत्वपूर्ण सावधानी है:
मान्यता:
रेवट–रेवती–रीवा वाड़ी
अधिक मजबूत ऐतिहासिक तथ्य:
मध्यकालीन/उत्तर-मध्यकालीन राजनीतिक नियंत्रण, मुगल प्रशासन,
मराठा प्रभाव, ब्रिटिश प्रशासन और 1857 का विद्रोह।
इसलिए प्राचीन काल में बहुत अधिक काल्पनिक घटनाएँ जोड़ना परीक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।
2011 Census District Census Handbook के अनुसार अकबर के समय रेवाड़ी क्षेत्र दिल्ली सूबे का हिस्सा था। मुगल साम्राज्य के कमजोर होने के बाद क्षेत्र में पड़ोसी शक्तियों के बीच संघर्ष बढ़ा।
मुगल सत्ता के कमजोर होने के बाद रेवाड़ी क्षेत्र विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के प्रभाव में आया।
Census District Handbook के अनुसार:
का क्रम देखने को मिलता है। अंततः 1808–09 के आसपास रेवाड़ी ब्रिटिश नियंत्रण में आया।
ब्रिटिश काल में रेवाड़ी का प्रशासनिक इतिहास कई बार बदला और विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के साथ इसका पुनर्गठन होता रहा।
⭐ यह रेवाड़ी के सबसे महत्वपूर्ण Administrative-Trap Topics में से एक है।
हरियाणा सरकार ने 1 नवंबर 1989 को रेवाड़ी को स्वतंत्र जिला बनाया।
यह क्षेत्र पहले महेंद्रगढ़ जिले का उपमंडल एवं तहसील मुख्यालय था।
ब्रिटिश/स्वतंत्रता-पूर्व प्रशासनिक इतिहास में बावल क्षेत्र की अलग पहचान रही।
रेवाड़ी जिला प्रशासन की वर्तमान व्यवस्था में तीन उपमंडल दर्ज हैं:
जिला प्रशासन के वर्तमान SDM विवरण में भी यही तीन उपमंडल दर्ज हैं।
जिला प्रशासन की वर्तमान directory में 7 ब्लॉक दर्ज हैं:
रेवाड़ी गुरुग्राम मंडल का हिस्सा है।
जिला प्रशासन की Organization Chart में Commissioner, Division Gurugram के नीचे Deputy Commissioner, Rewari दिखाया गया है।
रेवाड़ी हरियाणा के उन जिलों में है जहाँ अरावली पर्वतमाला का प्रभाव मिलता है।
रेवाड़ी की जलवायु शुष्क/अर्ध-शुष्क प्रभाव वाली गर्म जलवायु से संबंधित है।
राजस्थान से निकटता के कारण गर्मियों में धूल भरी आँधियों का प्रभाव देखा जाता है।
रेवाड़ी कोई बड़ी perennial river वाला जिला नहीं है। यहाँ मौसमी नालों, अरावली drainage तथा साहिबी नदी तंत्र का महत्व है।
रेवाड़ी का भूभाग मैदानी तथा अरावली-प्रभावित है।
राव तुलाराम और उनके सहयोगियों ने रेवाड़ी तहसील पर नियंत्रण किया।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार उन्होंने:
और रामपुरा को मुख्यालय बनाया।
रामपुरा किला/क्षेत्र को केंद्र बनाकर राव तुलाराम ने:
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्रोत में लगभग 5,000 सैनिकों और रामपुरा में हथियार निर्माण कार्यशाला का उल्लेख है।
राव तुलाराम ने 1857 में बहादुर शाह जफर को सम्राट के रूप में स्वीकार किया और दिल्ली के विद्रोही पक्ष को आर्थिक एवं रसद सहायता दी।
1857 में:
यहीं हथियार और गोला-बारूद तैयार करने की कार्यशाला स्थापित की गई थी।
दिल्ली के पतन के बाद अंग्रेजों ने राव तुलाराम के विद्रोह को कुचलने के लिए सैन्य अभियान चलाया।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के Digital District Repository के अनुसार ब्रिगेडियर जनरल Showers को रेवाड़ी की ओर भेजा गया और बाद में विद्रोह को दबाया गया।
राव तुलाराम का नाम नसीबपुर युद्ध से भी जुड़ा है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्रोत में राव तुलाराम के विद्रोह और नसीबपुर की लड़ाई का स्पष्ट संबंध मिलता है।
