अंबाला
Ambala Districtइतिहास, भूगोल, संस्कृति, प्रशासन और महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य।
Notes पढ़ें →हरियाणा राज्य का जिलेवार वर्णन – जिला महेंद्रगढ़ के अंतर्गत आज की हमारी यह पोस्ट हरियाणा जी.के से सम्बन्धित है। इस पोस्ट में हम आपको हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले से संबंधित PDF उपलब्ध कराएंगे। इस PDF को नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर पाएँगे।
यह सामग्री आने वाली ग्राम सचिव, पटवारी, कैनाल पटवारी, हरियाणा पुलिस, क्लर्क, हरियाणा ग्रुप डी, हरियाणा पात्रता व अन्य हरियाणा की सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत ही उपयोगी है।
✦ GK247.IN • Haryana GK ✦| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| जिला | महेंद्रगढ़ (Mahendragarh) |
| जिला मुख्यालय | नारनौल |
| वर्तमान क्षेत्रफल | 1,899 वर्ग किमी |
| जनसंख्या | 9,22,088 (Census 2011) |
| पुरुष | 4,86,665 |
| महिला | 4,35,423 |
| साक्षरता | 77.72% |
| उपमंडल | 4 — नारनौल, महेंद्रगढ़, कनीना, नांगल चौधरी |
| तहसील | 5 — नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी, महेंद्रगढ़, कनीना |
| उप-तहसील | सतनाली |
| ब्लॉक | 8 |
| गाँव | 374 |
| विधानसभा | 4 |
| लोकसभा | भिवानी-महेंद्रगढ़ |
| प्रशासनिक मंडल | गुरुग्राम मंडल |
| प्रमुख ऐतिहासिक नगर | नारनौल |
| प्रमुख पहाड़ी | ढोसी पहाड़ी |
| प्रमुख ऐतिहासिक पहचान | नारनौल के मुगलकालीन स्मारक |
| प्रमुख विश्वविद्यालय | Central University of Haryana, Jant-Pali |
वर्तमान जिला पोर्टल के अनुसार जिला 1,899 वर्ग किमी क्षेत्र में है, जनसंख्या 9,22,088 और साक्षरता 77.72% है। पोर्टल वर्तमान में 4 उपमंडल, 5 तहसील + 1 उप-तहसील और 8 ब्लॉक बताता है।
महेंद्रगढ़ नगर को पहले कानौड़ कहा जाता था। जिला प्रशासन के अनुसार इसका संबंध यहाँ बसे कनौड़िया ब्राह्मणों से जोड़ा जाता है।
एक अन्य परंपरा के अनुसार बाबर के सेवक मलिक महदूद खान ने यहाँ बस्ती बसाई थी। इसे सावधानी से पढ़ें—यह जिला प्रशासन के इतिहास पृष्ठ पर वर्णित परंपरागत विवरण है, न कि पुरातात्त्विक रूप से सिद्ध नगर-स्थापना की तारीख।
महेंद्रगढ़ जिले का मुख्यालय महेंद्रगढ़ शहर नहीं है।
👉 जिला मुख्यालय = नारनौल
यही इसे हरियाणा का विशेष जिला बनाता है। जिला प्रशासन इसे राज्य का एकमात्र ऐसा जिला बताता है जिसका मुख्यालय जिले के नाम वाले नगर में नहीं बल्कि नारनौल में है।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र का वर्तमान जिला-नाम अपेक्षाकृत आधुनिक है, लेकिन इसका भौगोलिक क्षेत्र बहुत पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य का हिस्सा रहा है।
हरियाणा पर्यटन के अनुसार इस व्यापक क्षेत्र में पुरातात्त्विक खोजों से Late Harappan संस्कृति के प्रमाण मिले हैं, विशेषकर पुराने रेवाड़ी क्षेत्र में; साथ ही आसपास के क्षेत्र से Painted Grey Ware (PGW), Northern Black Polished Ware (NBPW) तथा Early Historical Ware जैसे पुरातात्त्विक पदार्थों का उल्लेख मिलता है।
📍 नारनौल के पश्चिम में, थाना और कुलताजपुर के पास
ढोसी पहाड़ी महेंद्रगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक-धार्मिक पहचान में से एक है।
जिला प्रशासन के अनुसार यह नारनौल से लगभग 8 किमी पश्चिम में स्थित है और परंपरा में इसे च्यवन ऋषि की तपस्थली माना जाता है। पहाड़ी पर मंदिर, जलकुंड तथा पुराने किले के अवशेषों का उल्लेख मिलता है।
Central University of Haryana के विवरण में ढोसी को Aravalli range के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित extinct volcano बताया गया है। इसकी ऊँचाई आसपास के भूभाग से लगभग 345–470 मीटर और समुद्र तल से लगभग 740 मीटर बताई गई है। वहाँ Malani igneous rocks की प्राचीनता लगभग 732 million years बताई गई है।
मान्यता है कि:
लेकिन इसे पौराणिक/परंपरागत मान्यता के रूप में याद करें, प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं।
नारनौल क्षेत्र मध्यकाल में उत्तर भारत के राजनीतिक मार्गों के प्रभाव क्षेत्र में रहा।
तुर्क शासन के विस्तार के साथ यह क्षेत्र दिल्ली सल्तनत के प्रभाव में आया। बाद में खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी शासन के दौर से गुजरा।
लोदी काल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इब्राहिम खान सूर को नारनौल क्षेत्र के निकट जागीर मिलने का उल्लेख मिलता है। बाद में वही परिवार शेरशाह सूरी से जुड़ता है।
1526 के बाद पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी की पराजय के साथ उत्तर भारत में मुगल सत्ता का विस्तार हुआ।
नारनौल भी मुगल प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बना।
अकबर के समय नारनौल का प्रशासनिक महत्व बढ़ा। आइने-अकबरी से संबंधित विवरणों में नारनौल को प्रशासनिक इकाई के रूप में उल्लेखित किया जाता है।
आज भी यहाँ शेरशाह सूरी, अकबर और शाहजहाँ काल से जुड़े कई स्मारक मिलते हैं।
हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) का संबंध नारनौल/दक्षिण हरियाणा क्षेत्र के व्यापक ऐतिहासिक परिदृश्य से जोड़ा जाता है।
लेकिन HSSC में एक बात बिल्कुल स्पष्ट रखें:
दूसरा पानीपत युद्ध
📅 5 नवंबर 1556
⚔️ अकबर की सेना बनाम हेमू
परिणाम:
👉 मुगल पक्ष की विजय
👉 हेमू की पराजय
नारनौल को युद्धस्थल न लिखें।
📍 पीरन मोहल्ला, नारनौल
यह महेंद्रगढ़ का अत्यंत महत्वपूर्ण मुगल/सूरी स्थापत्य स्मारक है।
इब्राहिम खान सूर शेरशाह सूरी के दादा थे और 1518 में नारनौल में उनकी मृत्यु हुई।
हरियाणा पर्यटन के अनुसार 1540–45 ई. के दौरान शेरशाह सूरी के निर्देश पर उनके मकबरे का निर्माण कराया गया।
अकबर के शासनकाल में शाह कुली खान नारनौल का गवर्नर था।
उसके नाम से कई महत्वपूर्ण स्मारक जुड़े हैं।
📍 पुरानी मंडी, नारनौल
📍 नारनौल
📅 निर्माण: 1590–91 ई.
📅 तालाब: 1592–93 ई.
यह अकबर के शासनकाल में निर्मित हुआ।
हरियाणा पर्यटन के अनुसार जल महल के प्रवेश द्वार पर फारसी अभिलेख इसके निर्माण से संबंधित जानकारी देता है। महल एक विशाल तालाब के मध्य स्थित है और पुल के माध्यम से पहुँचा जाता है।
जिला प्रशासन के अनुसार 1591 में शाह कुली खान ने इसे बनवाया था और इसका परिसर लगभग 11 एकड़ के बड़े जलाशय से जुड़ा था।
📍 नारनौल
यह नारनौल के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक भवनों में से एक है।
वास्तविक नाम:
इसे राय-ए-रायाँ मुकुंद दास से जोड़ा जाता है और इसका निर्माण शाहजहाँ के शासनकाल में हुआ था। जिला प्रशासन इसे नारनौल के सबसे बड़े मुगलकालीन ऐतिहासिक भवनों में गिनता है।
बीरबल के यहाँ आने की परंपरा के कारण इसे बीरबल का छत्ता कहा जाने लगा।
भवन के वास्तविक निर्माता/नाम को केवल “बीरबल ने बनवाया” लिखना सही नहीं है। आधिकारिक जिला विवरण इसे राय बाल मुकुंद दास से जोड़ता है।
हरियाणा पुरातत्व विभाग की heritage list में नारनौल से संबंधित प्रमुख स्मारकों में शामिल हैं:
जिला पर्यटन पोर्टल नारनौल में 14 प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख करता है, जिनमें 3 केंद्र सरकार तथा 11 हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित बताए गए हैं।
📍 नारनौल
चोर गुम्बद एक चट्टानी ऊँचाई पर बना प्रमुख स्मारक है।
हरियाणा पुरातत्व विभाग के अनुसार:
नारनौल का साइनबोर्ड किसे कहा जाता है?