नसीबपुर की लड़ाई में ब्रिटिश सेना के कमांडर Lieutenant Colonel Gerrard मारे गए।
हरियाणा के इतिहास संबंधी सरकारी स्रोतों में इस संघर्ष में राव तुलाराम की भूमिका दर्ज है।
विद्रोह की पराजय के बाद राव तुलाराम भारत से बाहर चले गए।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्रोत के अनुसार उन्होंने:
किया। अंततः उनकी मृत्यु 1863 में हुई।
रेवाड़ी जिला वेबसाइट स्वयं जिले को:
के नाम से प्रस्तुत करती है।
इसका सबसे प्रमुख ऐतिहासिक आधार:
रेवाड़ी का Steam Loco Shed / Railway Heritage Museum भारत की रेलवे विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है।
निर्मित — 1855
रेवाड़ी रेलवे स्टेशन के लगभग 400 मीटर उत्तर में स्थित यह heritage site रेलवे इतिहास का प्रमुख केंद्र है।
यहाँ प्रमुख विरासत locomotives में:
स्थान: पुराने कचहरी क्षेत्र के पास, रेवाड़ी
निर्माण: 1570
काल: अकबर
स्थान: पुराने Town Hall के पास, रेवाड़ी
निर्माता: राव तेज सिंह
निर्माण काल: 1810–1815
स्थान: पुराने तहसील कार्यालय के पास, रेवाड़ी
निर्माता: राम अहीर, राव गुज्जरमल के पुत्र
हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की State Heritage सूची में Rani Ki Deodhi — Rewari एक संरक्षित ऐतिहासिक स्थल के रूप में दर्ज है।
यह रेवाड़ी की राजकीय/क्षेत्रीय स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
हरियाणा पुरातत्व विभाग की heritage सूची में Group of Chhatris — Rewari दर्ज है।
हरियाणा की State Protected Sites सूची में Solah Rahi Talab को रेवाड़ी में 18वीं शताब्दी की ऐतिहासिक जल-संरचना के रूप में बताया गया है।
स्थान: मुख्य बाजार, रेवाड़ी
यह सनातन धर्म का प्रमुख मंदिर है।
HSSC के लिए केवल वही स्थल प्राथमिकता दें जिनका जिला/सरकारी स्रोतों से संबंध स्पष्ट हो:
Brass Metal Work रेवाड़ी की पारंपरिक औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Tilledar Jooti भी रेवाड़ी की पारंपरिक कला/हस्तशिल्प पहचान से जुड़ी है।
रेवाड़ी की औद्योगिक पहचान अब:
से बहुत मजबूत हुई है।
जिला प्रशासन के अनुसार इन क्षेत्रों में automobile और auto ancillary industries विकसित हैं।
रेवाड़ी जिले की आधुनिक औद्योगिक पहचान में Hero MotoCorp — Dharuhera महत्वपूर्ण है।
Bawal Industrial Area रेवाड़ी का प्रमुख आधुनिक औद्योगिक केंद्र है।
रेवाड़ी:
का हिस्सा है।
NH-48 / Delhi–Jaipur corridor रेवाड़ी को दिल्ली, गुरुग्राम, राजस्थान और पश्चिमी भारत से जोड़ता है।
Rewari Junction महत्वपूर्ण railway junction है।
Rewari Steam Loco Shed रेलवे heritage के कारण विशेष महत्व रखता है।
रेवाड़ी में महाविद्यालय, तकनीकी संस्थान, विद्यालय और व्यावसायिक संस्थानों का नेटवर्क है।
राव तुलाराम के साथ राव गोपाल देव ने भी 1857 के रेवाड़ी विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेवाड़ी की सांस्कृतिक पहचान:
भ्रम: रेवाड़ी जिला 1972 में बना।
सही: 1972 में रेवाड़ी क्षेत्र महेंद्रगढ़ जिले में गया; जिला 1 नवंबर 1989 को बना।
भ्रम: रेवाड़ी पहले गुड़गाँव जिले का हिस्सा नहीं था।
सही: 1857 के बाद रेवाड़ी को गुड़गाँव जिले से जोड़ा गया था; 1972 में महेंद्रगढ़ में गया।
भ्रम: बावल हमेशा रेवाड़ी की तहसील था।
सही: 1977 में रेवाड़ी तहसील से बावल तहसील बनाई गई।
भ्रम: राव तुलाराम का मुख्य 1857 केंद्र नारनौल था।
सही: उनका प्रमुख विद्रोही केंद्र रेवाड़ी/रामपुरा था। नसीबपुर की निर्णायक लड़ाई नारनौल क्षेत्र में हुई।