👉 चोर गुम्बद
📍 महेंद्रगढ़ नगर
यह जिले के नामकरण से सीधे जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण किला है।
जिला प्रशासन के इतिहास पृष्ठ के अनुसार किले का संबंध मराठा शासन से बताया गया है और 1861 में पटियाला के महाराजा नरेंद्र सिंह ने इसे महेंद्रगढ़ नाम दिया।
सरकारी जिला वेबसाइट पर इसे एक स्थान पर “सत्रहवीं शताब्दी में मराठा शासक तांत्या टोपे” से जोड़ा गया है।
यह कथन ऐतिहासिक रूप से संदिग्ध है, क्योंकि तात्या टोपे 19वीं शताब्दी के 1857 के विद्रोह से जुड़े नेता थे, 17वीं शताब्दी के शासक नहीं।
इसलिए परीक्षा के लिए:
और “17वीं शताब्दी में तांत्या टोपे ने बनाया” को Exam Trap समझें।
हरियाणा पुरातत्व विभाग की संरक्षित स्थलों की सूची में Mahendergarh Fort भी शामिल है।
📍 माधोगढ़/सतनाली क्षेत्र
महेंद्रगढ़ के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में माधोगढ़ किला भी जिला प्रशासन द्वारा सूचीबद्ध है।
यह अरावली क्षेत्र की पहाड़ी विरासत से जुड़ा है और 18वीं शताब्दी की क्षेत्रीय शक्ति-संरचना का प्रतिनिधित्व करता है।
18वीं शताब्दी में मुगल सत्ता कमजोर होने के बाद इस क्षेत्र में:
का प्रभाव बढ़ा।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र में माधोगढ़ आदि किले इसी व्यापक राजनीतिक परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
औरंगज़ेब काल में सतनामी विद्रोह (1672) का संबंध नारनौल क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
यह मुगल साम्राज्य के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण स्थानीय विद्रोह था।
लेकिन विद्रोह के सामाजिक कारणों की व्याख्या इतिहासकारों में अलग-अलग है; इसलिए परीक्षा में इसे केवल “धार्मिक विद्रोह” के रूप में सीमित करना उचित नहीं।
18वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी की शुरुआत में इस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति तेजी से बदली।
1803 के बाद ब्रिटिश प्रभाव बढ़ा और नारनौल-कानौड़ क्षेत्र झज्जर राज्य/नवाब की सत्ता से जुड़ा।
1857 तक यह क्षेत्र झज्जर के नवाब के अधीन राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा रहा।
महेंद्रगढ़ के इतिहास में 16 नवंबर 1857 सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है।
📅 16 नवंबर 1857
📍 नसीबपुर, नारनौल के निकट
यह दक्षिण हरियाणा में 1857 के विद्रोह की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी।
विद्रोही पक्ष में:
— रेवाड़ी
और उनके सहयोगियों/सेनानायकों ने ब्रिटिश सेना का सामना किया।
नसीबपुर में ब्रिटिश सेना और विद्रोही सेनाओं के बीच निर्णायक संघर्ष हुआ।
नसीबपुर का युद्ध = पानीपत का युद्ध नहीं।
यह 1857 की क्रांति से संबंधित नारनौल क्षेत्र की लड़ाई थी।
1857 के विद्रोह में पटियाला शासक की ब्रिटिश-समर्थक भूमिका के बाद विद्रोह के पश्चात नारनौल क्षेत्र का बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ।
जिला इतिहास के अनुसार 1860–61 के दौरान पटियाला के महाराजा नरेंद्र सिंह से इसका संबंध स्थापित हुआ और 1861 में महेंद्रगढ़ नामकरण हुआ।
ब्रिटिश काल के अंतिम चरण में नारनौल-रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र में राजनीतिक चेतना बढ़ी।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र में 1930 के दशक के अंत में प्रजा मंडल गतिविधियाँ शुरू हुईं।
Census District Handbook के उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के अनुसार 1938 में प्रजा मंडल का गठन/संगठन सक्रिय हुआ और नारनौल इसकी प्रमुख गतिविधियों का केंद्र बना। 1946 तक आंदोलन ने गति पकड़ी तथा गिरफ्तारियों और धारा 144 जैसी ब्रिटिश/रियासती कार्रवाई के बावजूद सत्याग्रह हुए।
स्वतंत्रता के बाद रियासतों के पुनर्गठन के दौरान PEPSU (Patiala and East Punjab States Union) का गठन हुआ।
इसी प्रक्रिया में महेंद्रगढ़ जिला बनाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार:
महेंद्रगढ़ जिला बना; मुख्यालय नारनौल।
महेंद्रगढ़ उप-तहसील को तहसील बनाया गया।
बावल तहसील का पुनर्गठन हुआ; 78 गाँव गुरुग्राम जिले में स्थानांतरित हुए और बावल को उप-तहसील बनाया गया।
रेवाड़ी तहसील (61 गाँव छोड़कर) गुरुग्राम से हटाकर महेंद्रगढ़ में शामिल की गई; चर्खी दादरी क्षेत्र को बाद में भिवानी से जोड़ा गया।
रेवाड़ी तहसील के 81 गाँवों से बावल तहसील बनाई गई।
जिले में 4 तहसील थीं:
रेवाड़ी जिला बना।
महेंद्रगढ़ से:
अलग हो गईं।
साथ में रोहतक जिले की कोसली तहसील के अधिकांश क्षेत्र को मिलाकर नया रेवाड़ी जिला बनाया गया।
हरियाणा बनने के समय महेंद्रगढ़ उन मूल 7 जिलों में शामिल था।
हरियाणा सरकार के सांख्यिकीय प्रकाशन में 1 नवंबर 1966 को हरियाणा गठन के समय महेंद्रगढ़ सहित 7 जिलों का उल्लेख मिलता है।
महेंद्रगढ़ हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित है।
जिले का बड़ा भाग राजस्थान की सीमा से जुड़ा है। उत्तर/उत्तर-पूर्व दिशा में हरियाणा के भिवानी, चरखी दादरी और रेवाड़ी क्षेत्र आते हैं, जबकि दक्षिण और पश्चिम में राजस्थान के जिले हैं।
महेंद्रगढ़ का भूभाग:
प्रकृति का है।
राजस्थान सीमा से निकटता के कारण गर्मियों में:
आम हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार वर्षा मुख्यतः मानसून में होती है, जबकि फरवरी–मार्च में भी कुछ वर्षा हो सकती है।
महेंद्रगढ़ दक्षिणी हरियाणा में अरावली पर्वतीय तंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण जिला है।
यह अरावली के उत्तर-पश्चिमी छोर से संबंधित विशिष्ट भू-आकृतिक संरचना है।
महेंद्रगढ़ में हरियाणा के उत्तरी जिलों की तरह कोई बड़ी बारहमासी नदी नहीं बहती।
जल व्यवस्था मुख्यतः:
पर निर्भर है।
यह भाखड़ा नहर प्रणाली से संबंधित है और महेंद्रगढ़ क्षेत्र से गुजरती है।
जिले की जलवायु शुष्क और वर्षा सीमित होने के कारण कृषि में:
जैसी फसलों का महत्व है।
महेंद्रगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्यतः:
पर आधारित है।
NHAI के अनुसार NH-152D का 6-लेन corridor नांगल चौधरी के प्रमुख logistics hub तक connectivity प्रदान करता है।
नारनौल एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है और जिले को उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से जोड़ता है।