भ्रम: नसीबपुर युद्ध रेवाड़ी जिले में हुआ।
सही: नसीबपुर → नारनौल/महेंद्रगढ़ क्षेत्र।
भ्रम: राव तुलाराम 1857 में मारे गए।
सही: वे विद्रोह के बाद भारत से बाहर गए और 1863 में काबुल में मृत्यु हुई।
भ्रम: रेवाड़ी का पर्वतीय क्षेत्र शिवालिक है।
सही: अरावली का प्रभाव है।
भ्रम: रेवाड़ी की प्रमुख पहचान केवल कृषि है।
सही: आधुनिक रेवाड़ी की बड़ी पहचान ऑटोमोबाइल + ऑटो-अनुषंगी उद्योग है।
भ्रम: Fairy Queen 1900 के आसपास की locomotive है।
सही: 1855 में निर्मित।
भ्रम: बड़ा तालाब राव तुलाराम ने बनाया।
सही: राव तेज सिंह, 1810–1815।
भ्रम: लाल मस्जिद 18वीं शताब्दी की है।
सही: जिला प्रशासन के अनुसार 1570, अकबर काल।
भ्रम: रेवाड़ी की वर्तमान प्रशासनिक संरचना 2 उपमंडल की है।
सही: वर्तमान SDM व्यवस्था में 3 — रेवाड़ी, कोसली, बावल।
भ्रम: वर्तमान में केवल 3 उप-तहसील हैं।
सही: 2026 प्रशासनिक दस्तावेजों में 5 — धारूहेड़ा, दहिना, नाहर, मनेठी, पाल्हावास।
भ्रम: 2011 की जनसंख्या 9 लाख = वर्तमान 2026 जनसंख्या।
सही: 9,00,332 केवल Census 2011 का आँकड़ा है।
| तिथि/वर्ष | घटना |
|---|---|
| महाभारतकाल — मान्यता | रेवट–रेवती–रीवा वाड़ी नामकरण कथा |
| अकबर काल | रेवाड़ी क्षेत्र दिल्ली सूबे का हिस्सा |
| 1570 | लाल मस्जिद, अकबर काल |
| 1808–09 | रेवाड़ी ब्रिटिश नियंत्रण में |
| 1810 | दिल्ली क्षेत्र का प्रशासनिक पुनर्गठन |
| 1819 | रेवाड़ी दक्षिणी जिले में |
| 1810–1815 | बड़ा तालाब — राव तेज सिंह |
| 1825 | राव तुलाराम का जन्म |
| 17 मई 1857 | रेवाड़ी में राव तुलाराम का विद्रोही प्रशासन |
| 1857 | रामपुरा विद्रोही मुख्यालय |
| 16 नवंबर 1857 | नसीबपुर का युद्ध; Gerrard की मृत्यु |
| 1863 | राव तुलाराम की काबुल में मृत्यु |
| 1972 | रेवाड़ी क्षेत्र महेंद्रगढ़ जिले में |
| 1977 | बावल तहसील बनी |
| 1 नवंबर 1989 | रेवाड़ी जिला बना |
| 1855 | Fairy Queen locomotive का निर्माण |
| 2011 | नवीनतम पूर्ण Census जिला आँकड़े |
“रेवट–रेवती–रीवा वाड़ी → अहीरवाल → मुगल दिल्ली सूबा → मराठा → भरतपुर → ब्रिटिश → 1972 महेंद्रगढ़ → 1977 बावल → 1 नवंबर 1989 जिला → अरावली → NCR → राव तुलाराम → 17 मई 1857 → रामपुरा → 5,000 सैनिक → नसीबपुर → 16 नवंबर 1857 → काबुल 1863 → लाल मस्जिद 1570 → बड़ा तालाब 1810–15 → Fairy Queen 1855 → धारूहेड़ा Auto → बावल Industry।”
“वीर रेवाड़ी के राव तुलाराम ने 1857 में रामपुरा से अहीरवाल उठाया; अरावली की इस वीरभूमि में अकबर की लाल मस्जिद, तेज सिंह का बड़ा तालाब, और 1855 की Fairy Queen आज भी इतिहास बताते हैं, जबकि धारूहेड़ा-बावल आधुनिक Auto Industry की पहचान हैं।”
“रेवाड़ी 1 नवंबर 1989 में महेंद्रगढ़ से जिला बना; अरावली और अहीरवाल की वीरभूमि में राव तुलाराम ने 17 मई 1857 को रामपुरा से विद्रोही सरकार चलाई, लगभग 5,000 सैनिक जुटाए और हथियार बनवाए; लाल मस्जिद 1570, बड़ा तालाब 1810–15, Fairy Queen 1855, और धारूहेड़ा-बावल आज इसकी औद्योगिक पहचान हैं।”
सबसे जरूरी HSSC Formula
REWARI = 1989 + AHIRWAL + RAO TULA RAM + 1857 + RAMPURA + FAIRY QUEEN + 1855 + DHARUHERA AUTO + BAWAL INDUSTRY + ARAVALI
राव तुलाराम → रेवाड़ी/रामपुरा
नसीबपुर युद्ध → नारनौल/महेंद्रगढ़
जिला गठन → 1 नवंबर 1989
Fairy Queen → 1855
बड़ा तालाब → राव तेज सिंह → 1810–1815
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