जिला प्रशासन के अनुसार यहाँ से/यहाँ रुकने वाली ट्रेनों में उदयपुर सिटी, चेतक एक्सप्रेस, मुंबई-चंडीगढ़ सुपरफास्ट, चंडीगढ़-बांद्रा सुपरफास्ट और दिल्ली सराय रोहिल्ला जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
महेंद्रगढ़ के आधुनिक परिवहन ढाँचे में:
विशेष महत्व रखता है।
यह Ismailabad से Narnaul तक 6-लेन controlled-access connectivity देता है और नांगल चौधरी के logistics hub को जोड़ता है।
यह जिले का सबसे महत्वपूर्ण उच्च शिक्षा संस्थान है।
यह Central Universities Act, 2009 के तहत संसद द्वारा स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय है।
विश्वविद्यालय लगभग 488 acres क्षेत्र में Jant-Pali में स्थित है।
जिला पोर्टल पर प्रमुख संस्थानों में:
आदि शामिल हैं।
स्थानीय परंपरा के अनुसार राजा नून करण देवी चामुंडा के भक्त थे और उन्होंने मंदिर बनवाया।
मंदिर से संबंधित स्थानीय इतिहास में बाद के मुगल काल में उसी क्षेत्र में मस्जिद निर्माण और स्वतंत्रता के बाद मंदिर अवशेषों की पुनः पहचान का उल्लेख मिलता है।
यह जानकारी जिला प्रशासन के धार्मिक स्थल विवरण में दी गई है; इसे धार्मिक/स्थानीय परंपरा और इतिहास के मिश्रित विवरण के रूप में पढ़ें।
📍 नारनौल-रेवाड़ी रोड
मंदिर की स्थापना से संबंधित कथा स्थानीय धार्मिक परंपरा है।
महेंद्रगढ़ जिले का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल।
📍 हरियाणा-राजस्थान सीमा क्षेत्र
जिला प्रशासन के अनुसार यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
जिला प्रशासन की धार्मिक स्थलों की सूची में ये सभी शामिल हैं।
| स्थल | स्थान | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| जल महल | नारनौल | शाह कुली खान, अकबर काल |
| इब्राहिम खान सूर मकबरा | नारनौल | शेरशाह सूरी के दादा |
| शाह कुली खान मकबरा | नारनौल | 1574–75 |
| बीरबल का छत्ता | नारनौल | छत्ता राय बाल मुकुंद दास |
| चोर गुम्बद | नारनौल | नारनौल का साइनबोर्ड |
| पीर तुर्कमान | नारनौल | मकबरा/मस्जिद |
| मिर्जा अलीजान की बावली | नारनौल | ऐतिहासिक बावली |
| नागपुरियन बावली | नारनौल | 18वीं शताब्दी |
| मुकुंदपुरा बावली | नारनौल | 18वीं–19वीं शताब्दी |
| शोभा सरोवर | नारनौल | संरक्षित heritage |
| त्रिपोलिया गेट | नारनौल | ऐतिहासिक प्रवेश संरचना |
| महेंद्रगढ़ किला | महेंद्रगढ़ | जिले के नाम से जुड़ा |
| माधोगढ़ किला | माधोगढ़ | पहाड़ी किला |
| ढोसी पहाड़ी | नारनौल क्षेत्र | अरावली/धार्मिक-भूवैज्ञानिक महत्व |
हरियाणा पुरातत्व विभाग की सूची में नारनौल के अनेक स्मारक तथा महेंद्रगढ़ किला, नागपुरियन बावली और मुकुंदपुरा बावली जैसे स्थल दर्ज हैं।
जन्म: महेंद्रगढ़ जिले से संबंधित
क्षेत्र: योग, आयुर्वेद, सामाजिक/व्यावसायिक गतिविधियाँ
हरियाणा GK स्रोतों में उनका जन्म महेंद्रगढ़ जिले के अलीपुर से संबंधित बताया गया है।
प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक।
उनका जन्म धनौंदा, महेंद्रगढ़ से संबंधित बताया जाता है।
महेंद्रगढ़ क्षेत्र से संबंधित सैनिक व्यक्तित्व के रूप में उल्लेखनीय।
उन्हें Victoria Cross से सम्मानित भारतीय सैनिकों में गिना जाता है। उपलब्ध हरियाणा GK स्रोत उनके जन्मस्थान को बरदा, महेंद्रगढ़ बताते हैं।
हरियाणा के प्रसिद्ध पहलवानों की सूची में सज्जन सिंह का जन्म महेंद्रगढ़ से संबंधित बताया गया है और उन्होंने 1959 में राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप जीती।
महेंद्रगढ़ दक्षिणी हरियाणा की विशिष्ट ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा है।
राजस्थान से भौगोलिक निकटता के कारण यहाँ की लोक-संस्कृति में हरियाणवी और राजस्थानी सांस्कृतिक प्रभावों का मिश्रण दिखाई देता है।
भ्रम: महेंद्रगढ़ जिले का मुख्यालय महेंद्रगढ़ है।
सही: नारनौल।
Trick: “जिला महेंद्रगढ़, HQ नारनौल।”
भ्रम: महेंद्रगढ़ जिला 1 नवंबर 1966 को पहली बार बना।
सही: जिला 1948 में बना, जबकि 1 नवंबर 1966 को हरियाणा राज्य का हिस्सा बना।
भ्रम: महेंद्रगढ़ का जिला गठन 1966 में हुआ।
सही: 1948।
भ्रम: जल महल का निर्माण शेरशाह सूरी ने कराया।
सही: शाह कुली खान, अकबर काल।
भ्रम: बीरबल का छत्ता बीरबल ने बनवाया था।
सही: आधिकारिक जिला विवरण इसे राय बाल मुकुंद दास से जोड़ता है; “बीरबल का छत्ता” लोकप्रिय नाम है।
भ्रम: इब्राहिम खान सूर का मकबरा 1526 में बना।
सही: 1540–45 ई. में शेरशाह सूरी के निर्देश पर।
भ्रम: नसीबपुर का युद्ध 1857 की शुरुआत में हुआ।
सही: 16 नवंबर 1857।
भ्रम: नसीबपुर = पानीपत।
सही: नसीबपुर नारनौल के निकट महेंद्रगढ़ क्षेत्र में है।
भ्रम: ढोसी पहाड़ी केवल धार्मिक स्थल है।
सही: यह भूवैज्ञानिक दृष्टि से extinct volcanic feature भी है।
भ्रम: Central University of Haryana किसी अन्य जिले में है।
सही: Jant-Pali, Mahendragarh।
भ्रम: महेंद्रगढ़ किला 17वीं शताब्दी में तांत्या टोपे ने बनाया।
सही: जिला वेबसाइट का यह वाक्य ऐतिहासिक रूप से संदिग्ध है; तांत्या टोपे 19वीं शताब्दी के 1857 विद्रोह से जुड़े थे। इसलिए इस कथन को तथ्य के रूप में याद न करें।
नामकरण का सुरक्षित तथ्य 1861 + महाराजा नरेंद्र सिंह + महेंद्र सिंह है।
भ्रम: जिले की वर्तमान तहसीलें 4 हैं।
सही: वर्तमान जिला पोर्टल के अनुसार 5 तहसील + 1 उप-तहसील।
| वर्ष / तिथि | घटना |
|---|---|
| 1518 | इब्राहिम खान सूर की नारनौल में मृत्यु |
| 1526 | प्रथम पानीपत युद्ध; मुगल सत्ता का विस्तार |
| 1540–45 | इब्राहिम खान सूर का मकबरा |
| 1556 | दूसरा पानीपत युद्ध |
| 1574–75 | शाह कुली खान का मकबरा |
| 1590–91 | जल महल का निर्माण |
| 1592–93 | जल महल के तालाब का निर्माण पूर्ण |
| 1672 | सतनामी विद्रोह का महत्वपूर्ण चरण |
| 1803 | ब्रिटिश प्रभाव का विस्तार |
| 16 नवंबर 1857 | नसीबपुर का युद्ध |
| 1861 | महेंद्रगढ़ नामकरण |
| 1938 | प्रजा मंडल गतिविधियों का महत्वपूर्ण चरण |
| 1948 | महेंद्रगढ़ जिले का गठन |
| 1949 | महेंद्रगढ़ उप-तहसील → तहसील |
| 1950 | बावल क्षेत्र का पुनर्गठन |
| 1956 | राज्य पुनर्गठन के बाद प्रशासनिक परिवर्तन |
| 1 नवंबर 1966 | महेंद्रगढ़ हरियाणा के 7 मूल जिलों में |
| 1977 | 81 गाँवों से बावल तहसील |
| 1978 | 4 तहसील |
| 1 नवंबर 1989 | रेवाड़ी अलग जिला |
| 2009 | Central University of Haryana के लिए Central Universities Act |
| 2020s | NH-152D/नांगल चौधरी logistics connectivity का विस्तार |
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